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World Kidney Cancer Day: चुपचाप किडनी को नुकसान पहुंचा रहीं दर्द निवारक दवाएं, बढ़ रहा कैंसर का खतरा

आदित्य सोफत, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 18 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार

मामूली दर्द या असहजता होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का लेना लोगों की आम आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही भविष्य में किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों और यहां तक कि किडनी कैंसर का कारण भी बन सकती है। 

World Kidney Cancer Day: Painkillers silently damaging kidneys; cancer risk rising.
किडनी को नुकसान पहुंचा रहीं दर्द निवारक दवाएं। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में दर्द निवारक दवाओं का बढ़ता चलन गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। मामूली दर्द या असहजता होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का लेना लोगों की आम आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही भविष्य में किडनी संबंधी गंभीर बीमारियों और यहां तक कि किडनी कैंसर का कारण भी बन सकती है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के नेफ्रोलॉजी विभाग के शोध में सामने आया है कि प्रदेश में क्रॉनिक किडनी रोग के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, इसका एक प्रमुख कारण दर्द की दवाओं का अनियंत्रित और लंबे समय तक किया जाने वाला सेवन है। सबसे अधिक 55 फीसदी पुरुष किसी भी प्रकार की दर्द होने पर तुरंत दर्द निवारक दवा का सेवन कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि प्रदेश में हर चौथा व्यक्ति हल्का दर्द होने पर भी दर्द निवारक दवा का प्रयोग कर रहे हैं। इससे किडनी कैंसर यानी गुर्दे के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। दर्द होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के केमिस्ट दुकानों से खरीदी जा रही दवाएं इसका सबसे बढ़ा कारण है।

 

ये भी हैं कारण

पारंपरिक पहाड़ी खानपान की जगह अब प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक, डायबिटीज (मधुमेह), बीपी, पैरों में सूजन, मूत्र में झाग ज्यादा आना या कम आना), किडनी में पथरी की समस्या भी किडनी खराब और कैंसर होने के मुख्य कारण हैं।

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2014 से 2024 के बीच 2,609 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से वर्ष 2014 से 2024 के बीच किडनी के उपचार करवाने आ रहे 2,609 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें प्रदेश में शिमला क्रोनिक किडनी रोग में सबसे ऊपर रहा है। शिमला में सबसे अधिक 39.9% मामले हैं। इसके बाद मंडी में 14.5%, सोलन में 10% और कुल्लू में 8.6% मामले हैं।

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लाहौल-स्पीति में सबसे कम मामले

इसके विपरीत कम आबादी और बेहतर जीवनशैली वाले लाहौल-स्पीति में सबसे कम 0.6% मामले पाए गए। बीमारी की चपेट में आने वालों में 60.2 फीसदी पुरुष और 39.8% महिलाएं शामिल हैं।

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