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World Yoga Day 2019 : जानें महर्षि के ध्यान-योग का महामंत्र, जिसका पश्चिम भी हो गया था दीवाना

Fri, 21 Jun 2019 06:02 AM IST
Madhukar Mishra मधुकर मिश्र, अमर उजाला
मधुकर मिश्र, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Fri, 21 Jun 2019 06:02 AM IST
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know transcendental meditation benefits of Maharishi Mahesh Yogi
महर्षि का महामंत्र

20वीं सदी में महर्षि महेश योगी ने देश-दुनिया में ध्यान और योग का अलख जगाने का अद्भुत काम किया। महर्षि का सपना था कि उनके आश्रम में एक छोटा सा भारत बसे। जहां लोगों को जीवन जीने की सही कला सिखाई जाय। इसके लिए उन्होंने दुनिया को भावातीत ध्यान का अनुपम तोहफा दिया। महर्षि के अनुसार मन के सागर को लांघना ही योग और ध्यान है।

जब पश्चिम भी हुआ ध्यान का दीवाना

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महर्षि का महामंत्र

दुनिया भर में भावातीत ध्यान और योग के माध्यम से परचम लहराने वाले महर्षि महेश योगी ने जीवन को संतुलित करने वाली इस पारंपरिक विद्या से पश्चिम को तब परिचित कराया था, जब हिप्पियों का बोल-बाला हुआ करता था। महर्षि महेश योगी ने दुनिया को अनुभवातीत ध्यान से परिचित कराने के लिए 1951 में अमेरिका से विश्वयात्रा शुरू की। लेकिन जीवन को सुखद बनाने वाली यह विधा तब चर्चा में आई जब विश्व भर में धूम मचाने वाले संगीत बैंड बीटल्स भारत आया और उनसे मस्तिष्क को एकाग्र करने वाली तकनीक को सीखने के लिए ऋषिकेश स्थित ‘चौरासी आश्रम’ पहुंच गया। 

क्या है टीएम

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महर्षि का महामंत्र

महर्षि महेश योगी के 'ट्रांसैडेंटल मेडिटेशन' या फिर कहें अनुभवातीत ध्यान का अर्थ है परे जाना। ध्यान की यह प्रक्रिया काफी सरल और सहज है। इसमें आंख मूंदकर विश्राम की अवस्था में बैठकर 15 से 20 मिनट तक प्रतिदिन दो बार किया जाता है। सबसे खास बात यह कि ध्यान की इस क्रिया को करने में किसी धार्मिक क्रिया की जरूरत नहीं पड़ती है और इसे किसी भी धर्म का व्यक्ति कर सकता है। 

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ध्यान करने के लाभ 

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महर्षि का महामंत्र
तेजी सी भागती दौड़ती जिंदगी में मन को साधने के लिए महर्षि ने सुखमय जीवन के लिए योग के आठ अंग बताए हैं। इसमें सातवें स्थान पर ध्यान आता है। वही ध्यान जिससे मन को विशिष्टता प्राप्त होती है। महर्षि महेश योगी मानते थे कि ध्यान योग के माध्यम से एक व्यक्ति सुपरमैन बन सकता है। दरअसल, ध्यान हमारे मन-मस्तिष्क को संतुलित कर हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है। ध्यान, योग और मौन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हमारी सारी ऊर्जा जो बाहर की ओर बह रही है, उसे हम ध्यान के माध्यम से भीतर की ओर मोड़ने का प्रयास करते हैं।
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हर दिन 20 मिनट करें ध्यान

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महर्षि का महामंत्र
प्रत्येक दिन महज 20 मिनट ध्यान करने से तन और मन दोनों को मजबूती मिलती है। मन और मस्तिष्क को शांति मिलती है। वह ध्यान ही है जिसके जरिये शरीर की प्राकृतिक शक्ति को बढाया जा सकता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया इसी योग ध्यान की दीवानी हो रही है।

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