Lionel Messi: 39 की उम्र में भी मेसी सबसे बड़े गेम चेंजर; इंग्लैंड के खिलाफ दिखाया फुटबॉल IQ का बेमिसाल नमूना
39 वर्षीय लियोनल मेसी ने इंग्लैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल में गोल नहीं किया, लेकिन दो असिस्ट देकर अर्जेंटीना को फाइनल में पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड ने पहले हाफ में मेसी को काफी हद तक रोक रखा था, लेकिन दूसरे हाफ में उन्होंने अपनी पोजिशन बदलकर खेल की दिशा ही बदल दी। यही उनकी फुटबॉल समझ और अनुभव का सबसे बड़ा उदाहरण बना। अब अर्जेंटीना की नजर स्पेन के खिलाफ विश्व कप खिताब बचाने पर होगी।
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फुटबॉल में उम्र बढ़ने के साथ खिलाड़ियों की रफ्तार कम हो जाती है। कई खिलाड़ी अपनी पुरानी चमक खो देते हैं और उनका प्रभाव धीरे-धीरे खत्म होने लगता है। लेकिन लियोनल मेसी उन चुनिंदा खिलाड़ियों में हैं जिन्होंने समय के साथ अपने खेल को बदल लिया। अब वे पहले की तरह लगातार डिफेंडरों को छकाकर गोल नहीं करते, बल्कि अपनी समझ, धैर्य और सटीक पासिंग से मैच का रुख बदल देते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ इसका सबसे बड़ा उदाहरण देखने को मिला। 39 वर्षीय मेसी ने गोल नहीं किया, लेकिन दो शानदार असिस्ट देकर अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार और कुल सातवीं बार फाइनल का टिकट दिलाया।
पहले हाफ में इंग्लैंड की रणनीति रही सफल
- इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल ने मेसी पर किसी एक खिलाड़ी को नहीं लगाया।
- इसके बजाय इलियट एंडरसन, जूड बेलिंगहम और डेक्लान राइस ने मिलकर उनके आसपास की जगह को बंद रखा।
- इसका असर भी दिखा। पहले हाफ में मेसी को गोल करने का कोई बड़ा मौका नहीं मिला और अर्जेंटीना भी खतरनाक आक्रमण नहीं कर सका।
- दूसरे हाफ की शुरुआत में एंथनी गॉर्डन ने गोल कर इंग्लैंड को बढ़त दिला दी।
- उस समय तक ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की रणनीति पूरी तरह कामयाब हो रही है।
मेसी ने बदली पोजिशन और बदल गया पूरा मुकाबला
- इंग्लैंड ने बढ़त मिलने के बाद अपनी रक्षात्मक लाइन पीछे खींच ली। यही फैसला मेसी के लिए सबसे बड़ा मौका बन गया।
- अब वे बीच के हिस्से में खेलने के बजाय दाईं विंग की ओर खिसक गए।
- इससे इंग्लैंड के डिफेंडरों को अपनी जगह छोड़नी पड़ी और अर्जेंटीना के अन्य खिलाड़ियों के लिए खाली जगह बनने लगी।
- मेसी ने इसी स्पेस का फायदा उठाते हुए लगातार हमले तैयार किए।
- उनके पास आने वाली हर गेंद के साथ अर्जेंटीना का दबाव बढ़ता गया और इंग्लैंड अपनी ही पेनाल्टी बॉक्स के आसपास सिमटता चला गया।
गोल नहीं किया, लेकिन दो असिस्ट से जीत दिला दी
- अर्जेंटीना का बराबरी का गोल भी मेसी की शानदार समझ का नतीजा था। दाईं ओर से गेंद मिलने पर उन्होंने जल्दबाजी में क्रॉस नहीं डाला।
- उन्होंने सही समय का इंतजार किया और फिर एंजो फर्नांडीज को ऐसा पास दिया, जिसने इंग्लैंड की पूरी रक्षापंक्ति को चीर दिया। एंजो ने शानदार फिनिश के साथ स्कोर 1-1 कर दिया।
- इंजरी टाइम में मेसी ने फिर कमाल दिखाया। उन्होंने गेंद को मैदान से बाहर जाने से बचाया और बेहतरीन क्रॉस दिया, जिस पर लाउतारो मार्टिनेज ने विजयी गोल दाग दिया।
- मेसी पूरे मैच में गोल नहीं कर सके और उनका एक्सपेक्टेड गोल (xG) महज 0.01 रहा, लेकिन उन्होंने चार मौके बनाए, जिनमें दो बड़े गोल करने वाले अवसर थे।
- यही आंकड़े बताते हैं कि उनका प्रभाव गोल करने से कहीं ज्यादा था।
अब ड्रिब्लिंग नहीं, दिमाग से जीतते हैं मुकाबला
- एक समय था जब मेसी अपनी ड्रिब्लिंग से डिफेंडरों को पीछे छोड़ देते थे। अब उनकी ड्रिब्लिंग का मकसद अलग है।
- वे विरोधी खिलाड़ियों को अपनी ओर खींचते हैं, ताकि उनके साथियों के लिए जगह बन सके।
- इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 11 में से नौ सफल ड्रिब्लिंग कीं, लेकिन इनमें से अधिकांश का उद्देश्य गोल करना नहीं, बल्कि विपक्षी टीम की रक्षात्मक संरचना को तोड़ना था।
- यही उनकी फुटबॉल IQ की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
अनुभव और समझ बनी अर्जेंटीना की सबसे बड़ी ताकत
- आज के मेसी, बार्सिलोना के उस युवा खिलाड़ी से बिल्कुल अलग हैं, जिसने अपनी रफ्तार और ड्रिब्लिंग से दुनिया को चौंका दिया था।
- अब वे हर हमले में शामिल रहने के बजाय सही समय का इंतजार करते हैं और निर्णायक क्षणों में मैच का रुख बदल देते हैं।
- कोच लियोनल स्कालोनी ने भी टीम को उसी हिसाब से तैयार किया है।
- एलेक्सिस मैक एलिस्टर, एंजो फर्नांडीज, रोड्रिगो डी पॉल और जूलियन अल्वारेज जैसे खिलाड़ी लगातार दौड़-भाग करते हैं।
- वहीं मेसी अपनी ऊर्जा बचाकर निर्णायक समय में खेल की कमान संभालते हैं।
- इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने पूरे 120 मिनट खेले और दोनों गोल में अहम भूमिका निभाई।
- इस मैच के साथ विश्व कप में उनके असिस्ट की संख्या रिकॉर्ड 12 तक पहुंच गई, जबकि छह विश्व कप में उनके कुल 21 गोल भी उनकी महानता को साबित करते हैं।
सेमीफाइनल जीतने के बाद अब अर्जेंटीना के सामने स्पेन की चुनौती है। एक ओर दो दशक से फुटबॉल को नई परिभाषा देने वाले मेसी होंगे, तो दूसरी ओर स्पेन की नई पीढ़ी के सितारे लामिन यामाल, पाउ कुबार्सी और दानी ओल्मो। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले ने यह साबित कर दिया कि मेसी को 60 मिनट तक रोक लेना काफी नहीं होता। जैसे ही उन्हें थोड़ा सा स्पेस मिलता है, वे अपने अनुभव और शानदार फुटबॉल समझ से पूरे मैच की दिशा बदल सकते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि स्पेन की मजबूत मिडफील्ड उन्हें रोक पाती है या मेसी एक बार फिर विश्व कप के सबसे बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ते हैं।