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'फॉकलैंड हमारा है': इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना ने क्यों दिखाया यह बैनर, क्या अब फीफा करेगा कार्रवाई?
Thu, 16 Jul 2026 10:46 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, अटलांटा
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 16 Jul 2026 10:46 AM IST
सार
फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का जश्न विवादों में घिर गया। मिडफील्डर जियोवानी लो सेल्सो और डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी 'लास माल्विनास सोन अर्जेंटिनास' लिखा बैनर लेकर जश्न मनाते नजर आए। यह एक राजनीतिक बैनर था, जिसको लेकर फीफा कार्रवाई कर सकता है। आइए पूरा मामला जानते हैं...
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फॉकलैंड का बैनर दिखाते अर्जेंटीना के खिलाड़ी
- फोटो : Twitter
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर 2-1 की रोमांचक जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों का जश्न अब विवाद का कारण बन गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम के खिलाड़ियों पर राजनीतिक संदेश वाला बैनर दिखाने के कारण फीफा कार्रवाई कर सकता है।
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सेमीफाइनल जीतने के बाद अर्जेंटीना के मिडफील्डर जियोवानी लो सेल्सो और डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी एक बैनर के साथ जश्न मनाते दिखाई दिए। उस पर स्पेनिश भाषा में 'लास माल्विनास सन अर्जेंटीनास' (Las Malvinas son Argentinas) लिखा था। इसका मतलब है 'माल्विनास (फॉकलैंड द्वीप) अर्जेंटीना का है।' यह मैसेज फॉकलैंड द्वीप पर अर्जेंटीना के संप्रभुता दावे से जुड़ा हुआ है।
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La bandera que mostró Lo Celso 🇦🇷pic.twitter.com/Sv2fbSs6UH
— En Una Baldosa (@enunabaldosa) July 15, 2026
फीफा और आईएफएबी के नियम क्या कहते हैं?
फुटबॉल के नियम बनाने वाली संस्था इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) और फीफा के नियमों के मुताबिक मैच के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश, नारे, झंडे या प्रतीकों का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। आईएफएबी के नियमों में कहा गया है, 'खिलाड़ियों के उपकरणों पर किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत नारे, बयान या तस्वीरें नहीं होनी चाहिए। यदि कोई खिलाड़ी या टीम ऐसा करती है तो प्रतियोगिता आयोजक, राष्ट्रीय फुटबॉल संघ या फीफा उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।' इसी नियम के आधार पर अर्जेंटीना की टीम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
फुटबॉल के नियम बनाने वाली संस्था इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (IFAB) और फीफा के नियमों के मुताबिक मैच के दौरान किसी भी प्रकार के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत संदेश, नारे, झंडे या प्रतीकों का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। आईएफएबी के नियमों में कहा गया है, 'खिलाड़ियों के उपकरणों पर किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या व्यक्तिगत नारे, बयान या तस्वीरें नहीं होनी चाहिए। यदि कोई खिलाड़ी या टीम ऐसा करती है तो प्रतियोगिता आयोजक, राष्ट्रीय फुटबॉल संघ या फीफा उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।' इसी नियम के आधार पर अर्जेंटीना की टीम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
बैनर दिखाती अर्जेंटीना की टीम
- फोटो : The Sun/AP
उपराष्ट्रपति के बयान से बढ़ा विवाद
इस विवाद को अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल की सोशल मीडिया पोस्ट ने और हवा दे दी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'फॉकलैंड (माल्विनास) अर्जेंटीना का है। उन्होंने इन्हें स्टेडियम में लाने पर रोक लगा दी, लेकिन वे यह भूल गए कि हम इन्हें अपने खून और दिल में लेकर चलते हैं।' उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला खेल से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
इस विवाद को अर्जेंटीना की उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल की सोशल मीडिया पोस्ट ने और हवा दे दी। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, 'फॉकलैंड (माल्विनास) अर्जेंटीना का है। उन्होंने इन्हें स्टेडियम में लाने पर रोक लगा दी, लेकिन वे यह भूल गए कि हम इन्हें अपने खून और दिल में लेकर चलते हैं।' उनकी इस टिप्पणी के बाद मामला खेल से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
¡Las Malvinas son Argentinas! 🇦🇷 Prohibieron llevarlas a la cancha y se olvidaron que las llevamos en la sangre y el corazón. pic.twitter.com/qB455HeqVX
— Victoria Villarruel (@VickyVillarruel) July 15, 2026
क्या है 'लास माल्विनास' विवाद?
'लास माल्विनास' वही द्वीप हैं जिन्हें ब्रिटेन फॉकलैंड आइलैंड्स कहता है। दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित ये द्वीप अर्जेंटीना के पूर्वी तट से लगभग 480 किलोमीटर दूर हैं। इन द्वीपों की संप्रभुता को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। यह विवाद 19वीं सदी से चला आ रहा है। 1982 में अर्जेंटीना की सैन्य सरकार ने इन द्वीपों पर कब्जा करने के लिए हमला किया, जिसके बाद फॉकलैंड युद्ध छिड़ गया। दो अप्रैल से 14 जून 1982 तक चले इस युद्ध में अंततः ब्रिटेन की जीत हुई। इस संघर्ष में 649 अर्जेंटीनी सैनिक, 255 ब्रिटिश सैनिक और तीन नागरिकों की मौत हुई थी।
'लास माल्विनास' वही द्वीप हैं जिन्हें ब्रिटेन फॉकलैंड आइलैंड्स कहता है। दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित ये द्वीप अर्जेंटीना के पूर्वी तट से लगभग 480 किलोमीटर दूर हैं। इन द्वीपों की संप्रभुता को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। यह विवाद 19वीं सदी से चला आ रहा है। 1982 में अर्जेंटीना की सैन्य सरकार ने इन द्वीपों पर कब्जा करने के लिए हमला किया, जिसके बाद फॉकलैंड युद्ध छिड़ गया। दो अप्रैल से 14 जून 1982 तक चले इस युद्ध में अंततः ब्रिटेन की जीत हुई। इस संघर्ष में 649 अर्जेंटीनी सैनिक, 255 ब्रिटिश सैनिक और तीन नागरिकों की मौत हुई थी।
— Unico9 (@UNICOCCS9) July 16, 2026
बैनर दिखाते अर्जेंटीना के फैंस
- फोटो : The Sun/AP
फाइनल से पहले बढ़ सकती है मुश्किल
अर्जेंटीना अब विश्व कप फाइनल में स्पेन से भिड़ने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, राजनीतिक संदेश वाले बैनर के प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर फीफा के अगले कदम पर है। यदि फीफा यह मानता है कि खिलाड़ियों ने उसके नियमों का उल्लंघन किया है, तो टीम या संबंधित खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में फीफा की ओर से आधिकारिक फैसला आना बाकी है।
अर्जेंटीना अब विश्व कप फाइनल में स्पेन से भिड़ने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, राजनीतिक संदेश वाले बैनर के प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर फीफा के अगले कदम पर है। यदि फीफा यह मानता है कि खिलाड़ियों ने उसके नियमों का उल्लंघन किया है, तो टीम या संबंधित खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में फीफा की ओर से आधिकारिक फैसला आना बाकी है।