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CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले ही भारत की बढ़ीं मुश्किलें; दो खिलाड़ियों को क्यों होना पड़ा बाहर?
Thu, 23 Jul 2026 04:51 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 23 Jul 2026 04:51 PM IST
सार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारत को बड़ा झटका लगा है। डोपिंग उल्लंघनों के कारण वेटलिफ्टिंग का कोटा घटा दिया गया, जिससे दिलबाग सिंह टीम से बाहर हो गए। वहीं जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार एनाबॉलिक स्टेरॉयड के लिए पॉजिटिव पाए गए और उन्हें भी प्रतियोगिता से हटाना पड़ा।
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
- फोटो : Commonwealth games
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विस्तार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 शुरू होने से ठीक पहले भारतीय दल को बड़ा झटका लगा है। डोपिंग नियमों के उल्लंघन (Anti-Doping Rule Violations) के कारण भारत का वेटलिफ्टिंग कोटा घटा दिया गया है। इसके चलते वेटलिफ्टर दिलबाग सिंह को टीम से बाहर होना पड़ा। वहीं, भारतीय जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार भी डोप टेस्ट में फेल होने के बाद खेलों से बाहर हो गए हैं।
डोपिंग उल्लंघनों के कारण घटा भारत का कोटा
भारतीय वेटलिफ्टिंग महासंघ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 12 सदस्यीय टीम चुनी थी, जिसकी अगुआई ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू कर रही हैं। हालांकि, गेम्स से ठीक पहले भारत को सूचना मिली कि डोपिंग उल्लंघनों के चलते देश का वेटलिफ्टिंग कोटा 12 से घटाकर 11 कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, महासंघ को इस कटौती की जानकारी बुधवार को ही मिली। इसके बाद टीम में बदलाव करते हुए दिलबाग सिंह को बाहर करने का फैसला लिया गया।
दिलबाग सिंह की चोट भी बनी वजह
सूत्रों ने बताया कि दिलबाग सिंह पहले से पीठ की चोट से जूझ रहे हैं। बर्मिंघम में लगे तैयारी शिविर के दौरान भी वह अभ्यास नहीं कर सके थे। ऐसे में कोटा कम होने के बाद उन्हें टीम से हटाने का निर्णय लिया गया।
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इन खिलाड़ियों के डोपिंग मामलों का पड़ा असर
भारत के वेटलिफ्टिंग कोटे में कटौती की वजह क्वालिफिकेशन अवधि के दौरान सामने आए कई डोपिंग मामले हैं। पुरुष वर्ग में एन अजित (71 किग्रा), साईराज परदेशी (88 किग्रा) और हरचरण सिंह (110 किग्रा) डोपिंग के कारण प्रतिबंधित हुए थे। इसके अलावा महिला वेटलिफ्टर वंशिता वर्मा (86 किग्रा) पर भी एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ था। इन लगातार मामलों के कारण भारतीय वेटलिफ्टिंग को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।
जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार भी डोप टेस्ट में फेल
भारत को दूसरा झटका जूडो से लगा। स्टार जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं। आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन डोप टेस्ट में उनके नमूने में एनाबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया, जिसके बाद उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स से हटाना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो प्रतियोगिताएं 31 जुलाई से शुरू होंगी और अरुण कुमार भारत के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
भारत की पदक उम्मीदों को झटका
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग भारत के सबसे सफल खेलों में से एक रहा है। ऐसे में कोटा कम होना और एक प्रमुख जूडो खिलाड़ी का बाहर होना भारत की पदक संभावनाओं पर असर डाल सकता है। हालांकि, मीराबाई चानू, बिंदियारानी देवी और अन्य अनुभवी खिलाड़ी अब भी भारत की उम्मीदों का केंद्र बने हुए हैं।
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डोपिंग उल्लंघनों के कारण घटा भारत का कोटा
भारतीय वेटलिफ्टिंग महासंघ ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 12 सदस्यीय टीम चुनी थी, जिसकी अगुआई ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू कर रही हैं। हालांकि, गेम्स से ठीक पहले भारत को सूचना मिली कि डोपिंग उल्लंघनों के चलते देश का वेटलिफ्टिंग कोटा 12 से घटाकर 11 कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, महासंघ को इस कटौती की जानकारी बुधवार को ही मिली। इसके बाद टीम में बदलाव करते हुए दिलबाग सिंह को बाहर करने का फैसला लिया गया।
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दिलबाग सिंह की चोट भी बनी वजह
सूत्रों ने बताया कि दिलबाग सिंह पहले से पीठ की चोट से जूझ रहे हैं। बर्मिंघम में लगे तैयारी शिविर के दौरान भी वह अभ्यास नहीं कर सके थे। ऐसे में कोटा कम होने के बाद उन्हें टीम से हटाने का निर्णय लिया गया।
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इन खिलाड़ियों के डोपिंग मामलों का पड़ा असर
भारत के वेटलिफ्टिंग कोटे में कटौती की वजह क्वालिफिकेशन अवधि के दौरान सामने आए कई डोपिंग मामले हैं। पुरुष वर्ग में एन अजित (71 किग्रा), साईराज परदेशी (88 किग्रा) और हरचरण सिंह (110 किग्रा) डोपिंग के कारण प्रतिबंधित हुए थे। इसके अलावा महिला वेटलिफ्टर वंशिता वर्मा (86 किग्रा) पर भी एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ था। इन लगातार मामलों के कारण भारतीय वेटलिफ्टिंग को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।
जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार भी डोप टेस्ट में फेल
भारत को दूसरा झटका जूडो से लगा। स्टार जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार प्रतियोगिता से बाहर हो गए हैं। आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन डोप टेस्ट में उनके नमूने में एनाबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया, जिसके बाद उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स से हटाना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो प्रतियोगिताएं 31 जुलाई से शुरू होंगी और अरुण कुमार भारत के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
भारत की पदक उम्मीदों को झटका
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग भारत के सबसे सफल खेलों में से एक रहा है। ऐसे में कोटा कम होना और एक प्रमुख जूडो खिलाड़ी का बाहर होना भारत की पदक संभावनाओं पर असर डाल सकता है। हालांकि, मीराबाई चानू, बिंदियारानी देवी और अन्य अनुभवी खिलाड़ी अब भी भारत की उम्मीदों का केंद्र बने हुए हैं।