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कोडिंग का जमाना गया: Google के पूर्व CEO ने बताया- अब प्रोग्रामर चैन की नींद सोएंगे और AI करेगा महीनों का काम
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 30 Mar 2026 11:41 AM IST
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सार
AI के दौर में प्रोग्रामिंग का तरीका तेजी से बदल रहा है। पूर्व गूगल के पूर्व एरिक श्मिट के मुताबिक, अब टॉप प्रोग्रामर खुद कोड लिखने के बजाय AI को निर्देश देते हैं और सिस्टम खुद काम पूरा करता है, जिससे पूरी इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव दिख रहा है।
गूगल के एक्स सीईओ ने कोडिंग के भविष्य पर दिया बड़ा बयान
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
गूगल के पूर्व सीईओ एरिक श्मिट ने कोडिंग की दुनिया में एक बड़े बदलाव का दावा किया है। उनके मुताबिक, काबिल प्रोग्रामर्स अब खुद कोड लिखना छोड़कर एआई को मैनेज कर रहे हैं, जिससे महीनों का काम अब महज एक रात में पूरा हो रहा है। एरिक श्मिट ने अपने एक स्टार्टअप के प्रोग्रामर का उदाहरण देते हुए बताया कि कोडिंग का काम अब कितना बदल गया है।
वह प्रोग्रामर हर शाम 7 बजे एआई को बताता है कि उसे क्या बनाना है, उसे परखने के लिए एक 'टेस्ट फंक्शन' सेट करता है और फिर 'रन' बटन दबाकर चैन से अपनी पत्नी के साथ डिनर करने चला जाता है। जब वह सो रहा होता है, तो एआई पूरी रात काम करता है और सुबह 4 बजे तक सब कुछ तैयार कर देता है। श्मिट ने कहा, "जो काम गूगल में 10 प्रोग्रामर्स मिलकर 6 महीने में करते थे, वह अब यह अकेला बंदा सोकर कर लेता है।"
क्या प्रोग्रामर्स की नौकरियां खत्म हो जाएंगी?
आम तौर पर माना जा रहा है कि एआई प्रोग्रामर्स की जगह ले लेगा, लेकिन श्मिट का सोचना इसके ठीक उलट है। उनका मानना है कि जो टॉप लेवल के इंजीनियर हैं, उनकी अहमियत और भी बढ़ जाएगी। पहले एक टॉप इंजीनियर सामान्य कोडर से 10 गुना बेहतर होता था, अब यह अंतर और भी ज्यादा होने वाला है। उन्होंने बताया कि अब हाथ से कोड लिखना खत्म हो रहा है। अब असली हुनर कोड लिखना नहीं, बल्कि एआई सिस्टम को सही निर्देश देना, सीमाओं को तय करना और यह पहचानना है कि एआई का बनाया हुआ रिजल्ट परफेक्ट है या नहीं।
यह भी पढ़ें: व्हाइट हाउस में रोबोट ने कहा ‘स्वागतम’: बंगाली समेत 11 भाषाओं में करता है बात, एआई समिट का बना आकर्षण
बिजनेस के बोरिंग कामों को खत्म करेगा एआई
श्मिट का मानना है कि एआई का असली आर्थिक फायदा सिर्फ कोडिंग में नहीं, बल्कि कंपनियों के उन उबाउ कामों में है जिन पर हर साल अरबों रुपये खर्च होते हैं। इनमें बिलिंग, अकाउंटिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिलीवरी जैसे ऑपरेशन्स शामिल हैं। वे कहते हैं कि एआई इन बुनियादी बिजनेस प्रोसेस को पूरी तरह ऑटोमैटिक बना देगा।
2029 तक आ सकता है सुपर इंटेलिजेंट एआई
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक चर्चा के दौरान श्मिट ने अनुमान लगाते हुए कहा कि 2029 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) हकीकत बन सकता है। यह ऐसा एआई होगा जो बिना इंसानी निर्देश के खुद को बेहतर बनाना और भविष्य की योजनाएं बनाना सीख जाएगा। यह न केवल कोडिंग बल्कि चिकित्सा, जलवायु परिवर्तन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऐसी क्रांतियां लाएगा जो आज असंभव लगती हैं।
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वह प्रोग्रामर हर शाम 7 बजे एआई को बताता है कि उसे क्या बनाना है, उसे परखने के लिए एक 'टेस्ट फंक्शन' सेट करता है और फिर 'रन' बटन दबाकर चैन से अपनी पत्नी के साथ डिनर करने चला जाता है। जब वह सो रहा होता है, तो एआई पूरी रात काम करता है और सुबह 4 बजे तक सब कुछ तैयार कर देता है। श्मिट ने कहा, "जो काम गूगल में 10 प्रोग्रामर्स मिलकर 6 महीने में करते थे, वह अब यह अकेला बंदा सोकर कर लेता है।"
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क्या प्रोग्रामर्स की नौकरियां खत्म हो जाएंगी?
आम तौर पर माना जा रहा है कि एआई प्रोग्रामर्स की जगह ले लेगा, लेकिन श्मिट का सोचना इसके ठीक उलट है। उनका मानना है कि जो टॉप लेवल के इंजीनियर हैं, उनकी अहमियत और भी बढ़ जाएगी। पहले एक टॉप इंजीनियर सामान्य कोडर से 10 गुना बेहतर होता था, अब यह अंतर और भी ज्यादा होने वाला है। उन्होंने बताया कि अब हाथ से कोड लिखना खत्म हो रहा है। अब असली हुनर कोड लिखना नहीं, बल्कि एआई सिस्टम को सही निर्देश देना, सीमाओं को तय करना और यह पहचानना है कि एआई का बनाया हुआ रिजल्ट परफेक्ट है या नहीं।
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बिजनेस के बोरिंग कामों को खत्म करेगा एआई
श्मिट का मानना है कि एआई का असली आर्थिक फायदा सिर्फ कोडिंग में नहीं, बल्कि कंपनियों के उन उबाउ कामों में है जिन पर हर साल अरबों रुपये खर्च होते हैं। इनमें बिलिंग, अकाउंटिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिलीवरी जैसे ऑपरेशन्स शामिल हैं। वे कहते हैं कि एआई इन बुनियादी बिजनेस प्रोसेस को पूरी तरह ऑटोमैटिक बना देगा।
2029 तक आ सकता है सुपर इंटेलिजेंट एआई
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एक चर्चा के दौरान श्मिट ने अनुमान लगाते हुए कहा कि 2029 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) हकीकत बन सकता है। यह ऐसा एआई होगा जो बिना इंसानी निर्देश के खुद को बेहतर बनाना और भविष्य की योजनाएं बनाना सीख जाएगा। यह न केवल कोडिंग बल्कि चिकित्सा, जलवायु परिवर्तन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऐसी क्रांतियां लाएगा जो आज असंभव लगती हैं।
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