{"_id":"69eb3e0df961ad87f30af9f7","slug":"india-6g-preparation-600mhz-spectrum-validity-extended-trai-update-2026-04-24","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"भारत में 6G की तैयारी तेज: ट्राई ने बढ़ाई 600 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता, इंटरनेट होगा और फास्ट","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
भारत में 6G की तैयारी तेज: ट्राई ने बढ़ाई 600 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता, इंटरनेट होगा और फास्ट
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Fri, 24 Apr 2026 03:27 PM IST
विज्ञापन
सार
भारत तेजी से 6G युग की ओर बढ़ रहा है। इसी दिशा में 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है। TRAI के अनुसार, बढ़ती डेटा मांग, AI के विस्तार और बेहतर नेटवर्क के लिए यह कदम भविष्य की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में अहम साबित होगा।
6G के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर ने बढ़ाई स्पेकट्रम वैलिडिटी
- फोटो : AI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
देश में अगली पीढ़ी की इंटरनेट तकनीक 6G को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने जानकारी दी है कि 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ा दी गई है। यह बैंड भविष्य के हाई-स्पीड इंटरनेट और बेहतर नेटवर्क कवरेज के लिए बेहद अहम माना जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला देश में तेजी से बढ़ती डेटा खपत को देखते हुए लिया गया है। सरकार और रेगुलेटर का मकसद स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाना और नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना है, ताकि यूजर्स को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
स्पेक्ट्रम उपयोग और शेयरिंग पर जोर
TRAI ने स्पेक्ट्रम के बेहतर इस्तेमाल के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे सुझाव भी दिए हैं। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी। इससे नेटवर्क लागत कम होने और कवरेज बढ़ने की उम्मीद है।
प्राइवेट 5G नेटवर्क पर भी फोकस
रेगुलेटर ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क के लिए गाइडलाइन जारी की है, जिससे कंपनियां अपने निजी 5G नेटवर्क तैयार कर सकें। हालांकि, इस क्षेत्र में अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिली है और इसे आगे बढ़ाने के लिए बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है।
यह भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया की राह पर नॉर्वे: 16 वर्ष से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया हो सकता है बैन, जानें क्या हैं नियम
TRAI चेयरमैन के अनुसार, आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क डेटा की बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण नेटवर्क पर दबाव और बढ़ेगा, जिससे नई तकनीकों की जरूरत पड़ेगी।
रिकॉर्ड ब्रॉडबैंड ग्रोथ और आगे की रणनीति
2025-26 के दौरान देश में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) का मिश्रित मॉडल अपनाने की जरूरत बताई गई है। हालांकि, इनडोर कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे सुधारने के लिए नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: Mythos: क्या ‘मिथोस’ बनेगा बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा? RBI ने बैंकों संग शुरू की हाई लेवल चर्चा
TRAI ने सुझाव दिया है कि इमारतों के डिजाइन के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया जाए। सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार भी कर लिया है, जिससे भविष्य में बेहतर नेटवर्क कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
देश के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए TRAI ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जो आने वाले समय में स्मार्ट डिवाइस और ऑटोमेशन को मजबूती देंगे।
Trending Videos
रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला देश में तेजी से बढ़ती डेटा खपत को देखते हुए लिया गया है। सरकार और रेगुलेटर का मकसद स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बढ़ाना और नेटवर्क को अधिक कुशल बनाना है, ताकि यूजर्स को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्पेक्ट्रम उपयोग और शेयरिंग पर जोर
TRAI ने स्पेक्ट्रम के बेहतर इस्तेमाल के लिए इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम को लीज पर देने जैसे सुझाव भी दिए हैं। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग को बढ़ावा देने की बात कही गई है। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करना अनिवार्य होगा, जबकि निजी कंपनियां अपनी सुविधाएं स्वेच्छा से साझा कर सकेंगी। इससे नेटवर्क लागत कम होने और कवरेज बढ़ने की उम्मीद है।
प्राइवेट 5G नेटवर्क पर भी फोकस
रेगुलेटर ने कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क के लिए गाइडलाइन जारी की है, जिससे कंपनियां अपने निजी 5G नेटवर्क तैयार कर सकें। हालांकि, इस क्षेत्र में अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिली है और इसे आगे बढ़ाने के लिए बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई है।
यह भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया की राह पर नॉर्वे: 16 वर्ष से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया हो सकता है बैन, जानें क्या हैं नियम
TRAI चेयरमैन के अनुसार, आने वाले समय में सिर्फ मोबाइल नेटवर्क डेटा की बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के कारण नेटवर्क पर दबाव और बढ़ेगा, जिससे नई तकनीकों की जरूरत पड़ेगी।
रिकॉर्ड ब्रॉडबैंड ग्रोथ और आगे की रणनीति
2025-26 के दौरान देश में 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) का मिश्रित मॉडल अपनाने की जरूरत बताई गई है। हालांकि, इनडोर कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे सुधारने के लिए नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।
यह भी पढ़ें: Mythos: क्या ‘मिथोस’ बनेगा बैंकिंग सिस्टम के लिए खतरा? RBI ने बैंकों संग शुरू की हाई लेवल चर्चा
TRAI ने सुझाव दिया है कि इमारतों के डिजाइन के समय ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल किया जाए। सरकार ने इस सुझाव को स्वीकार भी कर लिया है, जिससे भविष्य में बेहतर नेटवर्क कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।
देश के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए TRAI ने कई अहम सुझाव दिए हैं, जो आने वाले समय में स्मार्ट डिवाइस और ऑटोमेशन को मजबूती देंगे।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all Tech News in Hindi related to live news update of latest mobile reviews apps, tablets etc. Stay updated with us for all breaking news from Tech and more Hindi News.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

कमेंट
कमेंट X