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AI privacy risk: आप भी नाम बदलकर चलाते हैं सोशल मीडिया अकाउंट ? AI खोल सकता है आपका राज; रिसर्च में बड़ा खुलासा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Tue, 10 Mar 2026 06:07 PM IST
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सार
AI online privacy risk: अगर आप सोचते हैं कि फेक नाम या अनाम प्रोफाइल बनाकर आप इंटरनेट पर पूरी तरह सुरक्षित हैं, तो सावधान हो जाइए, क्योंकि एक नई चौंकाने वाली स्टडी के अनुसार, आधुनिक AI मॉडल अब अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर बिखरी आपकी छोटी-छोटी जानकारियों को जोड़कर आपकी असली पहचान उजागर कर सकते हैं। जाेकि तकनीक प्राइवेसी के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।
एआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंटरनेट पर बहुत से लोग सोशल मीडिया पर अपनी असली पहचान छिपाकर एक्टिव रहते हैं, लेकिन नई रिसर्च के अनुसार, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसे गुमनाम यूजर्स की पहचान तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। स्टडी में पाया गया कि AI अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद छोटी-छोटी जानकारी को जोड़कर किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का अनुमान लगा सकता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
इस स्टडी AI शोधकर्ता साइमन लर्मन और डैनियल पालेका ने की है। उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि क्या बड़े भाषा मॉडल यानी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) किसी गुमनाम ऑनलाइन प्रोफाइल को असली व्यक्ति से जोड़ सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ अनाम सोशल मीडिया प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी AI सिस्टम को दी और उससे इंटरनेट पर उपलब्ध अन्य स्रोतों से मिलती-जुलती जानकारी खोजने को कहा।
ये भी पढ़े: Cyber Fraud: बॉम्बे हाई कोर्ट की जज के साथ लाखों की ठगी, रिवॉर्ड पॉइंट्स के चक्कर में लगा चूना; ऐसे बचें आप
एआई ने कैसे पहचानी असली पहचान
प्रयोग में एक उदाहरण लिया गया जिसमें एक गुमनाम यूजर ने अपने पोस्ट में स्कूल की परेशानियों का जिक्र किया था और बताया था कि वह अपने कुत्ते बिस्किट को अक्सर सैन फ्रांसिस्को के Dolores Park में घुमाने ले जाता है। एआई सिस्टम ने इन संकेतों के आधार पर इंटरनेट पर मौजूद अन्य पोस्ट और प्रोफाइल्स को खंगाला और अंत में उस अनाम अकाउंट को एक वास्तविक व्यक्ति से काफी हद तक जोड़ने में सफलता हासिल की।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
शोधकर्ताओं के अनुसार पहले इस तरह की पहचान उजागर करने के लिए एक्सपर्ट्स और बड़े संसाधनों की जरूरत होती थी। लेकिन अब इंटरनेट और सार्वजनिक AI टूल्स की मदद से यह काम काफी आसान और सस्ता हो गया है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि इंटरनेट पर वास्तव में कौन-सी जानकारी निजी मानी जा सकती है।
एआई हमेशा सही नहीं होता
हालांकि शोध में यह भी बताया गया है कि एआई कोई जादुई समाधान नहीं है। कई बार इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी इतनी कम होती है कि सिस्टम सही निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता। कुछ मामलों में संभावित लोगों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि पहचान तय करना मुश्किल हो जाता है। फिर भी कई परिस्थितियों में यह तकनीक ऑनलाइन गुमनामी को कमजोर कर सकती है।
संभावित खतरे क्या हैं?
एक्सपर्ट्स का का मानना है कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कई तरीकों से हो सकता है। सरकारें गुमनाम कार्यकर्ताओं या विरोध करने वालों की पहचान करने के लिए इसका उपयोग कर सकती हैं। साइबर अपराधी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय स्कैम तैयार कर सकते हैं और हैकर स्पीयर-फिशिंग जैसे हमलों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं
ये भी पढ़े: AI Fatigue: एआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है आपके दिमाग को 'फ्राई', रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
यूजर्स और प्लेटफॉर्म कैसे बचाव करें
इस खतरे को कम करने के लिए एक्सपर्ट्स ने कुछ उपाय बताए हैं:
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रिसर्च में क्या सामने आया?
इस स्टडी AI शोधकर्ता साइमन लर्मन और डैनियल पालेका ने की है। उन्होंने यह जांचने की कोशिश की कि क्या बड़े भाषा मॉडल यानी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) किसी गुमनाम ऑनलाइन प्रोफाइल को असली व्यक्ति से जोड़ सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कुछ अनाम सोशल मीडिया प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी AI सिस्टम को दी और उससे इंटरनेट पर उपलब्ध अन्य स्रोतों से मिलती-जुलती जानकारी खोजने को कहा।
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ये भी पढ़े: Cyber Fraud: बॉम्बे हाई कोर्ट की जज के साथ लाखों की ठगी, रिवॉर्ड पॉइंट्स के चक्कर में लगा चूना; ऐसे बचें आप
एआई ने कैसे पहचानी असली पहचान
प्रयोग में एक उदाहरण लिया गया जिसमें एक गुमनाम यूजर ने अपने पोस्ट में स्कूल की परेशानियों का जिक्र किया था और बताया था कि वह अपने कुत्ते बिस्किट को अक्सर सैन फ्रांसिस्को के Dolores Park में घुमाने ले जाता है। एआई सिस्टम ने इन संकेतों के आधार पर इंटरनेट पर मौजूद अन्य पोस्ट और प्रोफाइल्स को खंगाला और अंत में उस अनाम अकाउंट को एक वास्तविक व्यक्ति से काफी हद तक जोड़ने में सफलता हासिल की।
क्यों बढ़ रही है चिंता?
शोधकर्ताओं के अनुसार पहले इस तरह की पहचान उजागर करने के लिए एक्सपर्ट्स और बड़े संसाधनों की जरूरत होती थी। लेकिन अब इंटरनेट और सार्वजनिक AI टूल्स की मदद से यह काम काफी आसान और सस्ता हो गया है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि इंटरनेट पर वास्तव में कौन-सी जानकारी निजी मानी जा सकती है।
एआई हमेशा सही नहीं होता
हालांकि शोध में यह भी बताया गया है कि एआई कोई जादुई समाधान नहीं है। कई बार इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी इतनी कम होती है कि सिस्टम सही निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता। कुछ मामलों में संभावित लोगों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि पहचान तय करना मुश्किल हो जाता है। फिर भी कई परिस्थितियों में यह तकनीक ऑनलाइन गुमनामी को कमजोर कर सकती है।
संभावित खतरे क्या हैं?
एक्सपर्ट्स का का मानना है कि इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कई तरीकों से हो सकता है। सरकारें गुमनाम कार्यकर्ताओं या विरोध करने वालों की पहचान करने के लिए इसका उपयोग कर सकती हैं। साइबर अपराधी व्यक्तिगत जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय स्कैम तैयार कर सकते हैं और हैकर स्पीयर-फिशिंग जैसे हमलों में किसी भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर सकते हैं
ये भी पढ़े: AI Fatigue: एआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है आपके दिमाग को 'फ्राई', रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
यूजर्स और प्लेटफॉर्म कैसे बचाव करें
इस खतरे को कम करने के लिए एक्सपर्ट्स ने कुछ उपाय बताए हैं:
- सोशल मीडिया कंपनियों के लिए।
- डेटा एक्सेस को सीमित करना।
- ऑटोमेटेड डेटा स्क्रैपिंग बॉट्स को रोकना।
- बड़े पैमाने पर डेटा डाउनलोड को नियंत्रित करना।
- पोस्ट में लोकेशन और निजी जानकारी साझा न करें।
- अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक जैसी व्यक्तिगत जानकारी देने से बचें।
- अपनी प्रोफाइल की प्राइवेसी सेटिंग्स नियमित रूप से जांचते रहें।
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