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यूपी एमएलसी चुनाव: सांसदों-विधायकों की फौज के बाद भी जीत के आकाश को नहीं छू सकी भाजपा; सपा ने फेल किया हर दांव
Thu, 29 Oct 2026 03:24 PM IST
Sharukh Khan
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, आगरा
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, आगरा
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 29 Oct 2026 03:24 PM IST
सार
आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में सांसदों-विधायकों की फौज के बाद भी भाजपा जीत के आकाश को नहीं छू सकी। पहले अपने पाले में करने में नाकाम है, फिर जोड़-तोड़ के बाद भी भाजपाई अपने प्रत्याशी को नहीं जिता पाए।
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Agra MLC Election
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में अपने प्रत्याशी हरि किशोर तिवारी को जिताने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी। मगर शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभागों के दो मंत्रियों के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी को हार झेलनी पड़ी।
पार्टी के पास आगरा, अलीगढ़ और कानपुर मंडल में आने वाले 12 जिलों में 40 से ज्यादा विधायक-सांसद हैं। कई केंद्र व प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। इसके बावजूद संगठन की ताकत के बल पर मैनेजमेंट का दंभ भरने के बावजूद भाजपा शिक्षक स्नातक निर्वाचन में जीत का आकाश नहीं छू सकी।
इस चुनाव में शुरुआती दौर में तो पूरी लगभग पूरी पार्टी ही निर्दलीय एमएलसी रहे डॉ. आकाश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने और उसके ही टिकट पर चुनाव लड़ने की बात माने बैठे थे।
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पार्टी के पास आगरा, अलीगढ़ और कानपुर मंडल में आने वाले 12 जिलों में 40 से ज्यादा विधायक-सांसद हैं। कई केंद्र व प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। इसके बावजूद संगठन की ताकत के बल पर मैनेजमेंट का दंभ भरने के बावजूद भाजपा शिक्षक स्नातक निर्वाचन में जीत का आकाश नहीं छू सकी।
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इस चुनाव में शुरुआती दौर में तो पूरी लगभग पूरी पार्टी ही निर्दलीय एमएलसी रहे डॉ. आकाश अग्रवाल के भाजपा में शामिल होने और उसके ही टिकट पर चुनाव लड़ने की बात माने बैठे थे।
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बात न बनने पर भी भाजपाई शुरुआती दौर में तो सुस्त रहे लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा और डॉ. आकाश सपा की साइकिल पर सवार हुए, वैसे ही पूरी भाजपा एक्टिव मोड में आ गई।
लगातार जा रहे फीडबैक में जब बात हाथ से निकलती दिखी तो लखनऊ से आए कड़े संदेश के बाद केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, योगी सरकार की मंत्री बेबीरानी मौर्य, जयवीर सिंह, लक्ष्मी नारायण चौधरी, और सुरेंद्र दिलेर समेत आधा दर्जन से अधिक केंद्रीय व राज्य मंत्रियों, 40 से ज्यादा लोकसभा-राज्यसभा सदस्यों, विधायकों व विधान परिषद सदस्यों की फौज मैदान में उतर गई।
हर जनप्रतिनिधि मतदाताओं और स्कूलों की सूची लिए गली-गली घूमती रही और इस बात को सुनिश्चित करने में जुटी रही कि हरि किशोर तिवारी को वोट मिले। इस सब के बावजूद भाजपा अपने प्रत्याशी को जीत नहीं दिला सकी।
आकाश ने हर दांव किया फेल
साइकिल पर सवार हुए आकाश को आंकने में भाजपा नाकाम रही। भाजपा के हर दांव को अपनी रणनीति से फेल किया। साथ ही उनके किसी भी दांव का काट पार्टी के पास नहीं था। पार्टी पर आरोप लगा कि स्कूल प्रबंधकों को धमकाया जा रहा है।
साइकिल पर सवार हुए आकाश को आंकने में भाजपा नाकाम रही। भाजपा के हर दांव को अपनी रणनीति से फेल किया। साथ ही उनके किसी भी दांव का काट पार्टी के पास नहीं था। पार्टी पर आरोप लगा कि स्कूल प्रबंधकों को धमकाया जा रहा है।
आकाश ने अपील जारी की कि वोट देने के बाद पता नहीं चलेगा कि किसने किसे वोट किया। मतदान के दिन भाजपा का हर पदाधिकारी व जनप्रतिनिधि खुद बस्तों पर मौजूद रहा। मामला हाथ से निकलने को हुआ तो आकाश का रोते हुए धर्म परिवर्तन और भाजपा-प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाता वीडियो संजीवनी बन गया।
छह में से आगरा के तीन मतदेय स्थलों पर दोबारा पोलिंग हुई। दबाव का आलम यह रहा कि मतगणना के दिन तक भाजपा नेता धरने तक पर बैठ गए लेकिन प्रशासनिक अमला उनकी अनसुनी करता रहा।
गढ़ में ही भाजपा प्रत्याशी को नहीं मिला दो शिक्षा मंत्रियों के प्रभाव का लाभ
आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में अपने प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी को जिताने के लिए कहने को तो भारतीय जनता पार्टी ने पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभागों के दो मंत्रियों के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी को हार झेलनी पड़ी।
आगरा खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव में अपने प्रत्याशी हरिकिशोर तिवारी को जिताने के लिए कहने को तो भारतीय जनता पार्टी ने पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभागों के दो मंत्रियों के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी को हार झेलनी पड़ी।
आगरा की दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक योगेंद्र उपाध्याय प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री हैं। वहीं, अलीगढ़ से ताल्लुक रखने वाले संदीप सिंह बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री हैं। दोनों को ही पूरी ताकत से प्रत्याशियों के पक्ष में स्कूल-कॉलेज प्रबंधकों व शिक्षकों को लामबंद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
दोनों ने कई जगह शिक्षक व स्नातक सम्मेलनों में शिरकत कर प्रत्याशी के पक्ष में जनसंपर्क भी किया। फिर भी नतीजा यह हुआ कि हरिकिशोर तिवारी मतगणना में शुुरुआती दौर से ही पीछे हो गए। अब पार्टी के भीतर मंत्रियों के प्रभाव और पकड़ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।