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UP: आगरा मेट्रो के लिए पेड़ कटेंगे या बचेंगे? सीईसी ने मांगी नई सूची, पावरग्रिड को लाइन बदलने के निर्देश
Fri, 21 Aug 2026 09:44 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 21 Aug 2026 09:44 AM IST
सार
एमजी रोड समेत अन्य स्थानों पर मेट्रो निर्माण के लिए पेड़ काटने के मामले में सीईसी ने यूपीएमआरसी से संशोधित सूची मांगी है और पावरग्रिड को हाईटेंशन लाइन का अलाइनमेंट बदलने के निर्देश दिए हैं। सीईसी ने समोगर और प्रकाश नगर के प्रस्तावित पुलों को गैरजरूरी बताया है, जबकि आईआईटी रूड़की ने प्रकाश नगर आरओबी को ट्रैफिक और औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से जरूरी माना है।
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आगरा मेट्रो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के एमजी रोड के डिवाइडर पर लगे पेड़ों को काटने की अनुमति के मामले में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) से संशोधित सूची मांगी है। पर्यावरणविद् डॉ. शरद गुप्ता की शिकायत पर बीते 30 जुलाई को आगरा आए कमेटी के सदस्यों ने निरीक्षण के बाद यह रिपोर्ट सौंपी है जिसमें मेट्रो निर्माण के बुनियादी ढांचे में हुए बदलावों को जरूरी माना गया है। संशोधित सूची मिलने के बाद सीईसी पेड़ काटने के आवेदन पर अपनी अंतिम सिफारिश भेजेगी।
सीईसी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गर्कोटी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2020 को यूपीएमआरसी को 1,823 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। हालांकि, बुनियादी ढांचे में कुछ मामूली बदलाव हुए हैं, जिन्हें सीईसी ने वास्तविक परिवर्तन मानते हुए संशोधित सूची की मांग की है। दूसरी ओर, पावरग्रिड कॉरपोरेशन ने हाईटेंशन लाइन के नीचे आ रहे पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी, जिसे सीईसी ने खारिज करते हुए ट्रांसमिशन लाइन का अलाइनमेंट बदलने के निर्देश दिए हैं। कमेटी ने पेड़ों की मार्किंग प्रक्रिया का अलाइनमेंट दोबारा कर 15 दिन के भीतर डीएफओ के माध्यम से सीईसी को सूची भेजने को कहा है।
समोगर और प्रकाश नगर पुल की नहीं बताई जरूरत
सीईसी ने राज्य सेतु निगम के रहनकला-रायपुर रोड पर समोगर पुल और प्रकाश नगर में प्रस्तावित आरओबी के प्रस्ताव को गैरजरूरी बताया है। 29 जुलाई को सीईसी के निरीक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि समोगर पर प्रस्तावित पुल स्थल से एक किमी. दूर इनर रिंग रोड पर पहले ही पुल बना हुआ है। इस पर ट्रैफिक ही नहीं है। 40 मिनट तक सीईसी की मौजूदगी में एक भी चार पहिया वाहन नजर नहीं आया। इनर रिंग रोड पर बने मौजूद पुल से ही इस क्षेत्र को सेवा दी जा सकती है।प्रकाश नगर आरओबी को भी सीईसी ने खारिज कर दिया। रिपोर्ट में कहा है कि यहां रेलवे लाइन एलिवेटेड है। दो अंडरपास पहले ही मौजूद हैं। ट्रैफिक कम है और उद्यमियों ने आरओबी का विरोध किया है।
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आईआईटी रिपोर्ट में प्रकाश नगर पुल को माना जरूरी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रूड़की के विशेषज्ञों ने नुनिहाई औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज को जरूरी बताया है। आईआईटी की रिपोर्ट सीईसी से एकदम अलग है। सीईसी ने पुल को गैरजरूरी माना है, जबकि आईआईटी रूड़की ने आरओबी निर्माण को ट्रैफिक और उद्योग के लिए जरूरी बताया है। आईआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 400 मीटर लंबी और 18 मीटर चौड़ी सड़क है। ओवरब्रिज के सुपरस्ट्रक्चर के नीचे न्यूनतम क्लीयरेंस 6.898 मीटर है जो मानक 5.50 मीटर से अधिक है। इससे ओवरलोडेड और भारी वाणिज्यिक वाहन बिना किसी रुकावट के गुजर सकेंगे। ट्रेलर मुड़ने के लिए पिलर के बीच 24 मीटर दूरी रखी गई है जो 20 मीटर टर्निंग रेडियस वाले ट्रेलर के लिए ठीक है।
एत्मादपुर विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने कहा कि समोगर और प्रकाश नगर पुल की जरूरत के लिए सीईसी के सामने अपना पक्ष रखेंगे। शासन से भी पैरवी कराई जाएगी। जहां पेड़ आड़े आ रहे हैं, वहां पुल का अलाइनमेंट बदला जा सकता है, लेकिन पुल बनना चाहिए।
सेतु निगम के प्रबंधक आरबी दिवाकर का कहना है किआईआईटी रूड़की ने आरओबी के लिए तकनीकी अध्ययन किया है। उनकी रिपोर्ट में स्पष्ट है कि आरओबी जरूरी है। सीईसी के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे और पक्ष रखेंगे।
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सीईसी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गर्कोटी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2020 को यूपीएमआरसी को 1,823 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। हालांकि, बुनियादी ढांचे में कुछ मामूली बदलाव हुए हैं, जिन्हें सीईसी ने वास्तविक परिवर्तन मानते हुए संशोधित सूची की मांग की है। दूसरी ओर, पावरग्रिड कॉरपोरेशन ने हाईटेंशन लाइन के नीचे आ रहे पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी थी, जिसे सीईसी ने खारिज करते हुए ट्रांसमिशन लाइन का अलाइनमेंट बदलने के निर्देश दिए हैं। कमेटी ने पेड़ों की मार्किंग प्रक्रिया का अलाइनमेंट दोबारा कर 15 दिन के भीतर डीएफओ के माध्यम से सीईसी को सूची भेजने को कहा है।
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समोगर और प्रकाश नगर पुल की नहीं बताई जरूरत
सीईसी ने राज्य सेतु निगम के रहनकला-रायपुर रोड पर समोगर पुल और प्रकाश नगर में प्रस्तावित आरओबी के प्रस्ताव को गैरजरूरी बताया है। 29 जुलाई को सीईसी के निरीक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि समोगर पर प्रस्तावित पुल स्थल से एक किमी. दूर इनर रिंग रोड पर पहले ही पुल बना हुआ है। इस पर ट्रैफिक ही नहीं है। 40 मिनट तक सीईसी की मौजूदगी में एक भी चार पहिया वाहन नजर नहीं आया। इनर रिंग रोड पर बने मौजूद पुल से ही इस क्षेत्र को सेवा दी जा सकती है।प्रकाश नगर आरओबी को भी सीईसी ने खारिज कर दिया। रिपोर्ट में कहा है कि यहां रेलवे लाइन एलिवेटेड है। दो अंडरपास पहले ही मौजूद हैं। ट्रैफिक कम है और उद्यमियों ने आरओबी का विरोध किया है।
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आईआईटी रिपोर्ट में प्रकाश नगर पुल को माना जरूरी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रूड़की के विशेषज्ञों ने नुनिहाई औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज को जरूरी बताया है। आईआईटी की रिपोर्ट सीईसी से एकदम अलग है। सीईसी ने पुल को गैरजरूरी माना है, जबकि आईआईटी रूड़की ने आरओबी निर्माण को ट्रैफिक और उद्योग के लिए जरूरी बताया है। आईआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 400 मीटर लंबी और 18 मीटर चौड़ी सड़क है। ओवरब्रिज के सुपरस्ट्रक्चर के नीचे न्यूनतम क्लीयरेंस 6.898 मीटर है जो मानक 5.50 मीटर से अधिक है। इससे ओवरलोडेड और भारी वाणिज्यिक वाहन बिना किसी रुकावट के गुजर सकेंगे। ट्रेलर मुड़ने के लिए पिलर के बीच 24 मीटर दूरी रखी गई है जो 20 मीटर टर्निंग रेडियस वाले ट्रेलर के लिए ठीक है।
एत्मादपुर विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने कहा कि समोगर और प्रकाश नगर पुल की जरूरत के लिए सीईसी के सामने अपना पक्ष रखेंगे। शासन से भी पैरवी कराई जाएगी। जहां पेड़ आड़े आ रहे हैं, वहां पुल का अलाइनमेंट बदला जा सकता है, लेकिन पुल बनना चाहिए।
सेतु निगम के प्रबंधक आरबी दिवाकर का कहना है किआईआईटी रूड़की ने आरओबी के लिए तकनीकी अध्ययन किया है। उनकी रिपोर्ट में स्पष्ट है कि आरओबी जरूरी है। सीईसी के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे और पक्ष रखेंगे।