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गेमिंग एप: 50₹ के बदले जीतेंगे एक हजार, खाते में रकम आए तो हो जाएं सावधान; जानें साइबर अपराधियों की नई ट्रिक
Wed, 05 Aug 2026 11:55 AM IST
Dhirendra Singh
तरुण चौहान, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मथुरा
तरुण चौहान, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मथुरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:55 AM IST
सार
साइबर ठग ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को 50 रुपये लगाकर 1000 रुपये जीतने का लालच दे रहे हैं और जीत की रकम के नाम पर उनके खातों में ठगी का पैसा भेज रहे हैं। अनजाने में खिलाड़ी साइबर ठगी की रकम खपाने वाले मनी म्यूल बन रहे हैं, जिससे उन्हें पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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गेमिंग एप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर अपराधियों की इस नई ट्रिक ने पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां ऑनलाइन गेम के जरिए साइबर ठग अपनी ठगी की रकम को ठिकाने लगा रहे हैं। उधर, लोग यह खेल समझ नहीं पा रहे हैं और अनजाने में ठगी का हिस्सा बन जाते हैं। साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को खपाने का एक नया तरीका ढूंढ निकाला है। साइबर ठग ऑनलाइन गेमिंग के जरिए खास तौर पर कम पढ़े-लिखे, मजदूरी करने वाले और ठेले-ढकेल लगाने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। 50 रुपये में एक हजार रुपये जीतने का लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल मनी म्यूल (रकम खपाने का जरिया) की तरह किया जा रहा है।
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ठगी के इस नए सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन गेम का विज्ञापन देकर लोगों को लुभाया जाता है। गेम खेलने की फीस महज 50 रुपये रखी जाती है। जब कोई खिलाड़ी 50 रुपये डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर करता है, तो साइबर ठगों के पास यह साफ-सुथरी और लीगल रकम पहुंचती है। इसके बाद खिलाड़ी के जीतने पर पुरस्कार के तौर पर 800 से एक हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। खिलाड़ी के पास जो जीत की राशि पहुंचती है, वह असल में किसी के खाते से उड़ाई गई रकम होती है। इस तरह ठग अवैध पैसों को कई खातों में बांट देते हैं, जिससे पुलिस जांच की दिशा भटक जाती है।
ठगी के इस नए सिंडिकेट का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन गेम का विज्ञापन देकर लोगों को लुभाया जाता है। गेम खेलने की फीस महज 50 रुपये रखी जाती है। जब कोई खिलाड़ी 50 रुपये डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर करता है, तो साइबर ठगों के पास यह साफ-सुथरी और लीगल रकम पहुंचती है। इसके बाद खिलाड़ी के जीतने पर पुरस्कार के तौर पर 800 से एक हजार रुपये उसके खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। खिलाड़ी के पास जो जीत की राशि पहुंचती है, वह असल में किसी के खाते से उड़ाई गई रकम होती है। इस तरह ठग अवैध पैसों को कई खातों में बांट देते हैं, जिससे पुलिस जांच की दिशा भटक जाती है।
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मथुरा साइबर सेल के खुलासे ने उड़ाए होश
इस पूरे प्रकरण का खुलासा मथुरा साइबर सेल के ऑनलाइन ठगी की शिकायत की पड़ताल के दौरान हुआ। एक प्रकरण में सामने आया कि पीड़ित के खाते से उड़ाई गई रकम को कई छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है। जब पुलिस खातों के पते पर पहुंची तो वहां कोई हेयर सैलून चलाने वाला, तो कोई अंडे की ढकेल लगाने वाला या दिहाड़ी मजदूर निकला। इन लोगों की आर्थिक स्थिति देखकर पुलिस अधिकारियों को शक हुआ। कड़ी पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि उन्होंने केवल 50 रुपये लगाकर गेम खेला था और जीतने पर उनके पास यह पैसा आया था। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वे जाने-अनजाने में किसी साइबर अपराध का हिस्सा बन रहे हैं।
इस पूरे प्रकरण का खुलासा मथुरा साइबर सेल के ऑनलाइन ठगी की शिकायत की पड़ताल के दौरान हुआ। एक प्रकरण में सामने आया कि पीड़ित के खाते से उड़ाई गई रकम को कई छोटे-छोटे हिस्सों में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है। जब पुलिस खातों के पते पर पहुंची तो वहां कोई हेयर सैलून चलाने वाला, तो कोई अंडे की ढकेल लगाने वाला या दिहाड़ी मजदूर निकला। इन लोगों की आर्थिक स्थिति देखकर पुलिस अधिकारियों को शक हुआ। कड़ी पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि उन्होंने केवल 50 रुपये लगाकर गेम खेला था और जीतने पर उनके पास यह पैसा आया था। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वे जाने-अनजाने में किसी साइबर अपराध का हिस्सा बन रहे हैं।
एक दिन में होता है लाखों का अवैध कारोबार
पुलिस जांच के अनुसार यह नेटवर्क काफी बड़ा है। पहले ठग फ्रॉड का पैसा कई खातों में घुमाकर कैश निकाल लेते थे और आपस में बांट लेते थे। लेकिन बैंक और पुलिस की बढ़ती सख्ती के बाद उन्होंने इस ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का तोड़ निकाला है।
पुलिस जांच के अनुसार यह नेटवर्क काफी बड़ा है। पहले ठग फ्रॉड का पैसा कई खातों में घुमाकर कैश निकाल लेते थे और आपस में बांट लेते थे। लेकिन बैंक और पुलिस की बढ़ती सख्ती के बाद उन्होंने इस ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का तोड़ निकाला है।
जांच में जुटी, लोगों से की अपील
एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि अब साइबर ठग ऑनलाइन गेमिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह फ्रॉड के रुपयों से जीत की राशि को गेम खेलने वाले के खाते में ट्रांसफर करते हैं। ऐसे मामले सामने आने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे किसी भी लुभावने गेमिंग ऐप या लिंक के झांसे में न आएं। कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच आपको किसी बड़े कानूनी झमेले में फंसा सकता है। किसी भी अज्ञात लिंक पर पैसे ट्रांसफर न करें और न ही जीत के लालच में अनजान स्रोतों से अपने खाते में पैसे प्राप्त करें।
एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि अब साइबर ठग ऑनलाइन गेमिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह फ्रॉड के रुपयों से जीत की राशि को गेम खेलने वाले के खाते में ट्रांसफर करते हैं। ऐसे मामले सामने आने पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे किसी भी लुभावने गेमिंग ऐप या लिंक के झांसे में न आएं। कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच आपको किसी बड़े कानूनी झमेले में फंसा सकता है। किसी भी अज्ञात लिंक पर पैसे ट्रांसफर न करें और न ही जीत के लालच में अनजान स्रोतों से अपने खाते में पैसे प्राप्त करें।
केस-1
धौली प्याऊ पर गोलगप्पों का ठेला लगाने वाले रमेश ने ऑनलाइन गेमिंग में 40 रुपये लगाए थे। इस गेम में जीतने के बाद उनके बैंक खाते में 750 रुपये आए। बाद में वह पुलिस के रडार पर आ गए, क्योंकि यह रकम एक साइबर फ्राॅड ने ठगी कर उनके खाते में ट्रांसफर की थी। पुलिस ने गहन पूछताछ के बाद ही रमेश को छोड़ दिया।
धौली प्याऊ पर गोलगप्पों का ठेला लगाने वाले रमेश ने ऑनलाइन गेमिंग में 40 रुपये लगाए थे। इस गेम में जीतने के बाद उनके बैंक खाते में 750 रुपये आए। बाद में वह पुलिस के रडार पर आ गए, क्योंकि यह रकम एक साइबर फ्राॅड ने ठगी कर उनके खाते में ट्रांसफर की थी। पुलिस ने गहन पूछताछ के बाद ही रमेश को छोड़ दिया।
केस -2
भरतपुर गेट निवासी सोनू अंडे की ठेली लगाते हैं। इन्होंने पहले ऑनलाइन गेमिंग में पहले 30 रुपये लगाकर 450 रुपये जीते। फिर उन्होंने 50 रुपये ट्रांसफर कर खेलना शुरू कर दिया। इस बार जीत के एक हजार रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच में सामने आया कि यह रकम साइबर फ्राॅड ने किसी अन्य के खाते से उड़ाकर सीधे उन्हें ट्रांसफर कर दी। दोष न होने पर पुलिस ने सोनू को पूछताछ कर छोड़ तो दिया पर हिदायत भी दी।
भरतपुर गेट निवासी सोनू अंडे की ठेली लगाते हैं। इन्होंने पहले ऑनलाइन गेमिंग में पहले 30 रुपये लगाकर 450 रुपये जीते। फिर उन्होंने 50 रुपये ट्रांसफर कर खेलना शुरू कर दिया। इस बार जीत के एक हजार रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। जांच में सामने आया कि यह रकम साइबर फ्राॅड ने किसी अन्य के खाते से उड़ाकर सीधे उन्हें ट्रांसफर कर दी। दोष न होने पर पुलिस ने सोनू को पूछताछ कर छोड़ तो दिया पर हिदायत भी दी।