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सावधान: बच्चे की चुप्पी छीन सकती है उसकी आवाज, तीन साल की उम्र में दिखें ये संकेत; तो तुरंत कराएं जांच

Mon, 28 Sep 2026 08:50 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 28 Sep 2026 08:50 AM IST
सार

राष्ट्रीय बधिरता निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के सर्वे में सामने आया कि शुरुआती लक्षणों की अनदेखी से बच्चों में सुनने और बोलने की समस्या गंभीर हो सकती है। 0-3, 4-6 और 7-12 महीने की उम्र में बच्चे की आवाज पर प्रतिक्रिया और व्यवहार में बदलाव को पहचानकर समय पर जांच कराना जरूरी है।
 

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Warning Signs of Hearing Loss in Children: Watch for These 3 Signs at Different Ages
बच्चा सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय बधिरता निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हुए सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अभिभावकों की ओर से शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न देने के कारण नवजात बच्चे गूंगे-बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ नाक-कान-गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने बताया कि यदि परिजन 3 चरणों में बच्चे के व्यवहार को पहचानें, तो इस गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है।
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शू्न्य से 3 महीने के बच्चे यदि तेज आवाज पर अचानक न चौंके, परिजन की आवाज पर आंखें न घुमाए या आवाज सुनकर शांत न हो, तो इसे हल्के में न लें। 4 से 6 महीने में नई आवाज होने पर बच्चा उस दिशा में न देखे, आवाज की सुर या अभिव्यक्ति समझकर न रोए, हंसे और तेज आवाज से न डरे, तो यह सुनने की समस्या का संकेत है।
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7 से 12 महीने में नाम लेकर बुलाने या फोन की घंटी बजने पर रिस्पॉन्स न देना, अकेले में न बड़बड़ाना और अपनों की आवाज पर प्रतिक्रिया न देना गंभीर चिंता का विषय है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ नाक-कान-गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. जनार्दन बाबू ने बताया कि सर्वे में एक और बात सामने आई है कि एक ही जाति में शादी (सजातीय विवाह) से बच्चों में सुनने-बोलने में दिक्कत की समस्या अधिक देखी गई। जबकि अलग गोत्र में विवाह से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है।
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उन्होंने कहा कि 15 महीने की उम्र में बच्चा खिलौने पकड़ने लगता है और 18 महीने तक दादी, बाबा, मामा बोलने लगता है। यदि ऐसा न हो तो जल्द डॉक्टर को दिखाएं। 18 महीने की उम्र में सरकार की ओर से निशुल्क कराए जाने वाले कॉक्लियर इम्प्लांट से बच्चे के सुनने और बोलने की क्षमता सामान्य हो सकती है। 
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