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हाईकोर्ट : मेडिकल बोर्ड को अधिकृत प्राधिकारी के दिव्यांगता प्रमाणपत्र को दरकिनार करने का अधिकार नहीं
Fri, 28 Aug 2026 03:42 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 28 Aug 2026 03:42 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कोर्स के लिए गठित मेडिकल बोर्ड को अधिकृत प्राधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र को दरकिनार कर खुद दिव्यांगता प्रतिशत तय करने का अधिकार नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कोर्स के लिए गठित मेडिकल बोर्ड को अधिकृत प्राधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र को दरकिनार कर खुद दिव्यांगता प्रतिशत तय करने का अधिकार नहीं है। बिना अधिकार के वह न इसे घटा-बढ़ा सकता है न ही वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र को मानने से इन्कार कर सकता है।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने गौतमबुद्ध नगर निवासी सोम्या पाल को नीट यूजी में दिव्यांग कोटे में दावा करने की अनुमति देने का आदेश दिया है। साथ ही मेडिकल व अपीलीय बोर्ड की अयोग्य घोषित करने वाली रिपोर्ट रद्द कर दी।
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याची ने नीट यूजी की प्रवेश परीक्षा में दिव्यांग कोटे से शामिल हुई थी। इसमें उसने दिव्यांग श्रेणी में जारी कटऑफ अंक से ज्यादा अंक हासिल किया। वहीं, काउंसलिंग के दौरान मेडिकल बोर्ड ने उसकी दिव्यांगता 22 प्रतिशत आंकी। इसके खिलाफ की गई अपील में अपीलीय बोर्ड ने दिव्यांगता 28 प्रतिशत आंकते हुए चयन प्रकिया के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।
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इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची यूडीआईडी कार्ड धारक है। अधिकृत प्राधिकारी ने उनके पक्ष में छह मार्च को 47 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का प्रमाणपत्र जारी किया था। मेडिकल बोर्ड ने इसे दरकिनार कर मनमाने तरीके से याची को दिव्यांग श्रेणी के आरक्षण का लाभ देने से इन्कार कर दिया है।
कोर्ट ने पाया कि मेडिकल और अपीलीय बोर्ड की राय में अंतर था। एक ने उसे 22 तो दूसरे ने 28 प्रतिशत दिव्यांगता आंकी। साथ ही मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में यह भी माना था कि अभ्यर्थी सीबीएमई पाठ्यक्रम के तहत आवश्यक दक्षताएं पूरी करने में सक्षम है। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ऐसा कोई कानूनी प्रावधान पेश नहीं कर सके, जो काउंसलिंग के लिए गठित मेडिकल बोर्ड या अपीलीय बोर्ड को सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र से अधिक प्राथमिकता देता हो।
कोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की धारा 57 और 59 का उल्लेख किया। कहा कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी और उसके निर्णय के खिलाफ अपील की व्यवस्था कानून में निर्धारित है। इस मामले में अभ्यर्थी के मूल प्रमाणपत्र को किसी अपील में चुनौती नहीं दी गई थी।
क्या है सीबीएमई
योग्यता आधारित चिकित्सा शिक्षा (सीबीएमई) पाठ्यक्रम का मतलब मेडिकल पढ़ाई के दौरान जरूरी ज्ञान और काम करने की क्षमता से है। कोर्ट ने खास तौर पर मेडिकल बोर्ड की उस टिप्पणी को महत्व दिया, जिसमें कहा गया था कि याची अपनी दिव्यांगता के बावजूद सीबीएमई पाठ्यक्रम के तहत जरूरी काम करने में सक्षम है।