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Ambedkar Nagar News: भाजपा-सपा में कांटे की टक्कर के आसार
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रामनगर ब्लॉक के सामने सपाई खेमे में मौजूद आलापुर विधायक त्रिभुवन दत्त, जिलाध्यक्ष जंग बहादुर या
अंबेडकरनगर। शिक्षक एमएलसी चुनाव का मतदान संपन्न होने के बाद अब हार-जीत को लेकर राजनीतिक गुणा-गणित तेज हो गया है। मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं। विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों ने इस चुनाव में अपनी ताकत झोंकी, लेकिन चुनावी मैदान में सक्रियता के बीच दोनों ही दलों में भीतरघात की चर्चाएं भी सामने आईं।
शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा और सपा दोनों ने अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की। अयोध्या मंडल के प्रभारी बनाए गए आलापुर विधायक त्रिभुवन दत्त ने सपाई खेमे को एकजुट करने के लिए तमाम प्रयास किए। वहीं, भाजपा की ओर से पूरी पार्टी एकजुट होकर प्रयास करती नजर आई। हालांकि, दोनों दलों में अंदरूनी खींचतान और भीतरघात की चर्चाओं ने मुकाबले के कयासों को और दिलचस्प बना दिया है।
दूसरी ओर, पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर संघर्षरत एकजुट संगठन के प्रत्याशी राजीव यादव ने भी चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शिक्षकों के बीच पुरानी पेंशन, सेवा संबंधी समस्याओं और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। कई शिक्षकों ने इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर मतदान करने की बात कही। ऐसे में मुकाबला केवल भाजपा और सपा के बीच समर्थन के आकलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजीव यादव के प्रदर्शन को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। अब सबकी निगाहें 27 अक्तूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। परिणाम बताएगा कि भाजपा और सपा की चुनावी सक्रियता कितनी प्रभावी रहीं।
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शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा और सपा दोनों ने अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की। अयोध्या मंडल के प्रभारी बनाए गए आलापुर विधायक त्रिभुवन दत्त ने सपाई खेमे को एकजुट करने के लिए तमाम प्रयास किए। वहीं, भाजपा की ओर से पूरी पार्टी एकजुट होकर प्रयास करती नजर आई। हालांकि, दोनों दलों में अंदरूनी खींचतान और भीतरघात की चर्चाओं ने मुकाबले के कयासों को और दिलचस्प बना दिया है।
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दूसरी ओर, पुरानी पेंशन की बहाली की मांग को लेकर संघर्षरत एकजुट संगठन के प्रत्याशी राजीव यादव ने भी चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शिक्षकों के बीच पुरानी पेंशन, सेवा संबंधी समस्याओं और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे। कई शिक्षकों ने इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर मतदान करने की बात कही। ऐसे में मुकाबला केवल भाजपा और सपा के बीच समर्थन के आकलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजीव यादव के प्रदर्शन को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। अब सबकी निगाहें 27 अक्तूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। परिणाम बताएगा कि भाजपा और सपा की चुनावी सक्रियता कितनी प्रभावी रहीं।
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