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Ambedkar Nagar News: किछौछा दरगाह पर गुस्ल मुबारक में दिखा रूहानी रंग
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मखदूम अशरफ की मजार की बृहस्पतिवार को जियारत करने जाते जायरीन।संवाद
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अंबेडकरनगर। किछौछा में हजरत सैयद मखदूम अशरफ सिमनानी के आस्ताने पर 640वें गुस्ल मुबारक की शुरुआत बृहस्पतिवार से हुई। शाम होते ही दरगाह परिसर का माहौल रूहानी रंग में रंग गया। खान वाद-ए-अशरफिया से जुड़े लोगों और अकीदतमंदों में धार्मिक उत्साह नजर आया।
बृहस्पतिवार को आयोजन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर पहुंचते रहे। रात में होने वाले जलसे, तकरीर और सामूहिक दुआओं की तैयारियां दिनभर होती रहीं। अलग-अलग स्थानों पर इबादत का दौर जारी रहा। लोगों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ इसमें भाग लिया। माहौल में सुकून और आस्था का प्रभाव स्पष्ट महसूस किया गया। शाम के समय दरगाह क्षेत्र में आपसी भाईचारे और एकता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग जगहों से आए लोग एक साथ इबादत में शामिल हुए। सामूहिक दुआओं के दौरान माहौल आध्यात्मिक हो गया। लोगों ने अमन और खुशहाली की कामना की। देर शाम जायरीन की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि जायरीन की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। गुस्ल मुबारक के दौरान तीन दिनों तक दरगाह में आस्था और श्रद्धा का माहौल बना रहेगा।
बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजे से जलसे की शुरुआत हुई। पूरी रात आयोजन के बाद शुक्रवार भोर करीब चार बजे गुस्ल मुबारक की रस्म होगी। इसमें दरगाह के सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ व सैयद मोहामिद अशरफ 51 घड़ा गुलाब और केवड़ा जल से मजार मुबारक को गुस्ल देंगे।
मखदूम अशरफ की शिक्षाएं समाज के लिए मार्गदर्शक
फोटो - 31
सुल्तान हजरत सैयद मखदूम अशरफ की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और इंसानियत का संदेश दिया, जिसे अपनाकर समाज में आपसी सद्भाव और शांति स्थापित की जा सकती है।
- सैयद नसीम अशरफ
मखदूम अशरफ ने जरूरतमंदों की मदद को अपना धर्म समझा
फोटो - 32
हजरत मखदूम अशरफ ने अपनी पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में समर्पित कर दी। उन्होंने गरीबों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों की मदद को अपना धर्म समझा और समाज में करुणा व सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
- सैयद मुहम्मद खालिद अशरफ
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बृहस्पतिवार को आयोजन में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह परिसर पहुंचते रहे। रात में होने वाले जलसे, तकरीर और सामूहिक दुआओं की तैयारियां दिनभर होती रहीं। अलग-अलग स्थानों पर इबादत का दौर जारी रहा। लोगों ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ इसमें भाग लिया। माहौल में सुकून और आस्था का प्रभाव स्पष्ट महसूस किया गया। शाम के समय दरगाह क्षेत्र में आपसी भाईचारे और एकता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग जगहों से आए लोग एक साथ इबादत में शामिल हुए। सामूहिक दुआओं के दौरान माहौल आध्यात्मिक हो गया। लोगों ने अमन और खुशहाली की कामना की। देर शाम जायरीन की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि जायरीन की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। गुस्ल मुबारक के दौरान तीन दिनों तक दरगाह में आस्था और श्रद्धा का माहौल बना रहेगा।
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बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजे से जलसे की शुरुआत हुई। पूरी रात आयोजन के बाद शुक्रवार भोर करीब चार बजे गुस्ल मुबारक की रस्म होगी। इसमें दरगाह के सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ व सैयद मोहामिद अशरफ 51 घड़ा गुलाब और केवड़ा जल से मजार मुबारक को गुस्ल देंगे।
मखदूम अशरफ की शिक्षाएं समाज के लिए मार्गदर्शक
फोटो - 31
सुल्तान हजरत सैयद मखदूम अशरफ की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और इंसानियत का संदेश दिया, जिसे अपनाकर समाज में आपसी सद्भाव और शांति स्थापित की जा सकती है।
- सैयद नसीम अशरफ
मखदूम अशरफ ने जरूरतमंदों की मदद को अपना धर्म समझा
फोटो - 32
हजरत मखदूम अशरफ ने अपनी पूरी जिंदगी मानवता की सेवा में समर्पित कर दी। उन्होंने गरीबों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों की मदद को अपना धर्म समझा और समाज में करुणा व सेवा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
- सैयद मुहम्मद खालिद अशरफ