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Ambedkar Nagar News: अपहरण, दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
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अंबेडकरनगर। महरुआ क्षेत्र के बहुचर्चित अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले में तीन आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित-प्रथम की अदालत ने दिलशाद अहमद, मोहम्मद इश्तिखार और अतुल कन्नौजिया की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
पीड़ित के अनुसार 7 मार्च 2026 को वादी की पुत्री कोचिंग के लिए घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने आरोप लगाया गया कि मोबाइल नंबर के माध्यम से संपर्क कर उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन की और इस मामले में दिलशाद अहमद, मोहम्मद इश्तिखार और अतुल कन्नौजिया निवासी कुड़िया चितौना अकबरपुर को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी दिलशाद पहले से उसे परेशान करता था और शादी तय होने के बाद उसे लगातार धमकियां देने लगा।
घटना के दिन तीनों आरोपी रास्ते में मिले और उसे अपने साथ हरियाणा ले गए। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह निर्दोष हैं और रंजिश के चलते फर्जी तरीके से फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने केस डायरी और पीड़िता के बयानों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। इसी आधार पर न्यायाधीश परविंद कुमार ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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पीड़ित के अनुसार 7 मार्च 2026 को वादी की पुत्री कोचिंग के लिए घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने आरोप लगाया गया कि मोबाइल नंबर के माध्यम से संपर्क कर उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन की और इस मामले में दिलशाद अहमद, मोहम्मद इश्तिखार और अतुल कन्नौजिया निवासी कुड़िया चितौना अकबरपुर को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी दिलशाद पहले से उसे परेशान करता था और शादी तय होने के बाद उसे लगातार धमकियां देने लगा।
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घटना के दिन तीनों आरोपी रास्ते में मिले और उसे अपने साथ हरियाणा ले गए। पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह निर्दोष हैं और रंजिश के चलते फर्जी तरीके से फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने केस डायरी और पीड़िता के बयानों को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। इसी आधार पर न्यायाधीश परविंद कुमार ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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