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Ambedkar Nagar News: समर्पण, मर्यादा और विश्वास होने पर ही सार्थक होता है प्रेम
Tue, 04 Aug 2026 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:49 PM IST
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जलालपुर। क्षेत्र के मढ़वरपुर भुजगी स्थित श्री भुजंगेश्वर नाथ महादेव मंदिर चक महादेव में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन हुआ। कथा के साथ प्रस्तुत आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
प्रवाचक पंडित राहुल शास्त्री ने कहा कि समर्पण, मर्यादा और विश्वास होने पर ही प्रेम सार्थक होता है। धार्मिक कथाएं केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा भी हैं। महारास ईश्वर और भक्त के बीच आत्मिक प्रेम तथा पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
वहीं कंस वध का प्रसंग यह बताता है कि जब अन्याय और अधर्म अपनी सीमा पार कर जाते हैं तब धर्म की रक्षा के लिए परिवर्तन अवश्य होता है। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग विश्वास, दृढ़ निश्चय और सच्चे प्रेम की मिसाल है जो जीवन में धैर्य और संकल्प का महत्व बताता है।
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सत्य और धर्म की राह कठिन हो सकती है लेकिन अंतत: विजय उसी की होती है। अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है इसलिए जीवन में विनम्रता और सदाचार जरूरी हैं। विश्वास, धैर्य और दृढ़ संकल्प हर कठिन परिस्थिति को अवसर में बदल सकते हैं। इस दौरान समिति अध्यक्ष हरिधर मिश्र, यज्ञाचार्य रजनीशधर द्विवेदी व अन्य उपस्थित रहे।
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प्रवाचक पंडित राहुल शास्त्री ने कहा कि समर्पण, मर्यादा और विश्वास होने पर ही प्रेम सार्थक होता है। धार्मिक कथाएं केवल आस्था का विषय नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा भी हैं। महारास ईश्वर और भक्त के बीच आत्मिक प्रेम तथा पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
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वहीं कंस वध का प्रसंग यह बताता है कि जब अन्याय और अधर्म अपनी सीमा पार कर जाते हैं तब धर्म की रक्षा के लिए परिवर्तन अवश्य होता है। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग विश्वास, दृढ़ निश्चय और सच्चे प्रेम की मिसाल है जो जीवन में धैर्य और संकल्प का महत्व बताता है।
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सत्य और धर्म की राह कठिन हो सकती है लेकिन अंतत: विजय उसी की होती है। अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है इसलिए जीवन में विनम्रता और सदाचार जरूरी हैं। विश्वास, धैर्य और दृढ़ संकल्प हर कठिन परिस्थिति को अवसर में बदल सकते हैं। इस दौरान समिति अध्यक्ष हरिधर मिश्र, यज्ञाचार्य रजनीशधर द्विवेदी व अन्य उपस्थित रहे।

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