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Ambedkar Nagar News: महिला की पिटाई और छेड़छाड़ के मामले में परिवाद दर्ज करने का आदेश
Tue, 04 Aug 2026 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:53 PM IST
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट चिंताराम की अदालत ने अहिरौली क्षेत्र की एक महिला की शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले में 10 अगस्त को प्रार्थिनी का बयान दर्ज करने की तिथि तय करते हुए गवाहों की सूची प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
महिला ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि 8 जुलाई 2026 को वह अपने पति को खेत में भोजन देने जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही दिनेश कुमार सिंह ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की। विरोध करने पर डंडे से मारपीट की, गला दबाकर जमीन पर पटक दिया तथा कपड़े फाड़कर छेड़छाड़ की। शोर सुनकर पहुंचे पति के साथ भी मारपीट और जातिसूचक गालियां दीं। पीड़िता ने अदालत को बताया कि घटना की सूचना डायल-112, स्थानीय पुलिस और बाद में पुलिस अधीक्षक को भी दी गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। आख्या में अहिरौली पुलिस ने भी बताया कि इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।
पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि घटना, आरोपी और गवाहों की जानकारी स्पष्ट है। ऐसे में पुलिस विवेचना से किसी नए तथ्य के सामने आने की संभावना प्रतीत नहीं होती। इसी आधार पर अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
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महिला ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि 8 जुलाई 2026 को वह अपने पति को खेत में भोजन देने जा रही थीं। रास्ते में गांव के ही दिनेश कुमार सिंह ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की। विरोध करने पर डंडे से मारपीट की, गला दबाकर जमीन पर पटक दिया तथा कपड़े फाड़कर छेड़छाड़ की। शोर सुनकर पहुंचे पति के साथ भी मारपीट और जातिसूचक गालियां दीं। पीड़िता ने अदालत को बताया कि घटना की सूचना डायल-112, स्थानीय पुलिस और बाद में पुलिस अधीक्षक को भी दी गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। आख्या में अहिरौली पुलिस ने भी बताया कि इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है।
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पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने कहा कि घटना, आरोपी और गवाहों की जानकारी स्पष्ट है। ऐसे में पुलिस विवेचना से किसी नए तथ्य के सामने आने की संभावना प्रतीत नहीं होती। इसी आधार पर अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
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