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Ambedkar Nagar News: आरोप साबित न होने पर महिला आरोपी को किया बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:47 AM IST
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अंबेडकरनगर। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट मोहन कुमार ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के प्रयास के आरोप में चल रहे एक पुराने मामले में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर आरोपी महिला को दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
इब्राहिमपुर क्षेत्र एक किशोरी की ओर से चार अप्रैल 2018 में प्राथमिकी दर्ज कराया गई थी। आरोप था कि नौ फरवरी 2018 को गांव की महिला लीलावती ने उसे शौच के बहाने घर से बाहर ले जाकर अन्य लोगों के साथ मिलकर सुबोध की मोटरसाइकिल पर बैठा दिया। सुबोध उसे सुनसान स्थान पर ले गया, जहां उसके साथ अश्लील हरकत करने के साथ ही दुष्कर्म का प्रयास किया।
इस मामले में पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म का प्रयास, मारपीट, साजिश और पॉक्सो एक्ट में लीलावती, सुबोध के अलावा भगवतचरन, बलवंत व हरिनरायन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद सुबोध मिश्रा व लीलावती के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान सुबोध की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके माता-पिता सहित प्रमुख गवाहों ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसने घर और गांव के दबाव में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पीड़िता के चिकित्सकीय परीक्षण में भी दुष्कर्म का कोई प्रमाण नहीं मिला था। इसके आधार पर ही कोर्ट ने आरोपी लीलावती को अपहरण, साजिश व पॉक्सो एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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इब्राहिमपुर क्षेत्र एक किशोरी की ओर से चार अप्रैल 2018 में प्राथमिकी दर्ज कराया गई थी। आरोप था कि नौ फरवरी 2018 को गांव की महिला लीलावती ने उसे शौच के बहाने घर से बाहर ले जाकर अन्य लोगों के साथ मिलकर सुबोध की मोटरसाइकिल पर बैठा दिया। सुबोध उसे सुनसान स्थान पर ले गया, जहां उसके साथ अश्लील हरकत करने के साथ ही दुष्कर्म का प्रयास किया।
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इस मामले में पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म का प्रयास, मारपीट, साजिश और पॉक्सो एक्ट में लीलावती, सुबोध के अलावा भगवतचरन, बलवंत व हरिनरायन के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद सुबोध मिश्रा व लीलावती के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान सुबोध की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके माता-पिता सहित प्रमुख गवाहों ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। पीड़िता ने अदालत में कहा कि उसने घर और गांव के दबाव में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पीड़िता के चिकित्सकीय परीक्षण में भी दुष्कर्म का कोई प्रमाण नहीं मिला था। इसके आधार पर ही कोर्ट ने आरोपी लीलावती को अपहरण, साजिश व पॉक्सो एक्ट के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।