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Amethi News: गैस संकट से रसोई ठप, लकड़ी और कोयले से बन रहा खाना

संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी Updated Mon, 16 Mar 2026 12:16 AM IST
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Gas crisis stalls kitchens, cooking using wood and coal
अमेठी शहर में सिलिंडर लेने के लिए मौजूद उपभोक्ता। -संवाद
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अमेठी सिटी। जिले में गैस का संकट बरकरार है और रसोई भी जैसे-तैसे चल रही है। कभी लकड़ी तो कभी कोयले और इंडक्शन का सहारा लेकर खाना बनाया जा रहा है। गैस एजेंसियों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ रही है पर सिलिंडर मिलने की काेई गारंटी नहीं होती।
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गाैरीगंज मुख्यालय सहित अमेठी, बाजारशुकुल, रामगंज, पीपरपुर, संग्रामपुर, जामो, सगरा, जगदीशपुर, सिंहपुर, मोहनगंज, फुरसतगंज और जायस क्षेत्र की गैस एजेंसियों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ रही है। उपभोक्ता पहले बुकिंग कराने, फिर रसीद कटवाने और बाद में सिलिंडर पाने की उम्मीद में घंटों लाइन में खड़े रहते हैं। इसके बावजूद कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
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गौरीगंज निवासी रेहाना बानो ने बताया कि बुकिंग कराए कई दिन बीत गए, फिर भी घर तक सिलिंडर नहीं पहुंचा। एजेंसी पहुंचने पर भीड़ इतनी अधिक रहती है कि नंबर आने तक शाम हो जाती है। रमजान के दौरान सहरी और इफ्तार का भोजन समय पर तैयार करना भी कठिन हो गया है।

गौरीगंज शहर में गोविंद गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे रामऔतार तिवारी ने बताया कि सुबह छह बजे पहुंचने के बाद भी सिलिंडर नहीं मिल पाया। दिनभर कतार में खड़े रहने के बाद भी निराश लौटना पड़ता है। मजबूरी में घर में लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ रहा है।

कुसुम देवी ने बताया कि गैस खत्म होने पर परिवार ने इंडक्शन चूल्हा खरीदा, लेकिन सुबह-शाम बिजली कटौती के कारण उस पर भी खाना बनाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में फिर लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है।

शाहिद अली ने बताया कि एजेंसियों पर होम डिलीवरी लगभग बंद हो गई है। लोग सुबह से कतार में खड़े रहते हैं, फिर भी कई बार बुकिंग तक नहीं हो पाती। लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से बाजार में इनके दाम भी बढ़ गए हैं। गृहिणियों का कहना है कि गैस की तुलना में लकड़ी और कोयले पर भोजन बनाने में अधिक समय लगता है और धुएं से परेशानी बढ़ जाती है। लगातार बनी यह स्थिति घरेलू व्यवस्था पर भारी पड़ रही है।

4,484 सिलिंडर की हुई आपूर्ति
जिले की 32 गैस एजेंसियों पर शनिवार को 4,484 सिलिंडर की आपूर्ति हुई। इनमें 3,759 सिलिंडर वितरित हुए, जबकि 3,894 सिलिंडर अवशेष बताए गए हैं। इसके अलावा 12,490 उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग कराई है। प्रशासन का दावा है कि जिले में गैस की कमी नहीं है लेकिन एजेंसियों पर उमड़ रही भीड़ उपभोक्ताओं की परेशानी बता रही है।

छोटे कारोबारियों पर भी पड़ा असर
रसोई गैस की कमी का असर छोटे कारोबारों पर भी दिखने लगा है। ढाबों, चाय की दुकानों और छोटे भोजनालयों के संचालकों को काॅमर्शियल सिलिंडर समय पर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कई दुकानदार लकड़ी या कोयले के चूल्हों का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि इससे खाना बनाने में अधिक समय लगता है और ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है। ईंधन खर्च बढ़ गया है और आमदनी हो गई है कम।
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