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Amethi News: एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्न पर जताई आपत्ति
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 17 Mar 2026 12:34 AM IST
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अमेठी। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न को लेकर अमेठी में आपत्ति जताई गई। बुद्धिजीवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंडित शब्द के प्रयोग को आपत्तिजनक बताते हुए राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपकर संबंधित प्रश्न निरस्त करने की मांग की।
एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल सोमवार को तहसील पहुंचा। यहां एसडीएम आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए बताया गया कि 14 मार्च को आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में अवसर के अनुसार बदल जाने जैसे अर्थ के विकल्प के रूप में पंडित शब्द का प्रयोग किया गया है, जिस पर आपत्ति है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि भारतीय परंपरा में पंडित शब्द विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना भाषाई और सामाजिक दृष्टि से गलत है। इससे समाज में गलत संदेश जाने और अनावश्यक तनाव की स्थिति बन सकती है। ज्ञापन में संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
राजीव शुक्ल ने कहा कि इस तरह के प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं। सपा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष गुंजन सिंह ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में पंडित शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है।
एसडीएम ने ज्ञापन लेकर उसे उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया। इस मौके पर रोहित तिवारी, शुभम शुक्ल, विकास शुक्ल, विभव तिवारी, कैलाश शुक्ल और रसिक आदि मौजूद रहे।
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एडवोकेट राजेश मिश्र की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल सोमवार को तहसील पहुंचा। यहां एसडीएम आशीष सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए बताया गया कि 14 मार्च को आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में अवसर के अनुसार बदल जाने जैसे अर्थ के विकल्प के रूप में पंडित शब्द का प्रयोग किया गया है, जिस पर आपत्ति है।
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प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि भारतीय परंपरा में पंडित शब्द विद्वान, ज्ञानी और सम्मानित व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है। इसे अवसरवादिता जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना भाषाई और सामाजिक दृष्टि से गलत है। इससे समाज में गलत संदेश जाने और अनावश्यक तनाव की स्थिति बन सकती है। ज्ञापन में संबंधित प्रश्न को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई गई।
राजीव शुक्ल ने कहा कि इस तरह के प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। दिनेश तिवारी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का प्रयोग दुर्भाग्यपूर्ण है, जिससे अभ्यर्थियों और समाज की भावनाएं आहत होती हैं। सपा महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष गुंजन सिंह ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में पंडित शब्द विद्वता और सम्मान का प्रतीक है। इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है।
एसडीएम ने ज्ञापन लेकर उसे उच्च अधिकारियों तक भेजने का आश्वासन दिया। इस मौके पर रोहित तिवारी, शुभम शुक्ल, विकास शुक्ल, विभव तिवारी, कैलाश शुक्ल और रसिक आदि मौजूद रहे।