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Amethi News: सात दिन से नल सूखे, पानी के लिए भटक रहे 20 हजार लोग
Mon, 07 Sep 2026 01:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:32 AM IST
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इन्हौंना के करनगांव स्थित पानी की टंकी। स्रोत : स्थानीय
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तिलोई। इन्हौना क्षेत्र के करन गांव और मिर्जापुर स्थित पानी की टंकियों से पिछले एक सप्ताह से जलापूर्ति बंद है। घरों के नल सूखे पड़े हैं और करीब 20 हजार लोग पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को दूरदराज से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इससे उनके अन्य कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
30 अगस्त की रात गांव िस्थत दोनों टंकियों का बिजली केबल चोरी हो जाने से मोटरें चलनी बंद हो गईं, जिससे 3900 कनेक्शनधारकों के घरों तक पानी पहुंचना बंद हो गया है।
एक कनेक्शन से औसतन पांच से छह लोग जुड़े हैं। इस आधार पर दोनों टंकियों की आपूर्ति ठप होने से लगभ्ाग 20 हजार से अधिक लोगों की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई है।
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टंकियों से जुड़ी सैकड़ों सार्वजनिक टोटियां भी बंद पड़ी हैं। इससे उन परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है, जिनके पास पानी का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है। ग्रामीण पानी के इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह होते ही पानी की व्यवस्था की चिंता सताने लगती है। पीने के पानी के साथ खाना बनाने, बर्तन धोने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए भी दूरदराज से पानी लाना पड़ रहा है। इससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
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30 अगस्त की रात गांव िस्थत दोनों टंकियों का बिजली केबल चोरी हो जाने से मोटरें चलनी बंद हो गईं, जिससे 3900 कनेक्शनधारकों के घरों तक पानी पहुंचना बंद हो गया है।
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एक कनेक्शन से औसतन पांच से छह लोग जुड़े हैं। इस आधार पर दोनों टंकियों की आपूर्ति ठप होने से लगभ्ाग 20 हजार से अधिक लोगों की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हुई है।
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टंकियों से जुड़ी सैकड़ों सार्वजनिक टोटियां भी बंद पड़ी हैं। इससे उन परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है, जिनके पास पानी का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है। ग्रामीण पानी के इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह होते ही पानी की व्यवस्था की चिंता सताने लगती है। पीने के पानी के साथ खाना बनाने, बर्तन धोने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए भी दूरदराज से पानी लाना पड़ रहा है। इससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है। एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।