{"_id":"69b701f90def5000670ffff4","slug":"the-elders-learned-to-read-and-write-amethi-news-c-96-1-ame1002-161017-2026-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: बुजुर्गों ने सीखा पढ़ना-लिखना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: बुजुर्गों ने सीखा पढ़ना-लिखना
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
तिलोई के बारकोट स्थित प्राथमिक विद्यालय में साक्षरता परीक्षा देते बुजुर्ग। स्रोत : विभाग
विज्ञापन
अमेठी सिटी। नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लास सर्वे एप पर पंजीकृत निरक्षरों की साक्षरता परीक्षा रविवार को जिले में हुई। 13 विकासखंडों में बनाए गए 135 केंद्रों पर परीक्षा हुई। 2360 पंजीकृत प्रतिभागियों के सापेक्ष 1995 लोगों की उपस्थिति दर्ज हुई। परीक्षा प्राथमिक विद्यालय, उच्च प्राथमिक विद्यालय और कंपोजिट विद्यालयों में कराई गई। इन केंद्रों पर तैनात शिक्षकों की निगरानी में प्रतिभागियों ने प्रश्नपत्र हल किए।
जूनियर हाईस्कूल गौरीगंज में आयोजित परीक्षा में पहुंचीं बुजुर्ग क्रांति देवी ने बताया कि अब वह अपना नाम लिखना सीख गई हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ना-लिखना सीखने का अवसर मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा है।
वहीं बुजुर्ग रामकिशुन ने बताया कि पहले किसी कागज पर अंगूठा लगाना पड़ता था। अब नाम लिखना और पढ़ना सीखने से सुविधा मिली है। कंपोजिट विद्यालय में परीक्षा देने पहुंचे रामपियारे ने बताया कि बच्चों को पढ़ते देखकर पढ़ने की इच्छा होती थी, लेकिन विद्यालय जाने का साहस नहीं हो पाता था। पढ़ना-लिखना सीखने के बाद परीक्षा में शामिल होना अच्छा अनुभव रहा।
चंदारानी, देवमती और रामचंद्र समेत अन्य प्रतिभागियों ने भी साक्षरता कार्यक्रम को उपयोगी बताया। परीक्षा व्यवस्था की निगरानी बेसिक शिक्षा विभाग ने की। बीएसए ने विकासखंड स्तर पर जिला समन्वयकों को सह नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी। अधिकारियों ने विद्यालयों का निरीक्षण कर परीक्षा संचालन की स्थिति देखी।
Trending Videos
जूनियर हाईस्कूल गौरीगंज में आयोजित परीक्षा में पहुंचीं बुजुर्ग क्रांति देवी ने बताया कि अब वह अपना नाम लिखना सीख गई हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ना-लिखना सीखने का अवसर मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
वहीं बुजुर्ग रामकिशुन ने बताया कि पहले किसी कागज पर अंगूठा लगाना पड़ता था। अब नाम लिखना और पढ़ना सीखने से सुविधा मिली है। कंपोजिट विद्यालय में परीक्षा देने पहुंचे रामपियारे ने बताया कि बच्चों को पढ़ते देखकर पढ़ने की इच्छा होती थी, लेकिन विद्यालय जाने का साहस नहीं हो पाता था। पढ़ना-लिखना सीखने के बाद परीक्षा में शामिल होना अच्छा अनुभव रहा।
चंदारानी, देवमती और रामचंद्र समेत अन्य प्रतिभागियों ने भी साक्षरता कार्यक्रम को उपयोगी बताया। परीक्षा व्यवस्था की निगरानी बेसिक शिक्षा विभाग ने की। बीएसए ने विकासखंड स्तर पर जिला समन्वयकों को सह नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी। अधिकारियों ने विद्यालयों का निरीक्षण कर परीक्षा संचालन की स्थिति देखी।