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Amroha News: मरीजों की कतार...मात्र 21 डॉक्टरों पर सबका भार
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अमरोहा। जिला अस्पताल में आधे से भी ज्यादा डॉक्टर के पद खाली पड़े हैं। अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
अधिकारी लगभग हर महीने डॉक्टरों की डिमांड के लिए शासन को पत्राचार करते हैं, लेकिन पूर्ति नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में 61 पदों के सापेक्ष सिर्फ 21 डॉक्टर ही तैनात हैं। इन्हीं डॉक्टरों के सहारे सैकड़ों मरीज के जीवन की डोर चल रही है।
डॉक्टरों की कमी के चलते जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों के पद भी खाली हैं। दिल के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां चेस्ट फिजिशियन और कॉर्डियोलॉजिस्ट के पद भी खाली है। इन बीमारियों से जुड़े मरीजों को रेफर किया जाता है। महिला विंग में भी संविदा पर तैनात महिला चिकित्सक के सहारे सैकड़ों महिलाएं हैं। उन पर ओपीडी में आने वाली बीमार महिलाओं और गर्भवती के उपचार का जिम्मा है।
जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है। चिकित्सकों की उपलब्धता की बात करें तो अस्पताल बनने के बाद आज तक यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न चेस्ट फिजीशियन की तैनाती हुई है। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के सात में से छह पद शुरुआत से अब तक खाली पड़े हैं। फिजीशियन के दो पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है।
चेस्ट फिजिशियन और काॅर्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। एनेस्थेटिक्स के दो पदों में एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के तीन पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है।
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अधिकारी लगभग हर महीने डॉक्टरों की डिमांड के लिए शासन को पत्राचार करते हैं, लेकिन पूर्ति नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल में 61 पदों के सापेक्ष सिर्फ 21 डॉक्टर ही तैनात हैं। इन्हीं डॉक्टरों के सहारे सैकड़ों मरीज के जीवन की डोर चल रही है।
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डॉक्टरों की कमी के चलते जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भटकना पड़ता है। इतना ही नहीं अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों के पद भी खाली हैं। दिल के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां चेस्ट फिजिशियन और कॉर्डियोलॉजिस्ट के पद भी खाली है। इन बीमारियों से जुड़े मरीजों को रेफर किया जाता है। महिला विंग में भी संविदा पर तैनात महिला चिकित्सक के सहारे सैकड़ों महिलाएं हैं। उन पर ओपीडी में आने वाली बीमार महिलाओं और गर्भवती के उपचार का जिम्मा है।
जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है। चिकित्सकों की उपलब्धता की बात करें तो अस्पताल बनने के बाद आज तक यहां न तो कार्डियोलॉजिस्ट हैं और न चेस्ट फिजीशियन की तैनाती हुई है। अस्पताल में महिला चिकित्सकों के सात में से छह पद शुरुआत से अब तक खाली पड़े हैं। फिजीशियन के दो पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है।
चेस्ट फिजिशियन और काॅर्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। एनेस्थेटिक्स के दो पदों में एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के तीन पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है वह भी खाली है।
