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Auraiya News: अधर में अन्नपूर्णा भवन...आरमपुर में निर्माण, कालाबोझ में विरोध
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फोटो-41- दूसरी जगह चिह्नित जमीन पर अधूरा निर्माण। संवाद
फोटो-42-खतौनी में 309 गाटा संख्या में दर्ज है अन्नपूर्णा भवन। संवाद
- कालाबोझ गांव में चिह्नित हुई थी भवन निर्माण के लिए जमीन, फिर दो किलोमीटर दूर आरमपुर में शुरू हो गया निर्माण
- ग्रामीणों ने किया विरोध तो फिर दोबारा पुरानी जगह तय की गई, भुगतान के नाम पर अब ठेकेदार ने खड़े किए हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कुदरकोट। बिधूना तहसील के कुदरकोट क्षेत्र के गांव कालाबोझ में प्रस्तावित अन्नपूर्णा भवन जमीन की अदला-बदली के फेर में फंस कर अधर में लटक गया है। लेखपाल ने गांव में ही भवन निर्माण के लिए जमीन चिह्नित की थी लेकिन निर्माण कार्य गांव से दो किलोमीटर दूर आरमपुर गांव में शुरू करा दिया गया। ग्रामीणों को भनक लगी तो विरोध शुरू हो गया। इसके बाद निर्माण कार्य को अधिकारियों ने रुकवा दिया। दूसरी ओर निर्माण के ठेकेदार ने बिना अतिरिक्त भुगतान के दोबारा कालाबोझ में काम कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
ग्राम पंचायत कालाबोझ में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से करीब छह लाख रुपये की लागत से अन्नपूर्णा भवन बनना था। इसके लिए लेखपाल ने गाटा संख्या 309 में जमीन चिह्नित कर दी। यह खतौनी में भी दर्ज है। इसके बाद गुपचुप ढंग से गांव आरमपुर में दूसरी जगह चिह्नित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। कालाबोझ के ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुविधा के लिए गांव में अन्नपूर्णा भवन बनाया जाना था पर आरमपुर में निर्माण होने से उन्हें दो किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। अब लेखपाल शिवानी यादव ने कालाबोझ में पूर्व चयनित स्थल को ही फिर अन्नपूर्णा भवन निर्माण के लिए चिह्नित कर दिया है। इस पर ठेकेदार ने निर्माण कार्य कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उसका कहना है कि आरमपुर में वह आधा निर्माण कार्य करा चुका है। उसका भुगतान हुए बिना वह दूसरी जगह काम नहीं करेगा।
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आखिर किसके इशारे पर बदली जमीन
ग्रामीणों के विरोध में यह भी जांच का विषय है कि आखिर जमीन बदलने का फैसला किसके इशारे पर किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के इशारे पर आरमपुर में काम शुरू कराया गया है। जगह बदलने पर तर्क दिया गया था कि वहां तक मालवाहक (लोडिंग) वाहन नहीं पहुंच पाते जबकि कालाबोझ के ग्रामीणों का कहना है कि लोडिंग वाहन निकलने के लिए चयनित स्थल पर पर्याप्त जगह है। दूसरी ओर आधा काम करा चुके ठेकेदार को भी जमीन की अदला-बदली ने गफलत में डाल दिया गया है। उधर, ठेकेदार ने ग्रामीणों के आरोप को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि उसने निर्माण पर करीब ढाई लाख रुपये तक खर्च कर दिए हैं। अधिकारी इस मामले में काम रुकवाने तक सीमित हैं। आगे की तैयारी पर कोई ठोस प्रयास फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
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वर्जन
मामला संज्ञान में है। ग्रामीणों ने आरमपुर में अन्नपूर्णा भवन बनने का विरोध किया था जिस पर काम रुकवा दिया गया था। नई जगह को लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता चल रही है।
- गरिमा सोनकिया, एसडीएम, बिधूना
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अन्नपूर्णा भवन की विशेषता
प्रदेश सरकार प्रदेश भर में अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण करा रही है। भवनों का निर्माण मनरेगा व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से कराया जा रहा है। यह भवन खाद्यान्न भंडारण के साथ ही उचित दर की दुकानों के संचालन में भी सहायक होंगे। अन्नपूर्णा भवनों में जनरल स्टोर और कम्युनिटी सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन भी किया जाएगा। यहां बिजली बिल भुगतान, ब्रॉडबैंड सेवा, सस्ती जेनेरिक दवाएं और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बिक्री की सुविधा होगी।
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- कालाबोझ गांव में चिह्नित हुई थी भवन निर्माण के लिए जमीन, फिर दो किलोमीटर दूर आरमपुर में शुरू हो गया निर्माण
- ग्रामीणों ने किया विरोध तो फिर दोबारा पुरानी जगह तय की गई, भुगतान के नाम पर अब ठेकेदार ने खड़े किए हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
कुदरकोट। बिधूना तहसील के कुदरकोट क्षेत्र के गांव कालाबोझ में प्रस्तावित अन्नपूर्णा भवन जमीन की अदला-बदली के फेर में फंस कर अधर में लटक गया है। लेखपाल ने गांव में ही भवन निर्माण के लिए जमीन चिह्नित की थी लेकिन निर्माण कार्य गांव से दो किलोमीटर दूर आरमपुर गांव में शुरू करा दिया गया। ग्रामीणों को भनक लगी तो विरोध शुरू हो गया। इसके बाद निर्माण कार्य को अधिकारियों ने रुकवा दिया। दूसरी ओर निर्माण के ठेकेदार ने बिना अतिरिक्त भुगतान के दोबारा कालाबोझ में काम कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
ग्राम पंचायत कालाबोझ में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से करीब छह लाख रुपये की लागत से अन्नपूर्णा भवन बनना था। इसके लिए लेखपाल ने गाटा संख्या 309 में जमीन चिह्नित कर दी। यह खतौनी में भी दर्ज है। इसके बाद गुपचुप ढंग से गांव आरमपुर में दूसरी जगह चिह्नित कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। कालाबोझ के ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुविधा के लिए गांव में अन्नपूर्णा भवन बनाया जाना था पर आरमपुर में निर्माण होने से उन्हें दो किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए प्रशासन ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। अब लेखपाल शिवानी यादव ने कालाबोझ में पूर्व चयनित स्थल को ही फिर अन्नपूर्णा भवन निर्माण के लिए चिह्नित कर दिया है। इस पर ठेकेदार ने निर्माण कार्य कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। उसका कहना है कि आरमपुर में वह आधा निर्माण कार्य करा चुका है। उसका भुगतान हुए बिना वह दूसरी जगह काम नहीं करेगा।
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आखिर किसके इशारे पर बदली जमीन
ग्रामीणों के विरोध में यह भी जांच का विषय है कि आखिर जमीन बदलने का फैसला किसके इशारे पर किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के इशारे पर आरमपुर में काम शुरू कराया गया है। जगह बदलने पर तर्क दिया गया था कि वहां तक मालवाहक (लोडिंग) वाहन नहीं पहुंच पाते जबकि कालाबोझ के ग्रामीणों का कहना है कि लोडिंग वाहन निकलने के लिए चयनित स्थल पर पर्याप्त जगह है। दूसरी ओर आधा काम करा चुके ठेकेदार को भी जमीन की अदला-बदली ने गफलत में डाल दिया गया है। उधर, ठेकेदार ने ग्रामीणों के आरोप को सिरे से खारिज किया है। उसका कहना है कि उसने निर्माण पर करीब ढाई लाख रुपये तक खर्च कर दिए हैं। अधिकारी इस मामले में काम रुकवाने तक सीमित हैं। आगे की तैयारी पर कोई ठोस प्रयास फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
वर्जन
मामला संज्ञान में है। ग्रामीणों ने आरमपुर में अन्नपूर्णा भवन बनने का विरोध किया था जिस पर काम रुकवा दिया गया था। नई जगह को लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता चल रही है।
- गरिमा सोनकिया, एसडीएम, बिधूना
अन्नपूर्णा भवन की विशेषता
प्रदेश सरकार प्रदेश भर में अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण करा रही है। भवनों का निर्माण मनरेगा व ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से कराया जा रहा है। यह भवन खाद्यान्न भंडारण के साथ ही उचित दर की दुकानों के संचालन में भी सहायक होंगे। अन्नपूर्णा भवनों में जनरल स्टोर और कम्युनिटी सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन भी किया जाएगा। यहां बिजली बिल भुगतान, ब्रॉडबैंड सेवा, सस्ती जेनेरिक दवाएं और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बिक्री की सुविधा होगी।