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Auraiya News: उपभोक्ता आयोग ने दिए व्यापारी को 3,81,142 लाख भुगतान करने का आदेश
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औरैया। बीमा क्लेम देने में आनाकानी करने वाली बीमा कंपनी गो डिजिट की दलीलों को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र ने खारिज कर दिया। आयोग ने कंपनी को पीड़ित व्यापारी को 3,81,142 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
बिधूना कोतवाली क्षेत्र के गांव रूरूगंज निवासी लक्ष्मण सिंह गांव में किसान खाद भंडार में खाद और कीटनाशक का व्यापार करते हैं। उन्होंने दुकान की सुरक्षा के लिए गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस से 10 लाख रुपये का चोरी का बीमा लिया था। 13 फरवरी 2024 की रात चोरों ने उनकी दुकान का ताला तोड़कर लाखों रुपये के बीज और कीटनाशक पार कर दिए थे।
पीड़ित ने जब बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया। पीड़ित ने 20 अगस्त साल 2020 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि बीमा सुपर मार्केट की श्रेणी में किया गया था जबकि मौके पर कीटनाशक और बीज की थोक बिक्री पाई गई। कंपनी की इस दलील को आयोग ने सेवा में कमी माना। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र और सदस्य जितेंद्र सिंह कुशवाह ने कंपनी को 45 दिन के अंदर पीड़ित को 3,81,142 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए। साथ ही कंपनी को परिवाद दाखिल करने की तिथि से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमा खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अलग से देने होंगे।
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बिधूना कोतवाली क्षेत्र के गांव रूरूगंज निवासी लक्ष्मण सिंह गांव में किसान खाद भंडार में खाद और कीटनाशक का व्यापार करते हैं। उन्होंने दुकान की सुरक्षा के लिए गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस से 10 लाख रुपये का चोरी का बीमा लिया था। 13 फरवरी 2024 की रात चोरों ने उनकी दुकान का ताला तोड़कर लाखों रुपये के बीज और कीटनाशक पार कर दिए थे।
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पीड़ित ने जब बीमा कंपनी से क्लेम मांगा तो कंपनी ने दावा निरस्त कर दिया। पीड़ित ने 20 अगस्त साल 2020 को आयोग में परिवाद दाखिल किया। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि बीमा सुपर मार्केट की श्रेणी में किया गया था जबकि मौके पर कीटनाशक और बीज की थोक बिक्री पाई गई। कंपनी की इस दलील को आयोग ने सेवा में कमी माना। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्र और सदस्य जितेंद्र सिंह कुशवाह ने कंपनी को 45 दिन के अंदर पीड़ित को 3,81,142 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए। साथ ही कंपनी को परिवाद दाखिल करने की तिथि से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मानसिक उत्पीड़न के लिए पांच हजार रुपये और मुकदमा खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अलग से देने होंगे।