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Auraiya News: खेल मैदान की जमीन पर वारिसान दर्ज कराने की एसडीएम ने तलब की रिपोर्ट
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फोटो-29- अमर उजाला में 23 मार्च के अंक में प्रकाशित समाचार। संवाद
- प्रशासन ने लिया अमर उजाला की खबर का संज्ञान
- एसडीएम ने कानूनगो व तहसीलदार से मांगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। सदर तहसील के गांव खानपुर फफूंद में खेल के मैदान की जमीन का वारिस बताकर दावा करने के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। जमीन पर फर्जी तरीके से वारिसान दर्ज कराने के आवेदन और उस पर क्षेत्रीय लेखपाल की ओर से दी गई सहमति रिपोर्ट ने अधिकारियों को हैरत में डाल दिया है। अमर उजाला में 23 मार्च के अंक में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने कानूनगो व तहसीलदार से मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। उनके मुताबिक मामले को गंभीरता से लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मामले में दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
गांव खानपुर फफूंद में गाटा संख्या 416-क व खाता संख्या 00803 राजस्व अभिलेखों में खेल के मैदान के रूप में दर्ज है। इसका रकबा करीब 0.0240 हेक्टेयर है। फफूंद के मोहल्ला गोविंदनगर निवासी आकाश कुमार ने छह मार्च 2026 को इसी भूमि पर वरासत दर्ज कराने के लिए राजस्व संहिता की धारा 33 (1) के तहत एक आवेदन किया। इस आवेदन में उन्होंने अपने पिता जयचंद्र की मृत्यु 10 फरवरी 2025 को दर्शाते हुए जमीन को अपनी मां उर्मिला देवी, भाई पंकज कुमार, राहुल कुमार, बहन प्रतीक्षा प्रजापति और स्वयं के नाम पर दर्ज कराने का विवरण दिया। आश्चर्य की बात यह है कि आवेदन में दर्ज खातेदार के नाम में जयचंद्र के बजाय खेल का मैदान ही लिखा हुआ था। वारिसानों के इस प्रकार के आवेदन ने अधिकारियों को हैरत में डाल दिया। खास बात यह रही कि क्षेत्रीय लेखपाल विनय तोमर ने अपनी सहमति रिपोर्ट तक आवेदन में लगा दी। 17 मार्च को लेखपाल की सहमति रिपोर्ट के बाद यह फाइल अब कानूनगो के पटल पर पहुंच गई है। बिना धरातल पर देखे लेखपाल की ओर से लगाई गई यह रिपोर्ट जमीन के फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रही है। इस मामले पर सोमवार को सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों में काफी खलबली रही। सूत्रों के मुताबिक तहसील में लेखपाल से लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच इस मसले को लेकर काफी देर तक संवाद चला। इस दौरान डांट-फटकार का भी दौर चला। अंत में विधिवत जांच और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर उच्चाधिकारियों ने निर्णय लिया।
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पांचों आवेदनकर्ता भी आ सकते हैं लपेटे में
अधिकारियों ने इस मामले में सिर्फ लेखपाल ही नहीं बल्कि आवेदनकर्ता और चारों वारिसानों को भी जांच के दायरे में रखा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या खेल मैदान की जमीन पर कागजी हक पाने के लिए वारिसानों का आवेदन किया गया था। सभी के बयानों और आवेदन की गहन जांच के बाद ही उनकी मंशा स्पष्ट होगी। कानूनगो और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर ही अधिकारी आगे की कार्रवाई का फैसला लेंगे। सहमति रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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वर्जन-- -
कानूनगो और तहसीलदार से खेल मैदान पर वरासत दर्ज कराने के मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अजय आनंद, एसडीएम सदर
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- प्रशासन ने लिया अमर उजाला की खबर का संज्ञान
- एसडीएम ने कानूनगो व तहसीलदार से मांगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। सदर तहसील के गांव खानपुर फफूंद में खेल के मैदान की जमीन का वारिस बताकर दावा करने के मामले में प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है। जमीन पर फर्जी तरीके से वारिसान दर्ज कराने के आवेदन और उस पर क्षेत्रीय लेखपाल की ओर से दी गई सहमति रिपोर्ट ने अधिकारियों को हैरत में डाल दिया है। अमर उजाला में 23 मार्च के अंक में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने कानूनगो व तहसीलदार से मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। उनके मुताबिक मामले को गंभीरता से लिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मामले में दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
गांव खानपुर फफूंद में गाटा संख्या 416-क व खाता संख्या 00803 राजस्व अभिलेखों में खेल के मैदान के रूप में दर्ज है। इसका रकबा करीब 0.0240 हेक्टेयर है। फफूंद के मोहल्ला गोविंदनगर निवासी आकाश कुमार ने छह मार्च 2026 को इसी भूमि पर वरासत दर्ज कराने के लिए राजस्व संहिता की धारा 33 (1) के तहत एक आवेदन किया। इस आवेदन में उन्होंने अपने पिता जयचंद्र की मृत्यु 10 फरवरी 2025 को दर्शाते हुए जमीन को अपनी मां उर्मिला देवी, भाई पंकज कुमार, राहुल कुमार, बहन प्रतीक्षा प्रजापति और स्वयं के नाम पर दर्ज कराने का विवरण दिया। आश्चर्य की बात यह है कि आवेदन में दर्ज खातेदार के नाम में जयचंद्र के बजाय खेल का मैदान ही लिखा हुआ था। वारिसानों के इस प्रकार के आवेदन ने अधिकारियों को हैरत में डाल दिया। खास बात यह रही कि क्षेत्रीय लेखपाल विनय तोमर ने अपनी सहमति रिपोर्ट तक आवेदन में लगा दी। 17 मार्च को लेखपाल की सहमति रिपोर्ट के बाद यह फाइल अब कानूनगो के पटल पर पहुंच गई है। बिना धरातल पर देखे लेखपाल की ओर से लगाई गई यह रिपोर्ट जमीन के फर्जीवाड़े की ओर इशारा कर रही है। इस मामले पर सोमवार को सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों में काफी खलबली रही। सूत्रों के मुताबिक तहसील में लेखपाल से लेकर अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच इस मसले को लेकर काफी देर तक संवाद चला। इस दौरान डांट-फटकार का भी दौर चला। अंत में विधिवत जांच और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर उच्चाधिकारियों ने निर्णय लिया।
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पांचों आवेदनकर्ता भी आ सकते हैं लपेटे में
अधिकारियों ने इस मामले में सिर्फ लेखपाल ही नहीं बल्कि आवेदनकर्ता और चारों वारिसानों को भी जांच के दायरे में रखा है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या खेल मैदान की जमीन पर कागजी हक पाने के लिए वारिसानों का आवेदन किया गया था। सभी के बयानों और आवेदन की गहन जांच के बाद ही उनकी मंशा स्पष्ट होगी। कानूनगो और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर ही अधिकारी आगे की कार्रवाई का फैसला लेंगे। सहमति रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
वर्जन
कानूनगो और तहसीलदार से खेल मैदान पर वरासत दर्ज कराने के मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-अजय आनंद, एसडीएम सदर