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Ayodhya News: राम मंदिर में जल्द होगी 50 नए पुजारियों की भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 25 Jan 2026 08:24 PM IST
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16- रथ सप्तमी पर राम मंदिर के परकोटे में विराजमान सूर्य देव का अभिषेक करते पुजारी- ट्रस्ट
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अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर में व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राम मंदिर में जल्द ही करीब 50 नए पुजारियों की भर्ती की जाएगी। यह प्रक्रिया परिसर में स्थित उप-मंदिरों में दर्शन व्यवस्था शुरू होने से पहले पूरी किए जाने की संभावना है, ताकि पूजा-अर्चना और दर्शन सुचारु रूप से संचालित किए जा सकें।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और पूजा व्यवस्थाओं के विस्तार को देखते हुए अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी क्रम में भर्ती की रूपरेखा तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि चयनित पुजारी वैदिक परंपराओं में पारंगत होंगे और उन्हें राम मंदिर की धार्मिक मर्यादाओं व परंपराओं के अनुरूप दायित्व सौंपे जाएंगे। राम मंदिर में अभी 20 पुजारी कार्यरत हैं। इन पुजारियों को रामलला व राम दरबार के अलावा शेषावतार व परकोटे के छह मंदिरों के अतिरिक्त यज्ञमंडप, सप्त मंडपम व कुबेर टीला पर स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी है।
राम मंदिर व राम दरबार के अतिरिक्त सात उप-मंदिरों में नियमित दर्शन शुरू कराने के लिए तीन शिफ्टों व सुबह-शाम की दोनों पालियों में 42 पुजारियों की जरूरत है जो कि आठ-आठ घंटे व उससे अधिक समय तक ड्यूटी कर सकें। इसके अलावा सप्त मंडपम व कुबेर टीला में सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक के लिए आठ अतिरिक्त पुजारी की आवश्यकता है। इस तरह से कम से कम 50 पुजारियों की तत्काल आवश्यकता है।
रथ सप्तमी में भगवान सूर्य नारायण का अभिषेक
रथ सप्तमी के पावन अवसर पर राम मंदिर के परकोटे में विराजमान सूर्यदेव भगवान का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर सूर्य उपासना के दिव्य भाव से सराबोर रहा। प्रातः काल विशेष पूजा-अर्चना के साथ सूर्यदेव का जल, दूध, दही, घृत और मधु से अभिषेक किया गया। पुजारियों ने वैदिक विधि से अनुष्ठान संपन्न कराया। रथ सप्तमी को सूर्यदेव के प्राकट्य का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने रथ पर आरूढ़ होकर पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं।
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श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और पूजा व्यवस्थाओं के विस्तार को देखते हुए अतिरिक्त पुजारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी क्रम में भर्ती की रूपरेखा तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि चयनित पुजारी वैदिक परंपराओं में पारंगत होंगे और उन्हें राम मंदिर की धार्मिक मर्यादाओं व परंपराओं के अनुरूप दायित्व सौंपे जाएंगे। राम मंदिर में अभी 20 पुजारी कार्यरत हैं। इन पुजारियों को रामलला व राम दरबार के अलावा शेषावतार व परकोटे के छह मंदिरों के अतिरिक्त यज्ञमंडप, सप्त मंडपम व कुबेर टीला पर स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी है।
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राम मंदिर व राम दरबार के अतिरिक्त सात उप-मंदिरों में नियमित दर्शन शुरू कराने के लिए तीन शिफ्टों व सुबह-शाम की दोनों पालियों में 42 पुजारियों की जरूरत है जो कि आठ-आठ घंटे व उससे अधिक समय तक ड्यूटी कर सकें। इसके अलावा सप्त मंडपम व कुबेर टीला में सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक के लिए आठ अतिरिक्त पुजारी की आवश्यकता है। इस तरह से कम से कम 50 पुजारियों की तत्काल आवश्यकता है।
रथ सप्तमी में भगवान सूर्य नारायण का अभिषेक
रथ सप्तमी के पावन अवसर पर राम मंदिर के परकोटे में विराजमान सूर्यदेव भगवान का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर सूर्य उपासना के दिव्य भाव से सराबोर रहा। प्रातः काल विशेष पूजा-अर्चना के साथ सूर्यदेव का जल, दूध, दही, घृत और मधु से अभिषेक किया गया। पुजारियों ने वैदिक विधि से अनुष्ठान संपन्न कराया। रथ सप्तमी को सूर्यदेव के प्राकट्य का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने रथ पर आरूढ़ होकर पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं।
