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जेल से भागे दो बंदी: अयोध्या में पहले भी जेल प्रशासन की आंख में धूल झोंक चुके हैं अपराधी, निगरानी की खुली पोल
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:02 PM IST
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सार
अयोध्या जेल से दो बंदी भाग गए। इससे पहले भी यहां अपराधी जेल प्रशासन की आंख में धूल झोंक चुके हैं। 18 जून 2024 को जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक के पास मोबाइल फोन व सिमकार्ड मिले थे। निगरानी प्रणाली सख्त करने का जो दावा किया गया था, उसकी पोल खुल गई है।
चादर की रस्सी बनाकर जेल की दीवार कूदकर दो बंदी भाग गए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
यूपी के अयोध्या में पहले भी शातिर अपराधी जेल प्रशासन की आंख में धूल झोंक चुके हैं। डेढ़ साल पहले भी जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक के पास तीन मोबाइल फोन और सिमकार्ड बरामद हुए थे। इसके बाद से निगरानी प्रणाली और सख्त करने का दावा किया गया था। इसकी बुधवार रात पोल खुल गई।
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जेल के भीतर से ही अपराधियों के सिंडिकेट चलने, वहीं से तमाम आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने, जेल प्रशासन को चकमा देकर भागने जैसे मामले शुरू से ही चलन में रहे हैं। इन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने चुस्त व्यवस्था की। परिसर को सीसीटीवी से लैस किया गया। तमाम तरह से फेरबदल करके सुरक्षा व्यवस्था अभेद्द बनाने के दावे किए गए, लेकिन समय-समय पर अपराधी जेल के सुरक्षा घेरे की हकीकत उजागर कर देते हैं।
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गड्ढा खोदकर मोबाइल और सिमकार्ड रखे गए थे
18 जून, 2024 को भी जेल की सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खुली थी। हाई सिक्योरिटी बैरक के बाहर लगे बिजली के खंभे के सपोर्ट तार के पास डेढ़ फुट गड्ढा खोदकर उसमें तीन मोबाइल फोन और सिमकार्ड रखे गए थे। यह मोबाइल फोन इसी हाई सिक्योरिटी बैरक में निरुद्ध सुल्तानपुर के कूरेभार थाना क्षेत्र के लोहरी, धनपतगंज निवासी अंकित अग्रहरि, अयोध्या के इनायतनगर थाना क्षेत्र के बारुन बाजार के देवरिया गांव निवासी सचिन जायसवाल और शहर के साहबगंज खुर्दाबाद निवासी श्याम यादव व गौतम बुद्ध नगर के सूरजपुर थाना क्षेत्र के साकीपुर निवासी अनूप भाटी के बताए गए थे।मामले में जेलर जितेंद्र कुमार ने चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। निगरानी में लापरवाही मिलने पर बंदी रक्षक अजय शर्मा, पप्पू यादव और सुरेश कुमार को निलंबित किया गया था। इसके बाद से सुरक्षा घेरा सख्त करने और निगरानी बढ़ाने के दावे किए गए, जो कि बुधवार की रात बंदी शेर अली व गोलू अग्रहरि के भागने से तार-तार हो गए हैं।
जून, 2012 में भी एक बंदी के भागने की चर्चा
जिला जेल से ही जून, 2012 में भी एक बंदी के भागने की चर्चा रही है। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्रकाशित एक लेख में इसकी पुष्टि हुई है, जिसमें बताया गया है कि जेल से देवराज यादव नामक एक आरोपी जेल प्रशासन को चकमा देकर फरार हुआ था। हालांकि, इससे संबंधित अन्य रिकार्ड उपलब्ध नहीं हो सके।अब एक बार फिर जिला कारागार में हत्या, डकैती, दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में निरुद्ध दो आरोपी बुधवार रात जेल फांदकर भाग निकले। बृहस्पतिवार सुबह बंदियों की गणना के समय इसकी जानकारी हुई तो हलचल मच गई। मामले में वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर, डिप्टी जेलर समेत 11 अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। बंदियों की गिरफ्तारी के लिए टीम लगाई गई है।
जिला कारागार के कारापाल जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि सुल्तानपुर के करौंदी कला क्षेत्र के अमरे मऊ निवासी शेर अली को हत्या, डकैती, जानलेवा हमला समेत अन्य मामलों में 28 नवंबर, 2024 को बंद किया गया था। वहीं, अमेठी के मुसाफिरखाना निवासी गोलू अग्रहरि दुष्कर्म, छेड़छाड़, चोरी आदि मामलों में 14 सितंबर, 2025 से निरुद्ध था। शेर अली के खिलाफ बीकापुर, जौनपुर के सरपतहा व सुल्तानपुर के जयसिंहपुर थाने में कई मामले दर्ज हैं। वहीं, गोलू अग्रहरि के खिलाफ इनायतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज है।
