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Ayodhya: "लकड़ी के चूल्हे पर बने भोग, अयोध्या में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर हो भोग प्रसाद की व्यवस्था"
Tue, 11 Aug 2026 07:15 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 11 Aug 2026 07:15 PM IST
सार
जगद्गुरु राजेंद्रदेवाचार्य ने श्रीरामलला सरकार की भोग-प्रसाद व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि रामलला का भोग छोटे पात्रों या टिफिन में नहीं, बल्कि बड़े-बड़े पारंपरिक थालों में श्रद्धा और भव्यता के साथ सजाकर अर्पित किया जाए। इससे मंदिर की धार्मिक परंपरा और गरिमा और अधिक बढ़ेगी।
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अयोध्या का राम मंदिर।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के पुरोधा परमहंस श्रीरामचंद्रदास की पुण्यतिथि पर श्रीदिगंबर अखाड़ा में संचालित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में रामलला के भोग प्रसाद में बदलाव की आवाज उठी। कथा प्रवाचक मलूकपीठाधीश्वर जगद्गुरु राजेंद्रदेवाचार्य ने श्रीरामलला सरकार की भोग-प्रसाद व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर भोग प्रसाद की व्यवस्था होनी चाहिए।
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राजेंद्रदेवाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में गैस के चूल्हे पर तैयार किए जाने वाले भोजन के स्थान पर भगवान श्रीरामलला का भोग परंपरागत लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाना चाहिए। रामलला का भोग छोटे पात्रों या टिफिन में नहीं, बल्कि बड़े-बड़े पारंपरिक थालों में श्रद्धा और भव्यता के साथ सजाकर अर्पित किया जाए। इससे मंदिर की धार्मिक परंपरा और गरिमा और अधिक बढ़ेगी।
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जगद्गुरु ने राम मंदिर परिसर से जुड़ी विश्व की सबसे बड़ी गोशाला स्थापित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उसी गोशाला की गौमाताओं से प्राप्त दूध, दही, घी और अन्य गव्य पदार्थों का उपयोग रामलला की नित्य सेवा, भोग और प्रसाद व्यवस्था में किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पुरी के श्रीजगन्नाथ मंदिर में भगवान को अनेक प्रकार के व्यंजन बड़े-बड़े थालों में अर्पित किए जाते हैं और बाद में वही महाप्रसाद लाखों श्रद्धालुओं तक पहुंचता है, उसी प्रकार अयोध्या में भी रामलला के लिए भव्य और व्यापक भोग-प्रसाद व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। इससे पहले महंत रामलखन दास व मंदिर के प्रबंधक आशुतोष सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।