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Ayodhya News: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए दरोगा को नौ साल की जेल
Tue, 18 Aug 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:47 PM IST
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अयोध्या। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट रजत वर्मा ने 12 साल पुराने रिश्वत मामले में दरोगा संजय कुमार राय को नौ साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2014 में अंबेडकर नगर के हंसवर थाना क्षेत्र के गोहिला गांव निवासी राम सकल यादव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के लखनऊ कार्यालय में शिकायत की थी। आरोप था कि रेखा देवी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सफाई कर्मी के पद पर नौकरी हासिल की थी। बाद में उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। इसी रंजिश में रेखा देवी ने राम सकल के भाई लालजी यादव के खिलाफ हंसवर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
रिपोर्ट समाप्त कराने के लिए तत्कालीन दरोगा संजय कुमार राय ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत के बाद सात अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर में मोटरसाइकिल स्टैंड के पास भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने दरोगा को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
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अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर रिश्वत मांगने के अपराध में चार साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना तथा लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करने पर पांच साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।
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अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2014 में अंबेडकर नगर के हंसवर थाना क्षेत्र के गोहिला गांव निवासी राम सकल यादव ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के लखनऊ कार्यालय में शिकायत की थी। आरोप था कि रेखा देवी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सफाई कर्मी के पद पर नौकरी हासिल की थी। बाद में उसकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। इसी रंजिश में रेखा देवी ने राम सकल के भाई लालजी यादव के खिलाफ हंसवर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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रिपोर्ट समाप्त कराने के लिए तत्कालीन दरोगा संजय कुमार राय ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। शिकायत के बाद सात अगस्त को कलेक्ट्रेट परिसर में मोटरसाइकिल स्टैंड के पास भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने दरोगा को पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
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अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर रिश्वत मांगने के अपराध में चार साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना तथा लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करने पर पांच साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया।