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Ayodhya News: अयोध्या में वाॅटर मेट्रो संचालन के लिए सर्वे का काम पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 21 May 2026 11:14 PM IST
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अयोध्या। सरयू नदी पर प्रस्तावित वॉटर मेट्रो परियोजना को लेकर प्रारंभिक सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। योजना के तहत नयाघाट से गुप्तार घाट तक लगभग आठ किलोमीटर लंबा विशेष वॉटर चैनल विकसित किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन, शहरी परिवहन और नदी आधारित यातायात को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
बताते चलें कि सरकार देशभर के 18 शहरों में वॉटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। पहले चरण में श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में वॉटर मेट्रो शुरू करने की योजना है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके संचालन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे वर्ष पर्याप्त जलस्तर बनाए रखना होगा। सरयू नदी में मानसून के दौरान पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है, लेकिन गर्मियों और शुष्क मौसम में कई स्थानों पर जलस्तर काफी कम हो जाता है। ऐसे में पूरे आठ किलोमीटर लंबे चैनल में सालभर समान जलगहराई बनाए रखना बड़ी तकनीकी चुनौती होगी। इसके लिए ड्रेजिंग, नदी तल समतलीकरण और जलधारा प्रबंधन जैसे कार्य लगातार करने पड़ सकते हैं।
अयोध्या में क्रूज संचालन की योजना पर काम कर चुके अलकनंदा क्रूज लाइन के निदेशक विकास मालवीय बताते हैं कि परियोजना के तहत जलमार्ग में सुरक्षित नेविगेशन के लिए चैनल मार्किंग, फ्लोटिंग जेट्टी, टर्निंग रेडियस, आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम और नदी प्रवाह मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित करने होंगे। यदि जलगहराई एक मीटर से नीचे जाती है तो सामान्य यात्री जलयान संचालन प्रभावित हो सकता है। इसलिए भविष्य में बैराज प्रबंधन, नियंत्रित जल प्रवाह और नियमित ड्रेजिंग इस परियोजना की अनिवार्य जरूरत बन सकते हैं।
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इनसेट
2.5 मीटर तक की न्यूनतम जलगहराई आवश्यक
विकास मालवीय के अनुसार वॉटर मेट्रो संचालन के लिए नदी में केवल पानी होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लगातार नियंत्रित और सुरक्षित जलगहराई बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। सामान्य तौर पर छोटी और मध्यम आकार की इलेक्ट्रिक वॉटर मेट्रो या कैटामरैन बोट के संचालन के लिए कम से कम 1.5 से 2.5 मीटर तक की न्यूनतम जलगहराई आवश्यक मानी जाती है।
इसके साथ ही नाव के नीचे सुरक्षित ‘अंडर कील क्लीयरेंस’ भी जरूरी होती है, ताकि तल से टकराव का खतरा न रहे। इसके अलावा जेट्टी के पास और एप्रोच क्षेत्रों में कम से कम 1.50 मीटर की गहराई बनाए रखना आवश्यक है ताकि नौकाएं बिना फंसे सुरक्षित रूप से किनारे तक पहुंच सकें।
इनसेट
दो साल पहले शुरू हुई थी वॉटर मेट्रो
-अयोध्या में नवंबर 2024 में ही वॉटर मेट्रो संचालन की शुरुआत हुई थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से अयोध्या में वॉटर मेट्रो का वर्चुअल शुभारंभ किया था। यह वॉटर मेट्रो अयोध्या में मुख्य रूप से संत तुलसीदास घाट (नया घाट) और गुप्तार घाट के बीच संचालित होती है। जिसमें एक बार में लगभग 50 यात्री बैठकर सरयू नदी के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। हालांकि इन दिनों वॉटर मेट्रो का संचालन ठप है। पर्यटन अधिकारी बृजपाल सिंह ने बताया कि इस समय जलस्तर पर्याप्त नहीं होने के कारण वॉटर मेट्रो का संचालन नहीं हो पा रहा है।
बताते चलें कि सरकार देशभर के 18 शहरों में वॉटर मेट्रो ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू करने की योजना पर काम कर रही है। पहले चरण में श्रीनगर, पटना, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज में वॉटर मेट्रो शुरू करने की योजना है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके संचालन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पूरे वर्ष पर्याप्त जलस्तर बनाए रखना होगा। सरयू नदी में मानसून के दौरान पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है, लेकिन गर्मियों और शुष्क मौसम में कई स्थानों पर जलस्तर काफी कम हो जाता है। ऐसे में पूरे आठ किलोमीटर लंबे चैनल में सालभर समान जलगहराई बनाए रखना बड़ी तकनीकी चुनौती होगी। इसके लिए ड्रेजिंग, नदी तल समतलीकरण और जलधारा प्रबंधन जैसे कार्य लगातार करने पड़ सकते हैं।
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अयोध्या में क्रूज संचालन की योजना पर काम कर चुके अलकनंदा क्रूज लाइन के निदेशक विकास मालवीय बताते हैं कि परियोजना के तहत जलमार्ग में सुरक्षित नेविगेशन के लिए चैनल मार्किंग, फ्लोटिंग जेट्टी, टर्निंग रेडियस, आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम और नदी प्रवाह मॉनिटरिंग सिस्टम भी विकसित करने होंगे। यदि जलगहराई एक मीटर से नीचे जाती है तो सामान्य यात्री जलयान संचालन प्रभावित हो सकता है। इसलिए भविष्य में बैराज प्रबंधन, नियंत्रित जल प्रवाह और नियमित ड्रेजिंग इस परियोजना की अनिवार्य जरूरत बन सकते हैं।
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2.5 मीटर तक की न्यूनतम जलगहराई आवश्यक
विकास मालवीय के अनुसार वॉटर मेट्रो संचालन के लिए नदी में केवल पानी होना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि लगातार नियंत्रित और सुरक्षित जलगहराई बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। सामान्य तौर पर छोटी और मध्यम आकार की इलेक्ट्रिक वॉटर मेट्रो या कैटामरैन बोट के संचालन के लिए कम से कम 1.5 से 2.5 मीटर तक की न्यूनतम जलगहराई आवश्यक मानी जाती है।
इसके साथ ही नाव के नीचे सुरक्षित ‘अंडर कील क्लीयरेंस’ भी जरूरी होती है, ताकि तल से टकराव का खतरा न रहे। इसके अलावा जेट्टी के पास और एप्रोच क्षेत्रों में कम से कम 1.50 मीटर की गहराई बनाए रखना आवश्यक है ताकि नौकाएं बिना फंसे सुरक्षित रूप से किनारे तक पहुंच सकें।
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दो साल पहले शुरू हुई थी वॉटर मेट्रो
-अयोध्या में नवंबर 2024 में ही वॉटर मेट्रो संचालन की शुरुआत हुई थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने वाराणसी से अयोध्या में वॉटर मेट्रो का वर्चुअल शुभारंभ किया था। यह वॉटर मेट्रो अयोध्या में मुख्य रूप से संत तुलसीदास घाट (नया घाट) और गुप्तार घाट के बीच संचालित होती है। जिसमें एक बार में लगभग 50 यात्री बैठकर सरयू नदी के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। हालांकि इन दिनों वॉटर मेट्रो का संचालन ठप है। पर्यटन अधिकारी बृजपाल सिंह ने बताया कि इस समय जलस्तर पर्याप्त नहीं होने के कारण वॉटर मेट्रो का संचालन नहीं हो पा रहा है।