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Ayodhya News: मांझा कला गांव में हर रोज बढ़ रहा है जिंदगी पर खतरा
Thu, 16 Jul 2026 10:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 16 Jul 2026 10:18 PM IST
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पानी से घिरे मांझा कला गांव के हालात
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सोहावल। तहसील क्षेत्र के मांझा कला गांव में सरयू नदी की बाढ़ एक बार फिर सब कुछ छीन लेने की ओर बढ़ रही है। गांव के 1200 से अधिक लोग हर साल की तरह इस बार भी शरणार्थी जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। बुधवार से जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे करीब 150 घरों के लोग पलायन कर रहे हैं।
यह गांव आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। साल के तीन महीने ग्रामीण सरकारी शरणालयों में बिताते हैं। मुख्यमंत्री तक आकर राहत सामग्री बांटते हैं लेकिन गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर शासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। सिर्फ मतदाता आधार बनी गांव की 1200 से अधिक की आबादी को जनप्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन दिए और राम के भरोसे छोड़ दिया। गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी भर चुका है, जिससे छोटे मोहल्ले घिर गए हैं। सड़कें पानी और कीचड़ से भर गई हैं, जिससे रोगी वाहन का पहुंचना असंभव हो गया है। बच्चों की पढ़ाई ठप होने की कगार पर है। प्रशासन की राहत गतिविधियां अभी कागजों तक ही सीमित हैं।
गांव के लिए एक किमी भी सड़क नहीं
मुख्य सड़क से गांव तक एक किलोमीटर की सड़क तक नहीं है। ग्रामीणों ने आज तक बिजली की रोशनी नहीं देखी है। बच्चे डीजल से जलने वाली लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते हैं। गर्मी भगाने के लिए हाथ के पंखों का सहारा लेना पड़ता है। बीमारों को चारपाई पर रखकर कंधे के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है। स्थानीय रमेश, दिनेश यादव और ननकन यादव सहित अन्य लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी शरणार्थियों की थी, आज भी है और शायद कल भी रहेगी। ग्राम प्रधान चंद्र भास्कर यादव के अलावा कोई नेता या मंत्री उनकी सुध नहीं लेता। दूध का कारोबार भी बरसात में सुरक्षित नहीं रह पाता है।
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वर्जन
गांव की बाढ़ को लेकर सतर्कता बरती जा रही हैं। ननकन पुरवा, बैरागी पुरवा, रावण घाट, छोटे-छोटे सात मजरे हैं जो हर वर्ष प्रभावित होते हैं। इनके स्थायी पुनर्वास की आवश्यकता है इसके लिए सांसद, विधायक जैसे नेताओं को सोचना चाहिए।
ध्रुव राज यादव
राजस्व निरीक्षक
सरयू में बाढ़ अभी शुरू हुई है। जीवन अभी सामान्य है। प्रशासन की निगाह जमी है। राजस्व कर्मी लगा दिए गए हैं। आवश्यकता अनुसार कदम उठाए जाएंगे
सविता, एसडीएम सोहावल
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यह गांव आजादी के बाद से ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। साल के तीन महीने ग्रामीण सरकारी शरणालयों में बिताते हैं। मुख्यमंत्री तक आकर राहत सामग्री बांटते हैं लेकिन गांव की मूलभूत समस्याओं को लेकर शासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। सिर्फ मतदाता आधार बनी गांव की 1200 से अधिक की आबादी को जनप्रतिनिधियों ने केवल आश्वासन दिए और राम के भरोसे छोड़ दिया। गांव के चारों ओर बाढ़ का पानी भर चुका है, जिससे छोटे मोहल्ले घिर गए हैं। सड़कें पानी और कीचड़ से भर गई हैं, जिससे रोगी वाहन का पहुंचना असंभव हो गया है। बच्चों की पढ़ाई ठप होने की कगार पर है। प्रशासन की राहत गतिविधियां अभी कागजों तक ही सीमित हैं।
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गांव के लिए एक किमी भी सड़क नहीं
मुख्य सड़क से गांव तक एक किलोमीटर की सड़क तक नहीं है। ग्रामीणों ने आज तक बिजली की रोशनी नहीं देखी है। बच्चे डीजल से जलने वाली लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते हैं। गर्मी भगाने के लिए हाथ के पंखों का सहारा लेना पड़ता है। बीमारों को चारपाई पर रखकर कंधे के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है। स्थानीय रमेश, दिनेश यादव और ननकन यादव सहित अन्य लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी शरणार्थियों की थी, आज भी है और शायद कल भी रहेगी। ग्राम प्रधान चंद्र भास्कर यादव के अलावा कोई नेता या मंत्री उनकी सुध नहीं लेता। दूध का कारोबार भी बरसात में सुरक्षित नहीं रह पाता है।
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गांव की बाढ़ को लेकर सतर्कता बरती जा रही हैं। ननकन पुरवा, बैरागी पुरवा, रावण घाट, छोटे-छोटे सात मजरे हैं जो हर वर्ष प्रभावित होते हैं। इनके स्थायी पुनर्वास की आवश्यकता है इसके लिए सांसद, विधायक जैसे नेताओं को सोचना चाहिए।
ध्रुव राज यादव
राजस्व निरीक्षक
सरयू में बाढ़ अभी शुरू हुई है। जीवन अभी सामान्य है। प्रशासन की निगाह जमी है। राजस्व कर्मी लगा दिए गए हैं। आवश्यकता अनुसार कदम उठाए जाएंगे
सविता, एसडीएम सोहावल