ओपी राजभर का सपा पर हमला: 'विनाश काले विपरीत बुद्धि', विधायक-कार्यकर्ता की मारपीट को बताया ठेकेदारी की लड़ाई
आजमगढ़ जिले में सपा विधायक और पार्टी कार्यकर्ता के बीच मारपीट के मामले को लेकर मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जमकर निशाना साधा। कहा कि ये सिद्धांत नहीं, ठेकेदारी की लड़ाई है।
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प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आजमगढ़ में सपा विधायक और पार्टी कार्यकर्ता के बीच हुई मारपीट को लेकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। सोमवार को निरीक्षण भवन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में अब सिद्धांत और विचारधारा की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि ठेकेदारी और कमीशन को लेकर आपसी संघर्ष चल रहा है।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि विपक्ष जो चश्मा पहनता है, वह विपक्ष का चश्मा है। सरकार का चश्मा विकास का चश्मा है, इसलिए सरकार जो भी काम कर रही है। अगर विपक्ष के लोग कहें कि वह सही काम कर रही है, तो उन्हें वोट कौन देगा? इसीलिए विपक्ष के लोग हमेशा हमारा विरोध करते हैं।
राजभर ने आजमगढ़ के गोपालगंज में सपा विधायक नफीस अहमद और पार्टी के बूथ अध्यक्ष के बीच सर्वे को लेकर हुई मारपीट का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ठेकेदारी को लेकर विवाद की स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता 35 प्रतिशत कमीशन को लेकर आपस में ही भिड़ रहे हैं कि ठेका कौन करेगा।
‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही
उन्होंने सपा की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के लिए ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के नारे पर भी राजभर ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में अब कार्यकर्ता आपस में ही लड़ रहे हैं। पीडीए की व्याख्या करते हुए उन्होंने इसे लेकर भी तंज कसा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में कार्यकर्ताओं को जिस तरह की ‘ट्रेनिंग’ मिली थी, उसका असर अब भी दिखाई दे रहा है। आजमगढ़ की घटना के संबंध में उन्होंने कहा कि पीड़ित की शिकायत और सामने आए वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी दबाव में काम नहीं करेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर कही ये बात
राजभर ने दावा किया कि सपा में जारी आपसी खींचतान का राजनीतिक लाभ एनडीए गठबंधन को मिलेगा। सहारनपुर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से सरकार पर संविधान और न्यायपालिका की अवहेलना के आरोपों पर भी राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मनमाने ढंग से कार्रवाई नहीं की, बल्कि न्यायालय के आदेश का पालन किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को पहले नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था, लेकिन वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई।
राजभर ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गया है। उन्होंने किसी धर्म विशेष को निशाना बनाए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई धर्म और वर्ग देखकर नहीं की जा रही है। हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई-किसी भी व्यक्ति द्वारा सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरी कानूनी प्रक्रिया जाने बिना सरकार पर आरोप लगाना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।