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दोहरे हत्याकांड का खुलासा: डीजल चोरी का गैंग चलाते थे कामिल व इरशाद, साथियों ने ही मारी गोलियां; ये थी वजह

Thu, 09 Jul 2026 08:59 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 09 Jul 2026 08:59 PM IST
सार

Muzaffarnagar News: कामिल और इरशाद की हत्या उनके साथियों बागपत निवासी सतीश और राजस्थान के विक्रम उर्फ लंबू ने की थी। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने वारदात का खुलासा कर दिया। दोनों को कोर्ट से रिमांड पर लिया गया है। 

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Double murder case solved: Kamil and Irshad ran a diesel theft gang; shot dead by their own accomplices
कामिल और इरशाद की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झज्जर-गुरुग्राम रोड स्थित सहवाग इंटरनेशनल स्कूल के पास छह जुलाई को मिले यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के गांव जौला निवासी कामिल (52) और इरशाद (45) के शवों की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ढाबों पर खड़े होने वाले ट्रकों से डीजल चोरी का गैंग चलाते थे। लेनदेन के विवाद में उनके ही साथियों ने गोलियां मारकर दोनों की हत्या की थी। पुलिस ने यूपी के बागपत जिले के गांव किर्ठल निवासी सतीश और राजस्थान के गांव देहमी निवासी विक्रम उर्फ लंबू को गिरफ्तार कर लिया है। दो आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। विक्रम चोरी का डीजल खरीदता था।
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पुलिस के मुताबिक, कामिल और इरशाद ने अपने गैंग में तीन साथियों को शामिल कर रखा था, जिन्हें रोजाना 1500 रुपये देते थे। सतीश डीजल चुराने के बहाने कामिल और इरशाद को हरियाणा की तरफ ले आया, जहां अन्य साथी सिकंदर और कपिल भी थे। गांव याकूबपुर पहुंचने के बाद सुनसान जगह पर उन्होंने कामिल को गोली मारी थी।
जब इरशाद ने विरोध किया तो उस पर पाइप रेंच से कई वार किए और गोली मार दी। इसके बाद एसयूवी में डालकर करीब 15 किलोमीटर दूर सहवाग इंटरनेशनल स्कूल के पास शव फेंक कर फरार हो गए।
 
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रिमांड पर लिए दोनों आरोपी
दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से सतीश को पांच दिन और विक्रम को तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। सदर थाना झज्जर और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम आगे की जांच कर रही है।
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पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री सिंह ने बताया कि इरशाद के भाई हकीकत की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। परिवार ने बताया था कि दोनों प्रॉपर्टी का काम करते थे लेकिन जांच में पता चला कि दोनों ढाबों पर खड़े होने वाले ट्रकों से डीजल चुराते थे। डीजल चोरी का काम सतीश, सिकंदर और कपिल करते थे। इन तीनों को हर रोज 1500-1500 रुपये मिलते थे, बाकी रुपये कामिल और इरशाद रख लेते थे।
 

सतीश ने अन्य साथियों के साथ मिलकर चोरी का डीजल विक्रम को बेचना शुरू कर दिया था। इसका पता चलने पर कामिल और इरशाद के साथ उनकी अनबन भी हुई। मगर सतीश ने दोनों को रास्ते से हटाकर गैंग का सरगना बनने और मोटा मुनाफा कमाने की साजिश रची। इसमें विक्रम को भी अपने साथ ले लिया।
 

सबूत मिटाने का किया था प्रयास
आरोपियों ने हत्या की वारदात के बाद सबूत मिटाने का प्रयास किया। कामिल और इरशाद के कपड़ों को खून लगने की वजह से जला दिया। मृतकों के फोन नाले में फेंककर कामिल की एसयूवी गाड़ी अच्छी तरह धोकर छिपाकर खड़ी कर दी थी।
 
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