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Baghpat News: अनुदान की उम्मीद में बुजुर्ग हो गए किसान, फूटी कौड़ी तक नहीं मिली
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बड़ौत। बासौली के किसान विनोद ने वर्ष 2015 में 27 हजार रुपये में चारा काटने वाली मशीन खरीदी थी। उनको कृषि विभाग से 20 हजार रुपये अनुदान मिलना था। इसके लिए विनोद ने तभी आवेदन की सभी प्रक्रिया पूरी कर दी, मगर आज तक अनुदान नहीं मिला। विनोद की उम्र तब 49 साल थी और अब वह 60 साल के बुजुर्ग हो चुके हैं। इसके बावजूद अनुदान के लिए भटक रहे हैं।
अनुदान के लिए भटकते हुए केवल विनोद ही बुजुर्ग नहीं हुए, बल्कि बसी गांव के किसान श्याम सिंह की उम्र उस समय करीब 56 साल थी और अब वह 67 साल के हो गए हैं। शिकोहपुर के महेंद्र सिंह तब 62 वर्ष के थे, जो अब 73 वर्ष के हैं। ऐसे ही 150 किसान तब से लगातार विभाग के चक्कर काटते रहे और कृषि विभाग के अधिकारी उनको टरकाते रहे। वह उन पर विश्वास करते रहे।
इन किसानों को अब पता चला कि इनका अनुदान तभी विभाग के अधिकारियों व कर्मियों ने हजम कर लिया, इसलिए अब हक की लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो वहां भी अफसरों ने फर्जीवाड़ा कर दिया। इन शिकायतकर्ता किसानों के बजाय दूसरे किसानों के मोबाइल नंबर दर्ज कर शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उनके पास फोन करके शिकायत के निस्तारण का फीडबैक लिया गया तो उन्होंने कोई शिकायत नहीं करने की बात कह दी।
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अधिकतर शिकायतों के निस्तारण में लूंब के मनीष का मोबाइल नंबर लूंब गांव के रहने वाले किसान मनीष चौहान ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने कई किसानों की शिकायतों का निस्तारण करते हुए उनका मोबाइल नंबर दर्ज कर रखा है। इसलिए पिछले तीन महीने से लगातार लखनऊ से शिकायतों के निस्तारण के संबंध में उनके पास फोन आते हैं। उन्होंने कई बार कृषि विभाग कार्यालय जाकर आपत्ति जताई कि उन्होंने न मशीन खरीदी है और न ही किसी योजना के तहत आवेदन या शिकायत की है। आश्वासन के बावजूद आज तक स्थिति नहीं बदली और अब भी उनके पास लगातार फोन आते हैं।
परिवार वालों के ताने भी झेल रहे किसान
चारा काटने वाली मशीन खरीदने वाले किसानों का कहना है कि सरकारी योजना पर भरोसा कर उन्होंने मशीन खरीदी थी। अनुदान नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ में परिवार वाले भी ताने देते हैं कि सरकारी भरोसे में आकर रुपये फंसा दिए। कई किसानों ने उम्मीद छोड़ दी, लेकिन कुछ को आज भी अपने हक की राशि मिलने का इंतजार है।
ये बोले किसान
11 साल पहले अनुदान के भरोसे चारा काटने वाली मशीन खरीदी थी। अनुदान के रुपये नहीं मिले तो मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन वहां भी मेरा मोबाइल नंबर हटाकर दूसरे किसान का नंबर दर्ज कर शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उसमें लिखा गया कि इनको अनुदान की सही जानकारी नहीं थी, इसलिए शिकायत कर दी थी, जो निस्तारित हो गई। -हरख्याल, बरवाला।
हमें बताया गया था कि अनुदान की राशि 20 हजार रुपये मिल जाएगी। इसी भरोसे पर मशीन खरीदी, लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। किसानों के हिस्से का पैसा आखिर गया कहां, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी तो भविष्य में किसी के साथ इस तरह नहीं किया जाएगा।
-महेंद्र सिंह, शिकोहपुर
वर्जन--
अनुदान वितरण या शिकायतों के निस्तारण में गड़बड़ी हुई है तो यह गंभीर मामला है। रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी कि आखिर किसानों को अनुदान क्यों नहीं मिला। पूरी जानकारी करके ही इसमें आगे कुछ किया जाएगा।
-विभाति चतुर्वेदी, उप निदेशक कृषि
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अनुदान के लिए भटकते हुए केवल विनोद ही बुजुर्ग नहीं हुए, बल्कि बसी गांव के किसान श्याम सिंह की उम्र उस समय करीब 56 साल थी और अब वह 67 साल के हो गए हैं। शिकोहपुर के महेंद्र सिंह तब 62 वर्ष के थे, जो अब 73 वर्ष के हैं। ऐसे ही 150 किसान तब से लगातार विभाग के चक्कर काटते रहे और कृषि विभाग के अधिकारी उनको टरकाते रहे। वह उन पर विश्वास करते रहे।
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इन किसानों को अब पता चला कि इनका अनुदान तभी विभाग के अधिकारियों व कर्मियों ने हजम कर लिया, इसलिए अब हक की लड़ाई के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तो वहां भी अफसरों ने फर्जीवाड़ा कर दिया। इन शिकायतकर्ता किसानों के बजाय दूसरे किसानों के मोबाइल नंबर दर्ज कर शिकायतों का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उनके पास फोन करके शिकायत के निस्तारण का फीडबैक लिया गया तो उन्होंने कोई शिकायत नहीं करने की बात कह दी।
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अधिकतर शिकायतों के निस्तारण में लूंब के मनीष का मोबाइल नंबर लूंब गांव के रहने वाले किसान मनीष चौहान ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने कई किसानों की शिकायतों का निस्तारण करते हुए उनका मोबाइल नंबर दर्ज कर रखा है। इसलिए पिछले तीन महीने से लगातार लखनऊ से शिकायतों के निस्तारण के संबंध में उनके पास फोन आते हैं। उन्होंने कई बार कृषि विभाग कार्यालय जाकर आपत्ति जताई कि उन्होंने न मशीन खरीदी है और न ही किसी योजना के तहत आवेदन या शिकायत की है। आश्वासन के बावजूद आज तक स्थिति नहीं बदली और अब भी उनके पास लगातार फोन आते हैं।
परिवार वालों के ताने भी झेल रहे किसान
चारा काटने वाली मशीन खरीदने वाले किसानों का कहना है कि सरकारी योजना पर भरोसा कर उन्होंने मशीन खरीदी थी। अनुदान नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ में परिवार वाले भी ताने देते हैं कि सरकारी भरोसे में आकर रुपये फंसा दिए। कई किसानों ने उम्मीद छोड़ दी, लेकिन कुछ को आज भी अपने हक की राशि मिलने का इंतजार है।
ये बोले किसान
11 साल पहले अनुदान के भरोसे चारा काटने वाली मशीन खरीदी थी। अनुदान के रुपये नहीं मिले तो मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन वहां भी मेरा मोबाइल नंबर हटाकर दूसरे किसान का नंबर दर्ज कर शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। उसमें लिखा गया कि इनको अनुदान की सही जानकारी नहीं थी, इसलिए शिकायत कर दी थी, जो निस्तारित हो गई। -हरख्याल, बरवाला।
हमें बताया गया था कि अनुदान की राशि 20 हजार रुपये मिल जाएगी। इसी भरोसे पर मशीन खरीदी, लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। किसानों के हिस्से का पैसा आखिर गया कहां, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी तो भविष्य में किसी के साथ इस तरह नहीं किया जाएगा।
-महेंद्र सिंह, शिकोहपुर
वर्जन
अनुदान वितरण या शिकायतों के निस्तारण में गड़बड़ी हुई है तो यह गंभीर मामला है। रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी कि आखिर किसानों को अनुदान क्यों नहीं मिला। पूरी जानकारी करके ही इसमें आगे कुछ किया जाएगा।
-विभाति चतुर्वेदी, उप निदेशक कृषि