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Baghpat News: भट्ठों की आग में झुलस रही किसानों की उम्मीदें
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। यहां के सबसे बड़े ईंट भट्ठा व्यवसाय का खेती पर असर पड़ने लगा है। भट्ठों की वजह से मिट्टी की जान निकल रही है और फसलों को इसका नुकसान हो रहा है। जहां से भट्ठों के लिए अधिक मिट्टी का उठान हो जाता है, वहां जमीन की पानी सोखने की क्षमता भी कम हो जाती है और ऐसे में फसल की पैदावार पर असर पड़ता है। कृषि विभाग के जांच कराने पर यह खुलासा हुआ है।
जिले में 415 ईंट भट्ठे संचालित हैं और यहां ईंट पथाई के लिए दिसंबर से जुलाई तक खेतों से मिट्टी का उठान किया जाता है। इसका प्रभाव अब फसलों पर पड़ना शुरू हो गया है, क्योंकि मिट्टी का अधिक उठान होने के कारण जमीन की पानी सोखने की क्षमता कम हो रही है। जब फसल में सिंचाई की जाती है तो वहां पानी नहीं सोखने के कारण कई दिनों तक पानी जमा रहता है। ऐसे में निमेटोड (पादप सूत्रकृमि) कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसका खुलासा कृषि विभाग की जांच करने में हुआ।
जब पुरामहादेव निवासी किसान धनपाल ने गेहूं की फसल खराब होने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की तो कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेत में जाकर फसल नष्ट होने की जांच की। खेत में जाकर देखा तो आधी फसल सही खड़ी थी और जहां अधिक मिट्टी का उठान हुआ था वहां गेहूं की फसल में दाना नहीं बन रहा था। फसल में निमेटोड रोग लगा हुआ था। जांच में पता चला कि 15 मार्च को बारिश हुई थी और बारिश का पानी खेत में भर गया था। जमीन पानी को नहीं सोख सकी और वहां 15 से 20 दिन तक पानी भरने के कारण फसल में रोग लग गया। इस कारण फसल नष्ट हुई है। इस तरह अन्य सौ किसानों के यहां जांच की गई तो वहां भी यही समस्या सामने आई।
-14 महीने तक जीवित रह सकता है कीट
जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि निमेटोड (पादप सूत्रकृमि) कीट जलभराव होने के कारण फसल में लगता है। ये कीट फसल की जड़ों से रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं। इससे प्रभावित पौधे भूमि से पोषक तत्व पूरी तरह से नहीं ले पाते। जिससे उनकी बढ़त रुक जाती है और उत्पादकता प्रभावित होती है। बेहद छोटे आकार का यह सूत्रकृमि मिट्टी में 14 महीने तक जीवित रह सकता है। धान के अलावा यह सूत्रकृमि सब्जी की फसलों आदि को प्रभावित करता है।
-फसल बचाने के लिए करानी चाहिए मिट्टी की जांच
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जब किसान खेतों से मिट्टी का उठान कराते हैं तो उनको इसके बाद मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। इससे मिट्टी के पोषक तत्व की जानकारी मिल जाती है और इसके अनुसार ही दवाई का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। जांच में पता चलता है कि जमीन की पानी सोखने की क्षमता कितनी रह गई है। ऐसे में किसानों को डेंचा बुवाई की विधि अपनानी चाहिए और गोबर का अधिक प्रयोग करना चाहिए। इससे जमीन के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। साथ ही खेतों की गहरी जोताई करनी चाहिए ताकि दवाई का असर अधिक नीचे तक जा सके।
जिलेभर में इस तरह की स्थिति
कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति एक गांव की नहीं है, बल्कि जिले में काफी गांवों में ऐसे मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि किसान खेतों से अधिक मात्रा में मिट्टी का उठान कराते हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। मिट्टी के उठान के कारण पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं, जिसका असर पैदावार पर अधिक पड़ता है। इसलिए किसानों को छह ईंच से अधिक मिट्टी का उठान नहीं करवाना चाहिए।
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बागपत। यहां के सबसे बड़े ईंट भट्ठा व्यवसाय का खेती पर असर पड़ने लगा है। भट्ठों की वजह से मिट्टी की जान निकल रही है और फसलों को इसका नुकसान हो रहा है। जहां से भट्ठों के लिए अधिक मिट्टी का उठान हो जाता है, वहां जमीन की पानी सोखने की क्षमता भी कम हो जाती है और ऐसे में फसल की पैदावार पर असर पड़ता है। कृषि विभाग के जांच कराने पर यह खुलासा हुआ है।
जिले में 415 ईंट भट्ठे संचालित हैं और यहां ईंट पथाई के लिए दिसंबर से जुलाई तक खेतों से मिट्टी का उठान किया जाता है। इसका प्रभाव अब फसलों पर पड़ना शुरू हो गया है, क्योंकि मिट्टी का अधिक उठान होने के कारण जमीन की पानी सोखने की क्षमता कम हो रही है। जब फसल में सिंचाई की जाती है तो वहां पानी नहीं सोखने के कारण कई दिनों तक पानी जमा रहता है। ऐसे में निमेटोड (पादप सूत्रकृमि) कीट लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसका खुलासा कृषि विभाग की जांच करने में हुआ।
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जब पुरामहादेव निवासी किसान धनपाल ने गेहूं की फसल खराब होने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की तो कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेत में जाकर फसल नष्ट होने की जांच की। खेत में जाकर देखा तो आधी फसल सही खड़ी थी और जहां अधिक मिट्टी का उठान हुआ था वहां गेहूं की फसल में दाना नहीं बन रहा था। फसल में निमेटोड रोग लगा हुआ था। जांच में पता चला कि 15 मार्च को बारिश हुई थी और बारिश का पानी खेत में भर गया था। जमीन पानी को नहीं सोख सकी और वहां 15 से 20 दिन तक पानी भरने के कारण फसल में रोग लग गया। इस कारण फसल नष्ट हुई है। इस तरह अन्य सौ किसानों के यहां जांच की गई तो वहां भी यही समस्या सामने आई।
-14 महीने तक जीवित रह सकता है कीट
जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि निमेटोड (पादप सूत्रकृमि) कीट जलभराव होने के कारण फसल में लगता है। ये कीट फसल की जड़ों से रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देते हैं। इससे प्रभावित पौधे भूमि से पोषक तत्व पूरी तरह से नहीं ले पाते। जिससे उनकी बढ़त रुक जाती है और उत्पादकता प्रभावित होती है। बेहद छोटे आकार का यह सूत्रकृमि मिट्टी में 14 महीने तक जीवित रह सकता है। धान के अलावा यह सूत्रकृमि सब्जी की फसलों आदि को प्रभावित करता है।
-फसल बचाने के लिए करानी चाहिए मिट्टी की जांच
जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जब किसान खेतों से मिट्टी का उठान कराते हैं तो उनको इसके बाद मिट्टी की जांच करवानी चाहिए। इससे मिट्टी के पोषक तत्व की जानकारी मिल जाती है और इसके अनुसार ही दवाई का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। जांच में पता चलता है कि जमीन की पानी सोखने की क्षमता कितनी रह गई है। ऐसे में किसानों को डेंचा बुवाई की विधि अपनानी चाहिए और गोबर का अधिक प्रयोग करना चाहिए। इससे जमीन के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। साथ ही खेतों की गहरी जोताई करनी चाहिए ताकि दवाई का असर अधिक नीचे तक जा सके।
जिलेभर में इस तरह की स्थिति
कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह स्थिति एक गांव की नहीं है, बल्कि जिले में काफी गांवों में ऐसे मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि किसान खेतों से अधिक मात्रा में मिट्टी का उठान कराते हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है। मिट्टी के उठान के कारण पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं, जिसका असर पैदावार पर अधिक पड़ता है। इसलिए किसानों को छह ईंच से अधिक मिट्टी का उठान नहीं करवाना चाहिए।
