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राहुल ढाका हत्याकांड: मां और भाई बोले- हत्यारों को फांसी होती तो मिलता सुकून, देश सेवा करना चाहता था राहुल
Fri, 07 Aug 2026 12:04 AM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 07 Aug 2026 12:04 AM IST
सार
Baghpat News: सहारनपुर में बागपत निवासी सिपाही राहुल ढाका की मुठभेड़ के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राहुल के हत्यारों महताब और सादर खां को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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राहुल ढाका की फाइल फोटो और उसकी मां, भाई व भतीजा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बागपत के ढिकौली गांव के सिपाही राहुल ढाका के हत्यारों महताब उर्फ काना और सादर खां को सहारनपुर न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 13 साल बाद आया है, जिससे परिवार को कुछ सुकून मिला है। हालांकि परिवार ने हत्यारों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी।
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राहुल की मां हरबीरी और भाई मनोज ढाका ने कहा कि यदि हत्यारों को फांसी मिलती तो उन्हें ज्यादा सुकून मिलता। मनोज ढाका ने बताया कि 5 जून 2013 को सहारनपुर में राहुल की मौत की सूचना मिली थी। इस सदमे से पिता चंद्रपाल बीमार रहने लगे। 5 मार्च 2019 को उनका निधन हो गया। परिवार ने भाई के बाद पिता को भी खो दिया। उन्हें उम्मीद थी कि राहुल के हत्यारों को एक दिन सजा जरूर मिलेगी। बृहस्पतिवार शाम को पुलिस से आजीवन कारावास की सूचना मिली। मां हरबीरी, भाई मनोज ढाका और छोटे भाई राजेश ढाका ने न्यायपालिका के फैसले पर संतुष्टि जताई।
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भाई को मिल चुकी चतुर्थ श्रेणी कर्मी की नौकरी
राहुल की जगह उनके भाई मनोज ढाका को शिक्षा के आधार पर यूपी पुलिस में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी मिल चुकी है। वह इस समय बागपत पुलिस लाइन में कार्यरत हैं। वह कहते हैं कि उनका भाई राहुल भले ही वापस नहीं आ सकता है मगर हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा भी राहुल को श्रद्धांजलि की तरह है।
राहुल की जगह उनके भाई मनोज ढाका को शिक्षा के आधार पर यूपी पुलिस में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी मिल चुकी है। वह इस समय बागपत पुलिस लाइन में कार्यरत हैं। वह कहते हैं कि उनका भाई राहुल भले ही वापस नहीं आ सकता है मगर हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा भी राहुल को श्रद्धांजलि की तरह है।
देश के लिए लड़ने वाले ताऊ से मिली थी राहुल को प्रेरणा
राहुल ढाका के ताऊ राजपाल ढाका भारतीय सेना में थे और उन्होंने वर्ष 1962 व 1971 की लड़ाई देश के लिए लड़ी थी। राहुल के ताऊ के बेटे अनिल ढाका दिल्ली पुलिस में एसआई हैं। राहुल को अपने ताऊ के परिवार से प्रेरणा मिली थी और वह भी देश सेवा करना चाहते थे। इसलिए ही पुलिस या सेना में भर्ती होना चाहते थे। पहले पुलिस में भर्ती हो गए तो वह नौकरी ज्वाइन कर ली। दिल्ली पुलिस के एसआई अनिल ढाका ने राहुल के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए पैरवी की। उन्होंने बताया कि राहुल उनका चचेरा नहीं, बल्कि सगे भाई की तरह था। इसलिए उसके हत्यारों को सजा दिलाने में लगे थे।
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राहुल ढाका के ताऊ राजपाल ढाका भारतीय सेना में थे और उन्होंने वर्ष 1962 व 1971 की लड़ाई देश के लिए लड़ी थी। राहुल के ताऊ के बेटे अनिल ढाका दिल्ली पुलिस में एसआई हैं। राहुल को अपने ताऊ के परिवार से प्रेरणा मिली थी और वह भी देश सेवा करना चाहते थे। इसलिए ही पुलिस या सेना में भर्ती होना चाहते थे। पहले पुलिस में भर्ती हो गए तो वह नौकरी ज्वाइन कर ली। दिल्ली पुलिस के एसआई अनिल ढाका ने राहुल के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए पैरवी की। उन्होंने बताया कि राहुल उनका चचेरा नहीं, बल्कि सगे भाई की तरह था। इसलिए उसके हत्यारों को सजा दिलाने में लगे थे।
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