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Bahraich News: दो सगे भाइयों की उठीं अर्थियां, रो पड़ा गांव
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दो बेटों की मौत के सदमें से बेहोश हुए पिता को होश में लाने का प्रयास करते ग्रामीण।
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मिहींपुरवा। लखीमपुर हादसे में रामवचनपुरवा गांव के दो सगे भाइयों की जान चली गई। इनके शव गांव पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई। घर के दो जवान बेटों की अर्थियां एक साथ उठीं तो पूरा गांव रो पड़ा। मां अपने बेटों के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो जा रही थी, पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव का हर शख्स इस दर्दनाक मंजर को देखकर भीतर तक टूट गया।
मुर्तिहा थाना के ग्राम मझरा के मजरा रामवचनपुरवा निवासी पवन राजभर और सोहन राजभर पिता संतोष राजभर की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा थे। दोनों भाई चंडीगढ़ में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था और छोटे भाई की पढ़ाई चल रही थी। करीब छह महीने बाद दोनों भाई घर लौट रहे थे। परिवार को इंतजार था कि बेटों के आने से घर में फिर रौनक लौटेगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सोमवार सुबह लखीमपुर में हुए हादसे में दोनों की जान चली गई। यह खबर गांव पहुंची तो सभी बिलख पड़े।
ग्रामीणों के मुताबिक संतोष राजभर के तीन बेटों में पवन सबसे बड़े और सोहन मंझले थे। दोनों ने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठा ली थी। पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे थे, लेकिन बेटों के कमाने के बाद परिवार की स्थिति सुधरने लगी थी। मां-बाप ने सपने देखे थे कि बेटे मेहनत कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालेंगे, लेकिन एक पल में सबकुछ उजड़ गया। सोमवार दोपहर जब दोनों भाइयों के शव गांव पहुंचे तो मां अपने बेटों के शव देखकर बेसुध हो गई। पिता संतोष कभी बेटों के चेहरे को देखते तो कभी आसमान की ओर देखकर फूट-फूटकर रो पड़ते। दोनों भाइयों की अर्थियां उठीं तो अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
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मुर्तिहा थाना के ग्राम मझरा के मजरा रामवचनपुरवा निवासी पवन राजभर और सोहन राजभर पिता संतोष राजभर की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा थे। दोनों भाई चंडीगढ़ में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी कमाई से ही घर का चूल्हा जलता था और छोटे भाई की पढ़ाई चल रही थी। करीब छह महीने बाद दोनों भाई घर लौट रहे थे। परिवार को इंतजार था कि बेटों के आने से घर में फिर रौनक लौटेगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सोमवार सुबह लखीमपुर में हुए हादसे में दोनों की जान चली गई। यह खबर गांव पहुंची तो सभी बिलख पड़े।
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ग्रामीणों के मुताबिक संतोष राजभर के तीन बेटों में पवन सबसे बड़े और सोहन मंझले थे। दोनों ने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठा ली थी। पिता मजदूरी कर किसी तरह घर चला रहे थे, लेकिन बेटों के कमाने के बाद परिवार की स्थिति सुधरने लगी थी। मां-बाप ने सपने देखे थे कि बेटे मेहनत कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालेंगे, लेकिन एक पल में सबकुछ उजड़ गया। सोमवार दोपहर जब दोनों भाइयों के शव गांव पहुंचे तो मां अपने बेटों के शव देखकर बेसुध हो गई। पिता संतोष कभी बेटों के चेहरे को देखते तो कभी आसमान की ओर देखकर फूट-फूटकर रो पड़ते। दोनों भाइयों की अर्थियां उठीं तो अंतिम यात्रा में शामिल हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।