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Barabanki News: बाराबंकी की 17 धरोहर...पारिजात से ददौरा का वट वृक्ष तक
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:58 AM IST
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बाराबंकी। कोई किला को तो कोई महल को धरोहर बताता है। कहीं नदी तो कहीं पहाड़ धरोहर है, लेकिन हम आपको बाराबंकी जिले की ऐसी 17 जीवित धरोहरों से परचित करवा रहे हैं। ये धरोहर कुछ और नहीं बल्कि जिले के 17 पेड़ हैं, जो हजारों साल व सदियों से खड़े आस्था, इतिहास और प्रकृति के गवाह बन गए हैं।
इनमें किंतूर क्षेत्र का पांच हजार साल पुराना पारिजात वृक्ष प्रमुख हैं, जबकि जिले के विभिन्न हिस्सों में फैले अन्य 15 पीपल, बरगद, नीम और पाकड़ के वृक्ष केवल हरियाली नहीं अद्भुत विरासत के प्रतीक हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इनका संरक्षण अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। संवाद
पारिजात : रहस्य, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के बरौलिया गांव का पारिजात वृक्ष अपने आप में अनोखा व दुनिया का इकलौता पेड़ है। मान्यता है कि महाभारत काल में अर्जुन इसे स्वर्ग से लाए थे, जबकि कुछ कथाओं में भगवान कृष्ण और सत्यभामा से इसका संबंध जोड़ा जाता है।
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हरिवंश पुराण में इसे कल्पवृक्ष कहा गया है। वनस्पति विज्ञान में इसे ऐडानसोनिया डिजिटाटा प्रजाति से जोड़ा जाता है, लेकिन इसकी विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य वृक्षों से अलग बनाती हैं। करीब 5000 वर्ष पुराना माना जाने वाला यह वृक्ष आज भी खड़ा है।
ददौरा का वट वृक्ष : पेड़ बन गया पूरा जंगल
रामनगर के ददौरा गांव में स्थित वट वृक्ष करीब एक हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसकी जटाएं जमीन में पहुंचकर नए तने का रूप लेती हैं और यह लगातार फैलता जाता है। स्थानीय लोग इसे देव वृक्ष मानते हैं।
...............................
धरोहर का व्यापक दायरा : जिले के 17 प्राचीन वृक्ष
प्रशासन द्वारा चिंहित किए गए 17 प्रमुख वृक्ष व इनकी उम्र
- बरौलिया गांव का पारिजात- 5000 वर्ष
- ददौरा गांव का वटवृक्ष-100 वर्ष
- अमोलीकला गांव का बरगद-100 वर्ष
- सुर्जनपुर मूड़ाभारी का बरगद-100 वर्ष
- टांडा निजाम अली का बरगद-100 वर्ष
- खेरिया गांव का पीपल-100 वर्ष
- अजईमऊ गांव का पीपल- 400 वर्ष
- टांडा गांव का बरगद-400 वर्ष
- मंगूपुर उदईपुर की नीम- 400 वर्ष
- मंगूपुर उदईपुर का बरगद-400 वर्ष
- मोहम्मदपुर गांव का बरगद-100 वर्ष
- टीकारामनधाम का बरगद- 300 वर्ष
- देवा के सिद्धेश्वर महादेव का पीपल-100 वर्ष
- दौड़िहारा गांव का पीपल-100 वर्ष
- अछरीपुरवा गांव की पाकड़-100 वर्ष
- देवा कस्बे का बरगद-100 वर्ष
- बाराबंकी-जैदपुर मार्ग पर पीपल-100 वर्ष
..................................
विशेष निगरानी के साथ इन पेड़ों की सुरक्षा व संरक्षण के प्रयास जारी है। पारिजात वृक्ष में दवाओं का छिड़काव कराया गया है। सभी रेंज अधिकारियों को इन पेड़ों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ
इनमें किंतूर क्षेत्र का पांच हजार साल पुराना पारिजात वृक्ष प्रमुख हैं, जबकि जिले के विभिन्न हिस्सों में फैले अन्य 15 पीपल, बरगद, नीम और पाकड़ के वृक्ष केवल हरियाली नहीं अद्भुत विरासत के प्रतीक हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इनका संरक्षण अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। संवाद
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पारिजात : रहस्य, आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम
सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के बरौलिया गांव का पारिजात वृक्ष अपने आप में अनोखा व दुनिया का इकलौता पेड़ है। मान्यता है कि महाभारत काल में अर्जुन इसे स्वर्ग से लाए थे, जबकि कुछ कथाओं में भगवान कृष्ण और सत्यभामा से इसका संबंध जोड़ा जाता है।
हरिवंश पुराण में इसे कल्पवृक्ष कहा गया है। वनस्पति विज्ञान में इसे ऐडानसोनिया डिजिटाटा प्रजाति से जोड़ा जाता है, लेकिन इसकी विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य वृक्षों से अलग बनाती हैं। करीब 5000 वर्ष पुराना माना जाने वाला यह वृक्ष आज भी खड़ा है।
ददौरा का वट वृक्ष : पेड़ बन गया पूरा जंगल
रामनगर के ददौरा गांव में स्थित वट वृक्ष करीब एक हेक्टेयर में फैला हुआ है। इसकी जटाएं जमीन में पहुंचकर नए तने का रूप लेती हैं और यह लगातार फैलता जाता है। स्थानीय लोग इसे देव वृक्ष मानते हैं।
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धरोहर का व्यापक दायरा : जिले के 17 प्राचीन वृक्ष
प्रशासन द्वारा चिंहित किए गए 17 प्रमुख वृक्ष व इनकी उम्र
- बरौलिया गांव का पारिजात- 5000 वर्ष
- ददौरा गांव का वटवृक्ष-100 वर्ष
- अमोलीकला गांव का बरगद-100 वर्ष
- सुर्जनपुर मूड़ाभारी का बरगद-100 वर्ष
- टांडा निजाम अली का बरगद-100 वर्ष
- खेरिया गांव का पीपल-100 वर्ष
- अजईमऊ गांव का पीपल- 400 वर्ष
- टांडा गांव का बरगद-400 वर्ष
- मंगूपुर उदईपुर की नीम- 400 वर्ष
- मंगूपुर उदईपुर का बरगद-400 वर्ष
- मोहम्मदपुर गांव का बरगद-100 वर्ष
- टीकारामनधाम का बरगद- 300 वर्ष
- देवा के सिद्धेश्वर महादेव का पीपल-100 वर्ष
- दौड़िहारा गांव का पीपल-100 वर्ष
- अछरीपुरवा गांव की पाकड़-100 वर्ष
- देवा कस्बे का बरगद-100 वर्ष
- बाराबंकी-जैदपुर मार्ग पर पीपल-100 वर्ष
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विशेष निगरानी के साथ इन पेड़ों की सुरक्षा व संरक्षण के प्रयास जारी है। पारिजात वृक्ष में दवाओं का छिड़काव कराया गया है। सभी रेंज अधिकारियों को इन पेड़ों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ