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गैस-डीजल संकट : अफवाहों से दूर रहें, जरूरतें सीमित करें
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:38 AM IST
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कंपनीबाग स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल होने आए लोग
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बाराबंकी। वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस को लेकर बीते दिनों में आम जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। कतारों के बीच अफवाहों ने खूब छकाया। ऐसे हालात में लोग क्या करें, आम आदमी के कर्तव्य क्या हैं। विकल्प कौन से हैं। इसे लेकर मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद हुआ।
कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया। लोगों ने कहा कि अफवाहों से दूर रहें, जरूरतों को सीमित करें और सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं। साहित्यकार डॉ. विनयदास ने कहा कि लंबी लाइनें देखकर लगा कि संकट है मगर जब पंपों पर एक एक आदमी 100-100 लीटर तेल खरीदते दिखा तो याद आया कि कुछ दिन पहले नमक समाप्त होने की अफवाह में भी ऐसा ही था। अरे पहले पूरी पड़ताल तो करिए। अधिवक्ता सुनीत अवस्थी ने कहा कि संकट के समय ही उसकी गंभीरता समझ में आती है। इसलिए नागरिकों को हमेशा ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार रहना चाहिए, ताकि अचानक हालात बिगड़ने पर घबराहट न हो।
शिक्षक अमरदीप सिंह बोले कि अचानक मांग बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बना है, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। जनता को वास्तविक स्थिति को समझते हुए संयम रखना चाहिए और अनावश्यक खरीदारी से बचना चाहिए। कवि आशीष आनंद ने कहा कि ऐसे समय में अफवाहें सबसे बड़ा खतरा होती हैं। नागरिकों का कर्तव्य है कि वे अपुष्ट सूचनाओं से दूर रहें और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं। साहित्यकार व शिक्षक प्रदीप महाजन का कहना था कि जरूरतों को सीमित करना ही सबसे कारगर उपाय है। हम शिक्षकों ने अलग-अलग वाहनों की बजाय एक साथ सफर करना शुरू किया, जिससे ईंधन की बचत हुई।
गृहणी सुनीता देवी बोलीं कि रसोई गैस हर घर की जरूरत है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा कई सिलिंडर जमा करने से कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है। सभी को जरूरत के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए। सीमा सिंह ने जोर दिया कि लोगों को घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। संयम और धैर्य से ही ऐसी परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। सोनम वर्मा ने कहा कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार करना चाहिए, ताकि अचानक परेशानी न हो।
किसान नेता विजय यादव ने कहा कि डीजल की किल्लत का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। लेकिन कुछ लोग जरूरत से ज्यादा भंडारण कर लेते हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक जरूरी है। व्यापारी नेता चरनजीत सिंह ने दो टूक कहा कि कोई भी सरकार नहीं चाहती कि जनता परेशान हो, लेकिन संकट के समय नागरिकों की भूमिका भी अहम होती है। संयम और सहयोग से ही हालात को संतुलित रखा जा सकता है।
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कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया। लोगों ने कहा कि अफवाहों से दूर रहें, जरूरतों को सीमित करें और सामूहिक जिम्मेदारी निभाएं। साहित्यकार डॉ. विनयदास ने कहा कि लंबी लाइनें देखकर लगा कि संकट है मगर जब पंपों पर एक एक आदमी 100-100 लीटर तेल खरीदते दिखा तो याद आया कि कुछ दिन पहले नमक समाप्त होने की अफवाह में भी ऐसा ही था। अरे पहले पूरी पड़ताल तो करिए। अधिवक्ता सुनीत अवस्थी ने कहा कि संकट के समय ही उसकी गंभीरता समझ में आती है। इसलिए नागरिकों को हमेशा ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक और व्यावहारिक रूप से तैयार रहना चाहिए, ताकि अचानक हालात बिगड़ने पर घबराहट न हो।
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शिक्षक अमरदीप सिंह बोले कि अचानक मांग बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बना है, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है। जनता को वास्तविक स्थिति को समझते हुए संयम रखना चाहिए और अनावश्यक खरीदारी से बचना चाहिए। कवि आशीष आनंद ने कहा कि ऐसे समय में अफवाहें सबसे बड़ा खतरा होती हैं। नागरिकों का कर्तव्य है कि वे अपुष्ट सूचनाओं से दूर रहें और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं। साहित्यकार व शिक्षक प्रदीप महाजन का कहना था कि जरूरतों को सीमित करना ही सबसे कारगर उपाय है। हम शिक्षकों ने अलग-अलग वाहनों की बजाय एक साथ सफर करना शुरू किया, जिससे ईंधन की बचत हुई।
गृहणी सुनीता देवी बोलीं कि रसोई गैस हर घर की जरूरत है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा कई सिलिंडर जमा करने से कृत्रिम संकट पैदा हो जाता है। सभी को जरूरत के अनुसार ही उपयोग करना चाहिए। सीमा सिंह ने जोर दिया कि लोगों को घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। संयम और धैर्य से ही ऐसी परिस्थितियों का सामना किया जा सकता है। सोनम वर्मा ने कहा कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार करना चाहिए, ताकि अचानक परेशानी न हो।
किसान नेता विजय यादव ने कहा कि डीजल की किल्लत का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। लेकिन कुछ लोग जरूरत से ज्यादा भंडारण कर लेते हैं। इस प्रवृत्ति पर रोक जरूरी है। व्यापारी नेता चरनजीत सिंह ने दो टूक कहा कि कोई भी सरकार नहीं चाहती कि जनता परेशान हो, लेकिन संकट के समय नागरिकों की भूमिका भी अहम होती है। संयम और सहयोग से ही हालात को संतुलित रखा जा सकता है।