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Barabanki News: वन जिला-वन वेटलैंड योजना में शामिल होगी कमरावां झील
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 21 Jan 2026 12:41 AM IST
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बाराबंकी। पर्यावरण प्रेमियों की पसंदीदा और जीव-जंतुओं का बसेरा रही हरख ब्लॉक की कमरावां झील अब राष्ट्रीय और प्रादेशिक स्तर पर जिले की नई पहचान बनने जा रही है। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी वन जिला-वन वेटलैंड योजना के तहत वन विभाग ने इस झील को वेटलैंड (आर्द्रभूमि) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भेजा है।
इस परियोजना की खास बात यह है कि वन विभाग ने झील के भीतर मिट्टी के कृत्रिम टीले बनाए हैं। ये टीले प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के विश्राम तथा उनके प्रजनन के लिए बेहद सुरक्षित और सहायक साबित हो रहे हैं।
लगभग 29.37 हेक्टेयर में फैली यह झील लखनऊ से मात्र 35 किलोमीटर और बाराबंकी मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। कमरावां, पाटमऊ, रसूलपुर और मुहम्मदाबाद गांवों से घिरी यह झील अपनी प्राकृतिक जैव विविधता के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। योजना के तहत कमरावां वेटलैंड को औपचारिक दर्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय लोगों की सहमति और पारदर्शिता के साथ ही इस धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित और विकसित किया जा सकता है।
आस्ट्रेलिया, डेनमार्क व तिब्बत से आ रहे मेहमान
पक्षियों के स्वर्ग और संरक्षण की नई उम्मीद के रूप में उभर रही कमरावां झील इन दिनों विदेशी मेहमानों की चहचहाहट से जीवंत हो उठी है। इस वेटलैंड में सुरक्षित ठिकाना पाने के लिए ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, साइबेरिया (रूस), जापान और तिब्बत जैसे सुदूर देशों से हजारों पक्षी पहुंचे हैं। झील के शांत वातावरण में इन दिनों नॉर्दर्न पिनटेल, गडवाल, कॉमन टील, मलार्ड और नकटा (नॉब-बिल डक) जैसे विदेशी प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा है। इनके साथ ही भारतीय मूल के सारस, बगुले और काली चील जैसे स्थानीय पक्षी भी यहां बड़ी संख्या में देखे जा रहे हैं।
(संवाद)
वर्जन
झील से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कमरावां झील के नियोजित विकास से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि जिले में ईको-टूरिज्म की नई राहें भी खुलेंगी। इस झील को वेटलैंड के रूप में विकसित किए जाने से बाराबंकी की पहचान एक प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होगी।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ
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इस परियोजना की खास बात यह है कि वन विभाग ने झील के भीतर मिट्टी के कृत्रिम टीले बनाए हैं। ये टीले प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के विश्राम तथा उनके प्रजनन के लिए बेहद सुरक्षित और सहायक साबित हो रहे हैं।
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लगभग 29.37 हेक्टेयर में फैली यह झील लखनऊ से मात्र 35 किलोमीटर और बाराबंकी मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। कमरावां, पाटमऊ, रसूलपुर और मुहम्मदाबाद गांवों से घिरी यह झील अपनी प्राकृतिक जैव विविधता के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। योजना के तहत कमरावां वेटलैंड को औपचारिक दर्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय लोगों की सहमति और पारदर्शिता के साथ ही इस धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित और विकसित किया जा सकता है।
आस्ट्रेलिया, डेनमार्क व तिब्बत से आ रहे मेहमान
पक्षियों के स्वर्ग और संरक्षण की नई उम्मीद के रूप में उभर रही कमरावां झील इन दिनों विदेशी मेहमानों की चहचहाहट से जीवंत हो उठी है। इस वेटलैंड में सुरक्षित ठिकाना पाने के लिए ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, साइबेरिया (रूस), जापान और तिब्बत जैसे सुदूर देशों से हजारों पक्षी पहुंचे हैं। झील के शांत वातावरण में इन दिनों नॉर्दर्न पिनटेल, गडवाल, कॉमन टील, मलार्ड और नकटा (नॉब-बिल डक) जैसे विदेशी प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा है। इनके साथ ही भारतीय मूल के सारस, बगुले और काली चील जैसे स्थानीय पक्षी भी यहां बड़ी संख्या में देखे जा रहे हैं।
(संवाद)
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झील से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कमरावां झील के नियोजित विकास से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि जिले में ईको-टूरिज्म की नई राहें भी खुलेंगी। इस झील को वेटलैंड के रूप में विकसित किए जाने से बाराबंकी की पहचान एक प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होगी।
- आकाशदीप बधावन, डीएफओ
