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Barabanki News: डीआईओएस को हटाने और जेडी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:57 AM IST
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बाराबंकी। उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने बाराबंकी के सिटी इंटरमीडिएट कॉलेज में एक शिक्षक की पुनः जाॅइनिंग के मामले में गंभीर अनियमितताएं पाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। वहीं निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल डीआईओएस का तबादला और तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक अयोध्या मंडल के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने मामले में अनुपालन रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश कॉलेज की प्रबंध समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।
अपने आदेश में कोर्ट ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण में हो रही लापरवाही पर भी चिंता जताई और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी आदेश ई मेल व व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जाएं, ताकि विवाद की स्थिति न बने।
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया कि संबंधित शिक्षक अभय कुमार को बिना प्रबंध समिति की अनुमति के दोबारा कार्यभार ग्रहण कराया गया, जो विधि विरुद्ध है। आदेश के अनुसार, अभय कुमार वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे, लेकिन उन्होंने जून 2024 में छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति ग्रहण कर ली थी।
इसके बाद वापस आने पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार आलोक सिंह ने जाॅइंनिग पर आपत्ति की। इसके बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रबंध समिति को प्रभावहीन कर संयुक्त शिक्षा निदेशक से मिल शिक्षक की जाॅइनिंग करा दी। इस प्रक्रिया में रिकाॅर्ड में हेराफेरी की गई। वहीं अदालत में प्रस्तुत किया गया हलफनामा भी झूठा साबित हुआ।
इस पर राजीव सिंह की एकल पीठ ने डीजी एसटीएफ को मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं शिक्षक को अवैध रूप से दिए गए वेतन की वसूली के निर्देश भी दिए हैं। न्यायालय ने मामले में बाराबंकी के जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी त्रिपाठी, कॉलेज के प्रधानाचार्य और संबंधित शिक्षक की भूमिका पर संदेह जताते हुए जांच कराने के भी निर्देश दिए।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी पाया कि डीआईओएस ने रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रामक जानकारी देने का प्रयास किया। प्रमुख सचिव को तत्काल डीआईओएस को हटाने का आदेश दिया है।
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न्यायालय ने मामले में अनुपालन रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश कॉलेज की प्रबंध समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।
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अपने आदेश में कोर्ट ने शिक्षा विभाग में आदेशों के संप्रेषण में हो रही लापरवाही पर भी चिंता जताई और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि भविष्य में सभी आदेश ई मेल व व्हाट्सएप के माध्यम से भी भेजे जाएं, ताकि विवाद की स्थिति न बने।
न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया कि संबंधित शिक्षक अभय कुमार को बिना प्रबंध समिति की अनुमति के दोबारा कार्यभार ग्रहण कराया गया, जो विधि विरुद्ध है। आदेश के अनुसार, अभय कुमार वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे, लेकिन उन्होंने जून 2024 में छत्तीसगढ़ के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति ग्रहण कर ली थी।
इसके बाद वापस आने पर प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार आलोक सिंह ने जाॅइंनिग पर आपत्ति की। इसके बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रबंध समिति को प्रभावहीन कर संयुक्त शिक्षा निदेशक से मिल शिक्षक की जाॅइनिंग करा दी। इस प्रक्रिया में रिकाॅर्ड में हेराफेरी की गई। वहीं अदालत में प्रस्तुत किया गया हलफनामा भी झूठा साबित हुआ।
इस पर राजीव सिंह की एकल पीठ ने डीजी एसटीएफ को मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं शिक्षक को अवैध रूप से दिए गए वेतन की वसूली के निर्देश भी दिए हैं। न्यायालय ने मामले में बाराबंकी के जिला विद्यालय निरीक्षक ओपी त्रिपाठी, कॉलेज के प्रधानाचार्य और संबंधित शिक्षक की भूमिका पर संदेह जताते हुए जांच कराने के भी निर्देश दिए।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी पाया कि डीआईओएस ने रिकॉर्ड में हेराफेरी और भ्रामक जानकारी देने का प्रयास किया। प्रमुख सचिव को तत्काल डीआईओएस को हटाने का आदेश दिया है।

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