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Barabanki News: बेटों ने मुंह फेरा, मिलने आती हैं सिर्फ बेटियां
Thu, 20 Aug 2026 11:51 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 20 Aug 2026 11:51 PM IST
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बाराबंकी। विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की सुबह भी कुछ आंखों में सिर्फ अंधेरा पसरा दिखा। यह अंधेरा ढलती उम्र का नहीं बल्कि कलेजे के टुकड़ों के दिए गए नासूर बन चुके जख्मों का है। सफेदाबाद के समीप स्थित भूहेरा का मातृ-पितृ सदन कहने को तो वृद्धाश्रम है लेकिन सच में यह टूटे हुए अरमानों, कुचली हुई उम्मीदों और छले गए सपनों का वो खामोश स्थान है, जहां बेबस बुढ़ापा हर पल सिसक-सिसककर दम तोड़ता है।
यहां सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि असम, दिल्ली, देहरादून और रायबरेली से भटककर पहुंचे एक-एक तथा लखनऊ के 15 बदनसीब बुजुर्ग अपनी बेबसी की दास्तान सीने में दफन किए रहने को मजबूर हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं, जिनके बेटों ने मुंह फेर लिया है। उनसे मिलने अब सिर्फ बेटियां ही आती हैं।
यहां 125 लाचार बुजुर्ग अपनी ढलती सांसें गिन रहे हैं, जिनमें आठ ऐसे अभागे दंपती भी शामिल हैं, जिन्हें जिंदगी की आखिरी दहलीज पर बेघर होकर यहां पनाह लेनी पड़ी। यहां अपनों के दिए धोखे का दर्द भुलाए नहीं भूलता है। यह बुजुर्ग अब अपनी जिंदगी नहीं बल्कि सिर्फ मौत की भीख मांगते हैं। इस सदन की देखभाल के लिए 16 लोगों का स्टाफ तैनात है, जिनमें चार मुख्य सेवादारों में तीन महिला सेवादार हैं। आश्रम के प्रबंधक कमलेश रावत भारी मन से कहते है कि यहां का सबसे कड़वा सच यह है कि संतानों की बेरुखी के कारण मां-बाप को बेसहारा छोड़ दिया जाता है। हम सेवा तो पूरी करते हैं लेकिन अपनों का दिया जख्म हम नहीं भर पाते। (संवाद)
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दौलत खत्म हुई तो बेटा बन गया पराया
70 साल की महिला के पति एक सीमेंट कंपनी में एमडी थे। सब कुछ था, बस औलाद नहीं थी। बड़े प्यार से एक बेटे को गोद लिया, पढ़ाया-लिखाया और काबिल बनाया। लेकिन जैसे ही पास मौजूद संपत्ति व दौलत खत्म हुई , गोद लिए बेटे ने उसी मां को बेघर कर दिया, जिसने उसे अनाथ के दंश से छुटकारा दिलाकर पाला था।
बुझ गया घर का चिराग तो बहू ने छीना सहारा
करीब 75 वर्षीय महिला की कहानी भी दर्द देने वाली है। बुढ़ापे की लाठी उनका इकलौता बेटा था, लेकिन उसकी असमय मौत हो गई। बेटे का साया उठते ही बहू के तेवर बदल गए। जिस घर को उन्होंने तिनका-तिनका जोड़कर बनाया था, उसी घर की चौखट से एक दिन बहू ने उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया।
बहू- बेटा नोएडा में इंजीनियर फिर भी बेबस
80 वर्षीय एक वृद्ध जिंदगी के अंतिम दिन दूसरे लाचार बुजुर्गों को देख कर काट रहे हैं। जीवन की कमाई बेटे की महंगी पढ़ाई पर खर्च कर इंजीनियर बनाया। बेटे ने एक इंजीनियर युवती से शादी कर ली। दोनों ने नोएडा में अपना आशियाना बना लिया। अब दोनों ने जिम्मेदारी से ऐसा मुंह मोड़ा कि कभी मिलने भी नहीं आते।
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यहां सिर्फ स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि असम, दिल्ली, देहरादून और रायबरेली से भटककर पहुंचे एक-एक तथा लखनऊ के 15 बदनसीब बुजुर्ग अपनी बेबसी की दास्तान सीने में दफन किए रहने को मजबूर हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं, जिनके बेटों ने मुंह फेर लिया है। उनसे मिलने अब सिर्फ बेटियां ही आती हैं।
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यहां 125 लाचार बुजुर्ग अपनी ढलती सांसें गिन रहे हैं, जिनमें आठ ऐसे अभागे दंपती भी शामिल हैं, जिन्हें जिंदगी की आखिरी दहलीज पर बेघर होकर यहां पनाह लेनी पड़ी। यहां अपनों के दिए धोखे का दर्द भुलाए नहीं भूलता है। यह बुजुर्ग अब अपनी जिंदगी नहीं बल्कि सिर्फ मौत की भीख मांगते हैं। इस सदन की देखभाल के लिए 16 लोगों का स्टाफ तैनात है, जिनमें चार मुख्य सेवादारों में तीन महिला सेवादार हैं। आश्रम के प्रबंधक कमलेश रावत भारी मन से कहते है कि यहां का सबसे कड़वा सच यह है कि संतानों की बेरुखी के कारण मां-बाप को बेसहारा छोड़ दिया जाता है। हम सेवा तो पूरी करते हैं लेकिन अपनों का दिया जख्म हम नहीं भर पाते। (संवाद)
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दौलत खत्म हुई तो बेटा बन गया पराया
70 साल की महिला के पति एक सीमेंट कंपनी में एमडी थे। सब कुछ था, बस औलाद नहीं थी। बड़े प्यार से एक बेटे को गोद लिया, पढ़ाया-लिखाया और काबिल बनाया। लेकिन जैसे ही पास मौजूद संपत्ति व दौलत खत्म हुई , गोद लिए बेटे ने उसी मां को बेघर कर दिया, जिसने उसे अनाथ के दंश से छुटकारा दिलाकर पाला था।
बुझ गया घर का चिराग तो बहू ने छीना सहारा
करीब 75 वर्षीय महिला की कहानी भी दर्द देने वाली है। बुढ़ापे की लाठी उनका इकलौता बेटा था, लेकिन उसकी असमय मौत हो गई। बेटे का साया उठते ही बहू के तेवर बदल गए। जिस घर को उन्होंने तिनका-तिनका जोड़कर बनाया था, उसी घर की चौखट से एक दिन बहू ने उन्हें धक्के देकर बाहर निकाल दिया।
बहू- बेटा नोएडा में इंजीनियर फिर भी बेबस
80 वर्षीय एक वृद्ध जिंदगी के अंतिम दिन दूसरे लाचार बुजुर्गों को देख कर काट रहे हैं। जीवन की कमाई बेटे की महंगी पढ़ाई पर खर्च कर इंजीनियर बनाया। बेटे ने एक इंजीनियर युवती से शादी कर ली। दोनों ने नोएडा में अपना आशियाना बना लिया। अब दोनों ने जिम्मेदारी से ऐसा मुंह मोड़ा कि कभी मिलने भी नहीं आते।