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Barabanki News: तापमान 42 डिग्री, लोग हुए बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 19 Apr 2026 01:38 AM IST
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बाराबंकी। जिले में सूर्य देव के तीखे तेवर अब स्कूली बच्चों की सेहत पर भारी पड़ने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से तापमान में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी और चिलचिलाती धूप ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। सबसे बुरा हाल स्कूली नौनिहालों का है, जिन्हें इस झुलसा देने वाली गर्मी में दोपहर के समय घर लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिले का पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जिससे सड़कों पर लू के थपेड़े चल रहे हैं।
जिले के लगभग 2,618 परिषदीय विद्यालय और 1000 से अधिक निजी स्कूल सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक संचालित हो रहे हैं। सुबह के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहने के कारण बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन दोपहर होते-होते क्लासरूम भी तपने लगते हैं।
दोपहर दो बजे जब छुट्टी की घंटी बजती है, तो बाहर माैसम की तपिश देख बच्चे सिहर जाते हैं। बच्चे भीषण तपिश और पसीने से लथपथ होकर बाहर निकलते हैं। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए कोई अपने सिर को स्कूल बैग से ढकता नजर आता है, तो कोई रुमाल और दुपट्टे का सहारा ले रहा है।
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स्कूल गेट पर बच्चों का इंतजार कर रहे अभिभावकों के चेहरों पर भी चिंता और नाराजगी साफ देखी जा सकती है। कई अभिभावक छतरियों और ठंडे पानी की बोतलों के साथ अपने बच्चों को लेने पहुंच रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब प्रदेश के अन्य कई जिलों में प्रशासन ने बढ़ते पारे को देखते हुए स्कूलों का समय सुबह 7:30 से दोपहर 12:00 या 12:30 बजे तक कर दिया है, तो बाराबंकी प्रशासन इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा। अभिभावकों ने मांग की है कि बच्चों को हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए तत्काल समय में बदलाव किया जाए।
जिले के लगभग 2,618 परिषदीय विद्यालय और 1000 से अधिक निजी स्कूल सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक संचालित हो रहे हैं। सुबह के समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहने के कारण बच्चे उत्साह के साथ स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन दोपहर होते-होते क्लासरूम भी तपने लगते हैं।
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दोपहर दो बजे जब छुट्टी की घंटी बजती है, तो बाहर माैसम की तपिश देख बच्चे सिहर जाते हैं। बच्चे भीषण तपिश और पसीने से लथपथ होकर बाहर निकलते हैं। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए कोई अपने सिर को स्कूल बैग से ढकता नजर आता है, तो कोई रुमाल और दुपट्टे का सहारा ले रहा है।
स्कूल गेट पर बच्चों का इंतजार कर रहे अभिभावकों के चेहरों पर भी चिंता और नाराजगी साफ देखी जा सकती है। कई अभिभावक छतरियों और ठंडे पानी की बोतलों के साथ अपने बच्चों को लेने पहुंच रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब प्रदेश के अन्य कई जिलों में प्रशासन ने बढ़ते पारे को देखते हुए स्कूलों का समय सुबह 7:30 से दोपहर 12:00 या 12:30 बजे तक कर दिया है, तो बाराबंकी प्रशासन इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहा। अभिभावकों ने मांग की है कि बच्चों को हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए तत्काल समय में बदलाव किया जाए।