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गजब : धड़कन और पल्स थमने के बाद भी बच्चे को किया रेफर
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रायबरेली। बछरावां सीएचसी में शुक्रवार को आठ साल के बच्चे को मृत घोषित न कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रेफर करते समय बच्चे की पल्स और धड़कन थम चुकी थी। इसकी पुष्टि 108 एंबुलेंस इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (ईएमटी) की रिपोर्ट से हुई है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। यही नहीं सीएचसी में ईसीजी जांच के नाम पर 400 रुपये की वसूली भी की गई। यदि सीएचसी में ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया होता तो परिवार के लोगों को 70 किलोमीटर दूरी फालतू में तय न करनी पड़ती।
लखनऊ जिले के मोहनलालगंज के दौतबरखेड़ा निवासी अबी (8) पुत्र अरविंद को किसी जहरीले जंतु ने बृहस्पतिवार की रात काट लिया। परजिनों ने झाड़फूंक कराने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार नहीं आया। बच्चे को अचेत अवस्था में बछरावां सीएचसी लाया गया। परिवार के लोगों का कहना है कि मोहनलालगंज से लाते समय रास्ते में ही बच्चे की सांस प्रभावित हो गई थी।
वहीं बछरावां सीएचसी में तैनात चिकित्सक ने बच्चे की ईसीजी कराने के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 108 एंबुलेंस के ईएमटी की रिपोर्ट को सच माना जाए तो बछरावां में ही बच्चे की पल्स और धड़कन थम गई थी। इसके बाद भी बच्चे के परिजनों को 35 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल भेज दिया गया। बच्चे के पिता अरविंद व रिश्तेदार अमरनाथ ने बताया कि बछरावां सीएचसी में ईसीजी कराने के लिए 400 रुपये लिए गए। यह जांच करने के बाद जिला अस्पताल भेज दिया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी के ईएमओ डॉ. आरएस पटेल ने बताया कि बछरावां से आठ साल के बच्चे को मृत हालत में लाया गया। उसकी पल्स और धड़कन नहीं चल रही थी। बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
उधर, बछरावां सीएचसी के चिकित्सक डॉ. अभय चतुर्वेदी का कहना है कि मृत्यु घोषित करने के लिए जांच संबंधी पर्याप्त बंदोबस्त न होने के कारण बच्चे को रेफर किया गया। इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचते ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। यही नहीं सीएचसी में ईसीजी जांच के नाम पर 400 रुपये की वसूली भी की गई। यदि सीएचसी में ही बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया होता तो परिवार के लोगों को 70 किलोमीटर दूरी फालतू में तय न करनी पड़ती।
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लखनऊ जिले के मोहनलालगंज के दौतबरखेड़ा निवासी अबी (8) पुत्र अरविंद को किसी जहरीले जंतु ने बृहस्पतिवार की रात काट लिया। परजिनों ने झाड़फूंक कराने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे की हालत में सुधार नहीं आया। बच्चे को अचेत अवस्था में बछरावां सीएचसी लाया गया। परिवार के लोगों का कहना है कि मोहनलालगंज से लाते समय रास्ते में ही बच्चे की सांस प्रभावित हो गई थी।
वहीं बछरावां सीएचसी में तैनात चिकित्सक ने बच्चे की ईसीजी कराने के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 108 एंबुलेंस के ईएमटी की रिपोर्ट को सच माना जाए तो बछरावां में ही बच्चे की पल्स और धड़कन थम गई थी। इसके बाद भी बच्चे के परिजनों को 35 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल भेज दिया गया। बच्चे के पिता अरविंद व रिश्तेदार अमरनाथ ने बताया कि बछरावां सीएचसी में ईसीजी कराने के लिए 400 रुपये लिए गए। यह जांच करने के बाद जिला अस्पताल भेज दिया।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी के ईएमओ डॉ. आरएस पटेल ने बताया कि बछरावां से आठ साल के बच्चे को मृत हालत में लाया गया। उसकी पल्स और धड़कन नहीं चल रही थी। बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।
उधर, बछरावां सीएचसी के चिकित्सक डॉ. अभय चतुर्वेदी का कहना है कि मृत्यु घोषित करने के लिए जांच संबंधी पर्याप्त बंदोबस्त न होने के कारण बच्चे को रेफर किया गया। इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।
