रुहेलखंड में भाजपा की किलेबंदी: बूथ-यूथ और चौपाल पर फोकस, नई रणनीति से सियासी समीकरण साधने की कवायद
यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सियासी रणनीति तेज की है। रुहेलखंड में सियासी समीकरण साधने के लिए बूथ, यूथ और चौपाल के चुनाव चक्रव्यूह से भाजपा अपनी किलाबंदी करेगी।
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उत्तर प्रदेश की सत्ता की कुंजी माने जाने वाले रुहेलखंड से भाजपा ने अपने सबसे अहम सियासी अभियान की शुरुआत की है। ब्रज और पश्चिमी यूपी को जोड़ने वाले रणनीतिक केंद्र बरेली से भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अगुवाई में मंगलवार को निकली पदयात्रा सीधे तौर पर विपक्ष के दोहरे दबाव को साधने की कवायद है।
भाजपा, पीडीए के असर से उपजी चुनौतियों की काट तलाशने के साथ ही सपा-कांग्रेस के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर खड़े किए जा रहे सवालों की धार कुंद करने में जुटी है। यही कारण है कि नड्डा के साथ प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के सबसे बड़े चेहरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी रुहेलखंड की सियासत में सक्रिय किया गया है। जयंत चौधरी को आगे कर पश्चिमी यूपी में जाट वोट साधने की भी कवायद है।
मिशन 2027 की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी भाजपा इस शक्ति प्रदर्शन के समानांतर प्रदेश के 1,918 मंडलों में बूथ स्तर पर सीधी संवाद टोलियां भी तैनात कर रही है। नेताओं के रात्रि प्रवास और सामाजिक चौपालों का जो माइक्रो प्लान लागू किया गया है, उसका सीधा मकसद जमीनी दरारों को पाटना और विपक्ष के मतदाता सूची से जुड़े नैरेटिव को बेअसर करना है। पदयात्रा के जरिये कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के बाद बरेली सहित इस पूरे इलाके में बूथ, यूथ और चौपाल के चक्रव्यूह से भाजपा अपनी किलाबंदी करेगी।
दरअसल, रुहेलखंड इलाके में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने, वोट बैंक को साधने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जमीन मजबूत करने के लिए भाजपा आलाकमान ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को सक्रिय किया है। 2019 के आम चुनावों में भाजपा आलाकमान ने जेपी नड्डा को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा था। उस समय सपा-बसपा का बहुचर्चित महागठबंधन मैदान में था, जिसे यूपी में भाजपा के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा था।
नड्डा की सूक्ष्म सांगठनिक रणनीति के दम पर ही भाजपा ने सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद बरेली, आंवला, पीलीभीत और शाहजहांपुर जैसी सीटों पर एकतरफा और बड़ी जीत दर्ज की हालांकि, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली मंडल में पांच सीटों पर सपा ने जीत हासिल कर भाजपा के माथे पर बल ला दिया था। दो वर्ष बाद ही 2024 के लोकसभा चुनाव में आंवला लोकसभा सीट पर भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप को सपा उम्मीदवार नीरज मौर्य के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं, बदायूं सीट भी सपा के खाते में चली गई।
बरेली सीट पर 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री व वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने 1.67 लाख से अधिक वोटों से प्रचंड जीत दर्ज की थी। 2024 में भाजपा उम्मीदवार छत्रपाल सिंह गंगवार की जीत का अंतर महज 34,804 वोट रह गया।
पुराने अनुभवों को देखते हुए भाजपा ने कुर्मी लोध बहुल इस इलाके में जनाधार को थामने के लिए बूथ स्तर तक सीधा संवाद साधने का माइक्रो-प्लान लागू किया है। पदयात्राओं के अलावा पार्टी मंडलों में 25-25 सक्रिय कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर हर बूथ पर सीधा संवाद स्थापित करेगी।
वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों को जिलों में रात्रि-प्रवास करने और स्थानीय कैडर से सीधा संपर्क साधने की कवायद शुरू करा दी गई है। लाभार्थी संपर्क अभियान, किसान चौपाल और विभिन्न सामाजिक वर्गों (युवा, महिला, छोटे कारोबारी) के साथ सामुदायिक आयोजनों के माध्यम से भाजपा अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटेगी।
बरेली कॉलेज के राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने बताया कि जातीय बिखराव को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं को सक्रिय होना होगा। यह बात पार्टी आलाकमान भी समझ रहा है। यही कारण है कि समय-समय पर पदवात्रा, बूथ संवाद, रात्रि प्रवास जैसे कार्यक्रमों के जरिये सीधे संवाद पर जोर दिया जा रहा है। सफलता इस बात से तय होगी कि ये चौपालें केवल औपचारिक बैठक बनकर रह जाती हैं या सच में वोट में बदलती हैं।
भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्विजय शाक्य ने बताया कि विपक्ष का चक्रव्यूह कागजों पर है, हमारा बूथ पर। भाजपा का कार्यकर्ता एसी कमरों में नहीं, गांव की चौपाल पर बैठकर योजना बनाता है। 2024 में आंवला और बदायूं में जो कमी रह गई, उसे हम बूथ स्तर पर पाटेंगे। विपक्ष के पास न नीति है, न नियत। मतदाता सूची पर सवाल उठाकर वह लोकतंत्र पर ही प्रश्नचिह्न लगाते हैं।