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Bareilly News: शिक्षा का खर्च बढ़ा रहा चिंता, कम हो तो बने बात
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बरेली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव आए। अभिभावक प्ले स्कूल या बाल वाटिका से लेकर 12वीं तक की शिक्षा पर आने वाले भारी भरकम खर्च को कम करने की मांग कर रहे हैं। सीबीएसई की ओर से एआई, डिजिटल लर्निंग, शिक्षकों की ट्रेनिंग और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अलग बजट होना चाहिए। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों की मांग है कि एजुकेशन लोन पर ब्याज दरें कम हों। बेसिक स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। शिक्षा के क्षेत्र में लोग कई बदलावों की उम्मीद लगाए बैठे हैं। संवाद
डिजिटल लर्निंग के लिए अलग बजट की मांग
डिजिटल व एआई लर्निंग के लिए सरकार को अलग बजट निर्धारित करना चाहिए। अब तक सीबीएसई की ओर से स्किल डेवलपमेंट कोर्स करिकुलम में डालकर छोड़ दिया गया है। इस पर निवेश होना चाहिए। जो अभिभावक दो बच्चों को फीस भरते हैं, उनको राहत मिलनी चाहिए। - पारुष अरोड़ा, निदेशक, पद्मावती अकादमी
कैशलेस इलाज की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक धरातल पर कुछ नहीं हुआ। आगामी बजट में सरकार को इसे प्रमुखता से लागू करना चाहिए। दिल्ली और लखनऊ के बीच स्थित बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करना चाहिए। - प्रो. वंदना शर्मा, बरेली कॉलेज
मध्यम वर्ग के लिए शिक्षा महंगी होती जा रही। सीबीएसई बच्चों की फीस को लेकर हालातों को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। इसके लिए एक जिला स्तरीय समिति भी बनी, लेकिन ये भी नाकाम है। सीबीएसई व आईसीएसई को किताबों की कीमत व फीस को नियंत्रित करना चाहिए। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष, जिला अभिभावक संघ
उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सबसे बड़ी चुनौती मोटी फीस है। इसके लिए उच्च दरों पर लोन मिलता है। इसका ब्याज शिक्षा पूरी होने के बाद लगना चाहिए, लेकिन ये कोर्स के दौरान ही शुरू हो जाता है। इसलिए सरकार से यही मांग है कि एजुकेशन लोन व इंटरनेट की दरें सस्ती की जाएं। - आकाश, बीटेक छात्र
परिषदीय विद्यालयों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। विद्यालय रखा कीमती सामान व किताबें चाेरी होने का डर रहता है। ऐसे में एक चौकीदार होना चाहिए, जिसके लिए केंद्र व राज्य दोनों सरकारों को विचार करना चाहिए। एसआईआर जैसे कार्यों के लिए शिक्षकों के बजाय संविदा कर्मचारी लगाने चाहिए। - नरेश गंगवार, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
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डिजिटल व एआई लर्निंग के लिए सरकार को अलग बजट निर्धारित करना चाहिए। अब तक सीबीएसई की ओर से स्किल डेवलपमेंट कोर्स करिकुलम में डालकर छोड़ दिया गया है। इस पर निवेश होना चाहिए। जो अभिभावक दो बच्चों को फीस भरते हैं, उनको राहत मिलनी चाहिए। - पारुष अरोड़ा, निदेशक, पद्मावती अकादमी
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कैशलेस इलाज की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक धरातल पर कुछ नहीं हुआ। आगामी बजट में सरकार को इसे प्रमुखता से लागू करना चाहिए। दिल्ली और लखनऊ के बीच स्थित बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करना चाहिए। - प्रो. वंदना शर्मा, बरेली कॉलेज
मध्यम वर्ग के लिए शिक्षा महंगी होती जा रही। सीबीएसई बच्चों की फीस को लेकर हालातों को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। इसके लिए एक जिला स्तरीय समिति भी बनी, लेकिन ये भी नाकाम है। सीबीएसई व आईसीएसई को किताबों की कीमत व फीस को नियंत्रित करना चाहिए। - अंकुर सक्सेना, अध्यक्ष, जिला अभिभावक संघ
उच्च शिक्षा ग्रहण करने में सबसे बड़ी चुनौती मोटी फीस है। इसके लिए उच्च दरों पर लोन मिलता है। इसका ब्याज शिक्षा पूरी होने के बाद लगना चाहिए, लेकिन ये कोर्स के दौरान ही शुरू हो जाता है। इसलिए सरकार से यही मांग है कि एजुकेशन लोन व इंटरनेट की दरें सस्ती की जाएं। - आकाश, बीटेक छात्र
परिषदीय विद्यालयों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा है। विद्यालय रखा कीमती सामान व किताबें चाेरी होने का डर रहता है। ऐसे में एक चौकीदार होना चाहिए, जिसके लिए केंद्र व राज्य दोनों सरकारों को विचार करना चाहिए। एसआईआर जैसे कार्यों के लिए शिक्षकों के बजाय संविदा कर्मचारी लगाने चाहिए। - नरेश गंगवार, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
