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Basti News: मां शांता के दर्शन के लिए लगी रही कतार
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श्रृंगीनारी मंदिर में श्रद्धालुओं ने माथा टेका संवाद
परशुरामपुर। क्षेत्र के शृंगीनारी स्थित मां शांता देवी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह पांच बजे से ही आसपास के गांवों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। मां को फूल-माला, नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता रहा।
मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर को फूल-मालाओं से सजाया गया था। भक्तों ने मंदिर परिसर में मौजूद पुरोहितों से दुर्गा सप्तशती का पाठ कराया। कई श्रद्धालुओं ने सिद्ध-संपुट मंत्रों के जप और अनुष्ठान का संकल्प भी लिया। मंदिर के पुजारी बाबा राजू दास ने बताया कि मां शांता देवी के प्रति सच्ची श्रद्धा से पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
शृंगीनारी मंदिर का संबंध रामायणकालीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अयोध्या के राजा दशरथ ने कुलगुरु वशिष्ठ की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराने के लिए शृंगी ऋषि को आमंत्रित किया था। ऋषि ने मखौड़ा धाम में यज्ञ कराया। फलस्वरूप राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। मान्यता के अनुसार, यज्ञ के बाद शृंगी ऋषि अपनी पत्नी शांता देवी के साथ जिस स्थान पर ठहरे और साधना की, वह स्थान कालांतर में शृंगीनारी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वर्तमान में इसी स्थल पर मां शांता देवी का मंदिर स्थित है, जहां श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।स
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मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर को फूल-मालाओं से सजाया गया था। भक्तों ने मंदिर परिसर में मौजूद पुरोहितों से दुर्गा सप्तशती का पाठ कराया। कई श्रद्धालुओं ने सिद्ध-संपुट मंत्रों के जप और अनुष्ठान का संकल्प भी लिया। मंदिर के पुजारी बाबा राजू दास ने बताया कि मां शांता देवी के प्रति सच्ची श्रद्धा से पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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शृंगीनारी मंदिर का संबंध रामायणकालीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अयोध्या के राजा दशरथ ने कुलगुरु वशिष्ठ की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराने के लिए शृंगी ऋषि को आमंत्रित किया था। ऋषि ने मखौड़ा धाम में यज्ञ कराया। फलस्वरूप राजा दशरथ को राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के रूप में चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। मान्यता के अनुसार, यज्ञ के बाद शृंगी ऋषि अपनी पत्नी शांता देवी के साथ जिस स्थान पर ठहरे और साधना की, वह स्थान कालांतर में शृंगीनारी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वर्तमान में इसी स्थल पर मां शांता देवी का मंदिर स्थित है, जहां श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।स
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