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गड़बड़झाला : परिषदीय विद्यालयों में जुगाड़ से किताबें पहुंचाने की तैयारी
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बस्ती। बेसिक शिक्षा विभाग में परिषदीय बच्चों को मुफ्त में किताबें मुहैया कराने में अंदर ही अंदर लंबा खेल चल रहा है। शासन ने इस बार विद्यालय तक किताब पहुंचाने के लिए बजट आवंटन का प्रावधान बनाया है। इस मद में आने वाले खर्च का डिमांड भी विभाग से मांगा गया है। जानकारों के अनुसार इस बजट को हजम करने के चक्कर में विभाग के शातिर लोग लग गए हैं। विद्यालयों में किताब पहुंचाने की जिम्मेदारी अनुचरों की लगा दी गई है।
दरअसल पिछले सत्र में निशुल्क किताबों को विद्यालयों तक पहुंचाने के लिए परिषदीय शिक्षकों को लगाया गया था। इसका विरोध होने पर शासन ने संज्ञान लिया। इस बार व्यवस्था बनाई गई कि ब्लॉक संसाधन केंद्र से स्कूल तक एक अप्रैल से पहले ही किताब पहुंचा दी जाए। इसके लिए शासन ने इस बार बजट आवंटन की व्यवस्था बनाई है। बीएसए को निर्देशित किया गया है विद्यालय तक किताब पहुंचाने के लिए समय भीतर बजट का आंकलन कर निदेशालय के भेज दिया जाए। मगर यहां खेल उलटा चल रहा है।
शासन को प्रस्तावित बजट भेजने के साथ किताबों की ढुलाई का जिम्मा विद्यालयाें में तैनात अनुचरों की सौंप दी गई है। बीईओ स्तर से अनुचरों को किताब वितरण में ड्यूटी लगाने का निर्देश जारी किए जा रहे हैं। खबर हैं कि इसकी आड़ में अनुचराें से ही किताब की ढुलाई कराई जा रही है। गड़बड़झाला का यह खेल आजकल विभाग में चर्चा का केंद्र बन गया है।
बीईओ कप्तानगंज, सल्टौआ गोपालपुर और बहादुरपुर द्वारा अनुचरों के लिए जारी किए गए इस आशय का आदेश सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी इसकी पुष्टी नहीं करती है।
जिम्मेदार अधिकारी इस मसले पर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। यह तक नहीं बताया जा रहा है कि किताब की ढुलाई के लिए कितने बजट का आंकलन का शासन से डिमांड की गई है। कप्तानगंज में चार, सल्टौआ में 11 और बहादुरपुर में सात अनुचरों की ड्यूटी इस कार्य में लगाई गई है।
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दरअसल पिछले सत्र में निशुल्क किताबों को विद्यालयों तक पहुंचाने के लिए परिषदीय शिक्षकों को लगाया गया था। इसका विरोध होने पर शासन ने संज्ञान लिया। इस बार व्यवस्था बनाई गई कि ब्लॉक संसाधन केंद्र से स्कूल तक एक अप्रैल से पहले ही किताब पहुंचा दी जाए। इसके लिए शासन ने इस बार बजट आवंटन की व्यवस्था बनाई है। बीएसए को निर्देशित किया गया है विद्यालय तक किताब पहुंचाने के लिए समय भीतर बजट का आंकलन कर निदेशालय के भेज दिया जाए। मगर यहां खेल उलटा चल रहा है।
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शासन को प्रस्तावित बजट भेजने के साथ किताबों की ढुलाई का जिम्मा विद्यालयाें में तैनात अनुचरों की सौंप दी गई है। बीईओ स्तर से अनुचरों को किताब वितरण में ड्यूटी लगाने का निर्देश जारी किए जा रहे हैं। खबर हैं कि इसकी आड़ में अनुचराें से ही किताब की ढुलाई कराई जा रही है। गड़बड़झाला का यह खेल आजकल विभाग में चर्चा का केंद्र बन गया है।
बीईओ कप्तानगंज, सल्टौआ गोपालपुर और बहादुरपुर द्वारा अनुचरों के लिए जारी किए गए इस आशय का आदेश सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी इसकी पुष्टी नहीं करती है।
जिम्मेदार अधिकारी इस मसले पर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। यह तक नहीं बताया जा रहा है कि किताब की ढुलाई के लिए कितने बजट का आंकलन का शासन से डिमांड की गई है। कप्तानगंज में चार, सल्टौआ में 11 और बहादुरपुर में सात अनुचरों की ड्यूटी इस कार्य में लगाई गई है।